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अब नए मालिक के साथ ही टेकऑफ करेगी Go First, इस कंपनी ने दिखाई दिलचस्पी

दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही गो फर्स्ट को जल्द ही नया मालिक मिल सकता है. इस संबंध में एक दिग्गज कंपनी ने रुचि की अभिव्यक्ति जमा कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

मुश्किलों के तूफान में फंसी गो फर्स्ट एयरलाइन (Go First Airline) आखिरकार बिकने जा रही है. कंपनी ने आर्थिक संकट से बाहर निकलने की तमाम कोशिशें की, लेकिन सफल नहीं हो पाई. जिस तरह से बार-बार उड़ानों को स्थगित किया जा रहा था, उसी समय से लगभग यह साफ हो गया था कि कंपनी अब टेकऑफ नहीं कर पाएगी. बता दें कि गो फर्स्ट ने आर्थिक दिक्कतों और इंजन संबंधी समस्यओं के चलते तीन मई को उड़ानें बंद कर दी थीं और तब से अब तक एयरलाइन के विमान जमीन पर ही खड़े हैं. 

जिंदल पवार ने जमा किया EoI
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Go First को खरीदने की दौड़ में जिंदल पावर लिमिटेड सबसे आगे है. जिंदल पावर ने इसके लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) भी जमा का दी है. ईओआई (Expression of Interest) बोली प्रक्रिया में पहला कदम है, इसके जरिए पता चलता है कि कौन-कौन सी कंपनियां दिवालिया कंपनी को खरीदने की इच्छुक हैं. बताया जा रहा है कि जिंदल पावर एकमात्र सफल आवेदक रही, जिसकी रुचि की अभिव्यक्ति को Go First के लेंडर्स ने स्वीकार कर लिया है. गौरतलब है कि गो फर्स्ट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, IDBI बैंक और डॉयचे बैंक की कर्जदार है. एयरलाइन ने इन बैंकों का करीब 6,521 करोड़ रुपए नहीं चुकाया है. ऐसे में बैंक गो फर्स्ट की नीलामी से अपना पैसा जुटाने की तैयारी में हैं. 

विदेशियों ने भी दिखाई रुचि 
माना जा रहा है कि जिंदल पावर जल्द ही औपचारिक बोली जमा कर सकती है. बिना ईओआई फाइल किए कोई भी बोली नहीं लगा सकता और जिंदल फाइल EOI फाइल कर चुकी है. ईओआई सबमिट करने की आखिरी तारीख 28 सितंबर थी और उसके बाद आवेदनों का आकलन करने के लिए लेंडर्स की समिति की बैठक हुई. जिसमें जिंदल पावर के EoI को स्वीकार कर लिया गया. दो अन्य विदेशी संस्थाओं ने भी गो फर्स्ट को खरीदने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए ईओआई जमा किया था, लेकिन जिंदल पावर एकमात्र सफल आवेदक रहा.

अधर में कर्मचारियों का भविष्य
वाडिया समूह के स्वामित्व वाली 'गो फर्स्ट' ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की दिल्ली पीठ में स्वैच्छिक दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए भी आवेदन किया, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है और अब कंपनी दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है. वहीं, कंपनी के कर्मचारी अब दूसरा ठिकाना तलाश रहे हैं. कुछ वक्त पहले तक Go First के कर्मचारियों की संख्या लगभग 5,000 थी. कंपनी के हाल के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की उड़ानें बंद होने के तुरंत बाद से गो फर्स्ट के पायलट और क्रू मेंबर्स ने दूसरी एयरलाइन्स में नौकरी के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया था. इंडिगो और एयर इंडिया को गो फर्स्ट स्टाफ से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने की जानकारी भी सामने आई थी.
 


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