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किशोर बियानी की Future Enterprises खरीदने के लिए 2 दिग्गज कारोबारियों में होगी जंग!

कारोबारी किशोर बियानी की फ्यूचर एंटरप्राइजेज को खरीदने की जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. कंपनी पर भारी-भरकम कर्जा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

किसी जमाने में रिटेल किंग कहे जाने वाले किशोर बियानी (Kishor Biyani) की कंपनी फ्यूचर एंटरप्राइजेज (Future Enterprises) को खरीदने वालों की दौड़ में जिंदल फैमिली भी शामिल हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल (India) ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) प्रक्रिया के तहत फ्यूचर एंटरप्राइजेज के लिए डेट रिजॉल्यूशन सौंप दिया है. यहां यह भी जानना जरूरी है कि मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) भी किशोर बियानी की कर्ज में डूबी इस कंपनी को अपना बनाना चाहते हैं.  

जिंदल-अंबानी आमने-सामने
मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) बियानी की फ्यूचर एंटरप्राइजेज के लिए बोली लगा सकती है. हालांकि, रिलायंस रिटेल ने अब तक इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है. उसने इसके लिए 30 अक्टूबर तक का समय मांगा है. माना जा रहा है कि रिलायंस अपने फैसले के बारे में फ्यूचर एंटरप्राइजेज के क्रेडिटर्स को बताने के बाद ही ऑफर खोला जाएगा. यदि रिलायंस इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो कर्ज में डूबी फ्यूचर एंटरप्राइजेज के लिए जिंदल और अंबानी सामने-सामने होंगे. 

1987 में हुई ग्रुप की शुरुआत
फ्यूचर एंटरप्राइजेज पर करीब 11000 करोड़ रुपए का कर्ज है. NCLT यानी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 27 फरवरी को इसे दिवाला प्रक्रिया के लिए दाखिल किया था. दरअसल, फ्यूचर एंटरप्राइजेज को कर्ज देने वाले एक कर्जदाता ने एनसीएलटी में याचिका दाखिल की थी. उसका कहना था कि कंपनी  उसके कर्ज का भुगतान नहीं कर पा रही है, लिहाजा उसे दिवालिया घोषित किया जाए. बता दें कि फ्यूचर ग्रुप 1987 में अस्तित्व में आया था. 2001 में समूह ने भारत में पहला 'बिग बाजार स्टोर' खोला. बियानी का यह कांसेप्ट लोगों को इतना पसंद आया कि 6 साल के अंदर देश में इसके लगभग 100 स्टोर हो गए. इस सफलता के बाद बियानी के 'फ्यूचर ग्रुप' ने दूसरे सेक्टर्स में पैर फैलाना शुरू किया और 2007 में फ्यूचर जनरल इंश्योरेंस को लॉन्च किया गया. उसी साल फ्यूचर कैपिटल भी अस्तित्व में आई. बियानी के लिए यहां तक सबकुछ ठीक चल रहा था, फिर आने वाले सालों में उनका मुश्किल दौर शुरू हो गया और अब फ्यूचर एंटरप्राइजेज और फ्यूचर रिटेल बिकने जा रही हैं.

रिटेल पर इतना है कर्ज
फ्यूचर ग्रुप की फ्यूचर रिटेल भी इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया से गुजर रही है. कुछ वक्त पहले आई एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूचर ग्रुप (Future Group) पर करीब 29000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी 21000 करोड़ है. इस कंपनी को अपना बनाने के लिए कई कंपनियां दौड़ में शामिल थीं. अप्रैल में 49 कंपनियों ने अधिग्रहण के लिए रुचि पत्र भेजे थे, लेकिन स्पेस मंत्र प्राइवेट को छोड़कर अधिकांश पीछे हट गईं. फ्यूचर रिटेल के लिए सर्वाधिक बोली स्पेस मंत्र प्राइवेट ने लगाई थी. कंपनी ने 550 करोड़ रुपए की पेशकश की, लेकिन फ्यूचर रिटेल के ऋणदाताओं ने उसे खारिज कर दिया है. स्पेस मंत्रा लेनदार समिति (CoC) की ई-वोटिंग प्रक्रिया में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही. इसी साल जुलाई में प्रस्ताव सीओसी के समक्ष पेश किया गया था.

एंटरप्राइजेज में दिलचस्पी क्यों?
फ्यूचर रिटेल की तुलना में फ्यूचर एंटरप्राइजेज के लिए बेहतर बोली की उम्मीद की जा रही है. दरअसल, इस कंपनी की बोली जीतने वाले को जनरल इंश्योरेंस कपनी में 25.5% और लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में करीब नौ प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी. पिछले साल मई में जनरल इंश्योरेंस कंपनी की वैल्यू 5,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी. ऐसे में जिंदल और अंबानी जैसे कारोबारी फ्यूचर एंटरप्राइजेज खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. 


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