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कमबैक करने वाली है जेट एयरवेज, इन गलतियों के चलते हुई थी ‘क्रैश’
जेट एयरवेज के फिर से ऑपरेशन शुरू करने से जहां एविएशन सेक्टर की वर्कफ़ोर्स को एक और विकल्प मिलेगा. वहीं, यात्रियों को भी कुछ न कुछ फायदा ज़रूर होगा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
जेट एयरवेज फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है. उम्मीद है कि सितंबर से जेट के विमान आकाश में नज़र आने लगेंगे. कंपनी के फिर से ऑपरेशन शुरू करने से जहां एविएशन सेक्टर की वर्कफ़ोर्स को एक और विकल्प मिलेगा. वहीं, यात्रियों को भी कुछ न कुछ फायदा ज़रूर होगा. क्योंकि अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए जेट एयरवेज को आकर्षक फेयर रखना होगा, जिससे अन्य एयरलाइन्स भी किराए में कमी के लिए मजबूर हो जाएंगी. जेट एयरवेज ने 2019 में अपनी उड़ानें बंद करने का ऐलान किया था, यानी तीन साल कंपनी कमबैक कर रही है.
कैसे जमीन पर आई कंपनी?
ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि आखिर किसी जमाने में आसमान में राज करने वाली जेट एयरवेज जमीन पर कैसे आ गिरी और क्या अब उसके लिए इस सेक्टर में सर्वाइव करना संभव है? नरेश गोयल ने 1992 में जेट एयरलाइन की शुरुआत की थी. यह हवाई यात्रियों के लिए एयर इंडिया के विकल्प के तौर पर सामने आई थी. एक वक्त कंपनी के पास कुल 120 विमान थे. जेट एयरवेज की टैग लाइन थी, 'द ज्वॉय ऑफ फ्लाइंग'. अपने पीक टाइम में कंपनी हर रोज करीब 650 फ्लाइट्स का ऑपरेशन करती थी.
‘सहारा’ से नहीं मिला सहारा
2004 में बाजार के 40% हिस्से पर जेट का ही कब्ज़ा था, तब लग रहा था कि कंपनी को कोई टक्कर नहीं दे सकता. लेकिन नए प्लेयर्स की एंट्री और गलत नीतियों ने जेट एयरवेज को जमीन पर पटक दिया. इंडिगो और स्पाइस जेट ने जेट एयरवेज के मार्केट को प्रभावित किया. इनसे टक्कर लेने के लिए नरेश गोयल सस्ते की जंग में फंस गए. इसके अलावा, 2006 में उन्होंने 2300 करोड़ रुपये देकर एयर सहारा को खरीदा, लेकिन भारी निवेश की कीमत वसूलने में नाकाम रहे.
सस्ते टिकट बेचे
इंडिगो, स्पाइस जेट और गो एयरलाइंस जैसी बजट एयरलाइंस से अपना मार्केट बचाने के लिए जेट एयरवेज ने सही और कारगर रणनीति नहीं बनाई. इसके उलट, लागत से सस्ते टिकट बेचने की रणनीति तक खुद को सीमित कर लिया, इससे घाटे और मुनाफे के बीच का अंतर लगातार बढ़ता गया. मार्च 2019 तक कंपनी का घाटा 5,535.75 करोड़ रुपए का हो चुका था. हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद नरेश गोयल ने कंपनी को बंद करने का फैसला लिया. अपने आखिरी वक्त में कंपनी के बेड़े में केवल 16 विमान ही बचे थे.
क्या है संभावना?
जेट एयरवेज ऐसे समय में एंट्री कर रही है जब इंडिगो टॉप पर पहुंच चुकी है और तमाम एयरलाइन्स बाज़ार में मौजूद हैं. निवेशक राकेश झुनझुनवाला की सस्ती एयरलाइन आकाश एयर भी जल्द उड़ान भरने वाली है. इसके अलावा, टाटा के साथ एयर इंडिया का परफॉरमेंस भी ट्रैक कर आ रहा है. इसलिए, उसके लिए अब खुद को पहले जैसी पोजीशन में पहुंचाना आसान नहीं होगा. कंपनी को बेहद सोच-समझकर रणनीति बनानी होगी. उसे एयर फेयर आकर्षक रखना होगा, लेकिन पिछले परिणामों को भी ध्यान में रखना होगा.
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