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जेन स्ट्रीट विवाद: नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट पर इनकम टैक्स की छापेमारी

SEBI द्वारा सख्त कदम, टैक्स छापेमारी और शेयर कीमत में गिरावट यह संकेत देती है कि संस्थागत ग्राहकों के साथ काम करते समय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

पलक शाह

नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट (पहले एडलवाइस सिक्योरिटीज) भारत में कई वित्तीय विवादों के केंद्र में आ गया है, जिससे उस पर नियामकीय एजेंसियों की गहन नजर बनी हुई है. 31 जुलाई, 2025 को आयकर विभाग ने नुवामा के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जो कि जेन स्ट्रीट के घरेलू ट्रेडिंग पार्टनर के रूप में इसकी भूमिका से जुड़ा हुआ था. इसके अलावा, नुवामा का नाम हाई-प्रोफाइल केतन पारेख फ्रंट-रनिंग घोटाले में भी सामने आया था, जिससे इसकी अनुपालन प्रणाली और निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं.

जेन स्ट्रीट पर SEBI के आदेश के तुरंत बाद, एशिया पैसिफिक-केंद्रित प्राइवेट इक्विटी कंपनी PAG, जिसके पास नुवामा में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी है, ने कहा कि वह अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है.

इनकम टैक्स छापेमारी और जेन स्ट्रीट जांच

31 जुलाई, 2025 को आयकर विभाग ने पूरे भारत में 200 से अधिक स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया, जो उन संस्थाओं को निशाना बना रहा था जिन पर धोखाधड़ी वाले टैक्स कटौती को बढ़ावा देने का संदेह था. जांच के दायरे में नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट भी शामिल था, खासतौर से जेन स्ट्रीट के साथ इसके संबंधों को लेकर. जेन स्ट्रीट एक अमेरिकी प्रॉप्रायटरी ट्रेडिंग फर्म है. छापेमारी में नुवामा की उस भूमिका पर फोकस किया गया जिसमें वह भारत में जेन स्ट्रीट के ऑन-ग्राउंड ट्रेडिंग पार्टनर के रूप में इक्विटी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए कस्टोडियल और ब्रोकिंग सेवाएं प्रदान करता था.

SEBI जेन स्ट्रीट की कथित रूप से भ्रामक ट्रेडिंग गतिविधियों की जांच कर रहा है, खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F\&O) सेगमेंट में. एक प्रमुख मुद्दा यह है कि डेरिवेटिव एक्सपायरी दिनों पर जेन स्ट्रीट की 28 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी की रिपोर्ट सामने आई है, जो कि असामान्य रूप से उच्च है और जिसे नुवामा जैसे ब्रोकरों द्वारा अनदेखा कर दिया गया.

आलोचकों का तर्क है कि संदिग्ध ट्रेडिंग पैटर्न को चिन्हित करने में नुवामा की विफलता या तो लापरवाही को दर्शाती है या फिर जेन स्ट्रीट की गतिविधियों को बढ़ावा देने में मिलीभगत को. आरोप यह है कि एक प्रमुख ब्रोकरेज के रूप में नुवामा को ऐसे ट्रेड्स का पता लगाने और रिपोर्ट करने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली लागू करनी चाहिए थी, जो उसने कथित रूप से नहीं की. टैक्स छापेमारी टैक्स चोरी की योजनाओं पर व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन नुवामा और जेन स्ट्रीट के बीच हुए लेनदेन पर विशेष ध्यान इस बात को उजागर करता है कि नुवामा नियामकीय मानकों का कितना पालन कर रहा था.

आयकर विभाग यह जांच कर रहा है कि क्या नुवामा की कस्टोडियल और ब्रोकिंग सेवाओं ने जेन स्ट्रीट को बाजार में मौजूद खामियों का फायदा उठाने में सक्षम बनाया, जिससे टैक्स चोरी या बिना घोषित किए गए मुनाफे की संभावना बनी. 31 जुलाई, 2025 तक नुवामा की किसी भी गलत गतिविधि का कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन इन छापेमारियों ने उसके आंतरिक नियंत्रण और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रियाओं पर जांच को तेज कर दिया है.

केतन पारेख फ्रंट-रनिंग घोटाला

नुवामा का नाम केतन पारेख से जुड़े एक फ्रंट-रनिंग घोटाले में भी सामने आया है, जो कि 2001 के शेयर बाजार दुर्घटना में अपनी भूमिका के लिए बदनाम एक कुख्यात स्टॉक मार्केट मैनिपुलेटर है. 2 जनवरी, 2025 को SEBI ने 188 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया जिसमें एक परिष्कृत फ्रंट-रनिंग योजना का विवरण दिया गया, जिससे ₹65.77 करोड़ का अवैध लाभ कमाया गया. इस योजना में केतन पारेख, सिंगापुर स्थित ट्रेडर रोहित सालगांवकर और 20 अन्य संस्थाएं शामिल थीं, जिनमें नुवामा और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज एक अमेरिकी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के लिए “बिग क्लाइंट” के रूप में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे.

फ्रंट-रनिंग योजना की कार्यप्रणाली

SEBI की जनवरी 2021 से जून 2023 तक चली जांच के अनुसार, फ्रंट-रनिंग ऑपरेशन कुछ इस प्रकार से संचालित हुआ:

रोहित सालगांवकर और नुवामा की भूमिका : सालगांवकर ने अपनी कंपनी स्ट्रेट क्रॉसिंग प्राइवेट लिमिटेड (Strait Crossing Pte Limited - SCPL) के माध्यम से नुवामा और मोतीलाल ओसवाल के साथ रेफरल एग्रीमेंट किए थे, ताकि "बिग क्लाइंट" एक अमेरिकी फंड जो वैश्विक स्तर पर लगभग $2.5 ट्रिलियन का प्रबंधन करता है, के ट्रेड्स को रूट किया जा सके. सालगांवकर को ₹27.07 करोड़ की रेफरल फीस प्राप्त हुई, जो इन ट्रेड्स से उत्पन्न ब्रोकरेज आय का 75% था, जो संस्थागत ग्राहकों के लिए असामान्य रूप से अधिक प्रतिशत है. नुवामा और मोतीलाल ओसवाल के ट्रेडर्स ने बिग क्लाइंट के ऑर्डर निष्पादित करने से पहले सालगांवकर से परामर्श किया, जिससे उसे संभावित बड़े ट्रेड्स से जुड़ी गैर-सार्वजनिक जानकारी (NPI) जैसे शेयर के नाम, मात्रा और कीमत  तक पहुंच प्राप्त हुई.

केतन पारेख की भूमिका : सालगांवकर ने कथित रूप से यह NPI केतन पारेख को दी, जिसने इस फ्रंट-रनिंग योजना को अंजाम दिया. पारेख ने कोलकाता स्थित कंपनियों के नेटवर्क का उपयोग किया, जिनमें छह फ्रंट-रनर्स (FRs) शामिल थे, जैसे GRD Securities Ltd, Salasar Stock Broking Ltd, Basukinath Properties Pvt Ltd, और APR Properties Pvt Ltd. इन संस्थाओं ने बिग क्लाइंट के ऑर्डर्स से पहले ही शेयरों की खरीद-बिक्री की, जिससे उन्हें ₹38.7 करोड़ का अवैध लाभ हुआ. कुल गैरकानूनी कमाई ₹65.77 करोड़ आंकी गई.

गुप्त संचालन: पारेख ने अपने सहयोगियों से संपर्क करने के लिए कम से कम 10 मोबाइल नंबरों का उपयोग किया, जो विभिन्न नामों पर पंजीकृत थे. उसने “जैक,” “जॉन,” “बॉस,” और “भाई” जैसे छद्म नामों का इस्तेमाल किया. SEBI ने इन नंबरों को पारेख के मुंबई स्थित आवास और यात्रा स्थलों से जोड़ा. इनमें से एक नंबर उसकी पत्नी ममता पारेख से जुड़ा था, जो जांच के लिए अहम सुराग साबित हुआ. पारेख के जन्मदिन पर “Jack Latest” को भेजी गई शुभकामनाओं वाली व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्ड्स ने उसकी पहचान की पुष्टि की. एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और अनौपचारिक नकद हस्तांतरण नेटवर्क (अंगड़िया) का उपयोग कर इस योजना को छिपाया गया.

नुवामा की भूमिका और SEBI के निष्कर्ष:
SEBI ने स्पष्ट किया कि नुवामा या मोतीलाल ओसवाल के खिलाफ कोई गलत आचरण का सबूत नहीं मिला, क्योंकि वे मुख्य रूप से बिग क्लाइंट के ट्रेड्स को निष्पादित कर रहे थे. हालांकि, सालगांवकर के साथ उनके रेफरल एग्रीमेंट ने उसे संवेदनशील ट्रेड डेटा तक पहुंचने की अनुमति दी, जिसका उसने दुरुपयोग किया. SEBI ने यह भी नोट किया कि नुवामा और मोतीलाल ओसवाल फ्रंट-रनिंग गतिविधियों का पता लगाने में विफल रहे, जिससे उनके आंतरिक नियंत्रणों पर सवाल खड़े हुए. नियामक ने दोनों फर्मों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य में उल्लंघन को रोकने के लिए अपनी प्रणालियों को सुदृढ़ करें.

नियामकीय कार्रवाई

SEBI के अंतरिम आदेश ने पारेख, सालगांवकर और अशोक कुमार पोद्दार (कोलकाता स्थित ब्रोकर और पारेख के सहयोगी) को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया और 22 संदिग्ध संस्थाओं के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया. नियामक ने ₹65.77 करोड़ के अवैध लाभ की वसूली का भी आदेश दिया, जिसे ब्याज अर्जित करने वाले खातों में जमा किया जाना है, जब तक आगे की कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती. आरोपियों को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 21 दिन का समय दिया गया, साथ ही प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प भी प्रदान किया गया.

नुवामा की कथित विफलताएं और बाजार पर प्रभाव

जेन स्ट्रीट जांच और केतन पारेख घोटाले दोनों में नुवामा की संलिप्तता इसकी निगरानी प्रणालियों में महत्वपूर्ण कमियों को उजागर करती है. जेन स्ट्रीट मामले में, डेरिवेटिव एक्सपायरी दिनों पर असामान्य रूप से उच्च मार्केट शेयर को चिन्हित न कर पाना इस बात का संकेत है कि असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न का पता लगाने के लिए नुवामा की निगरानी प्रणाली मजबूत नहीं थी.

इसी तरह, केतन पारेख मामले में, सालगांवकर के साथ नुवामा के रेफरल एग्रीमेंट ने गैर-सार्वजनिक जानकारी (NPI) के लीक होने का रास्ता खोला, जो दो साल से अधिक समय तक बिना पहचाने रह गया. ये घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या उच्च-मूल्य वाले संस्थागत ग्राहकों को संभालने और भ्रामक गतिविधियों का पता लगाने के लिए नुवामा की अनुपालन प्रणाली पर्याप्त है. जेन स्ट्रीट की भ्रामक ट्रेडिंग में सहायता और समर्थन देने के आरोप विशेष रूप से गंभीर हैं, क्योंकि वे या तो जानबूझकर की गई लापरवाही या सक्रिय मिलीभगत का संकेत देते हैं. हालांकि SEBI को अब तक फ्रंट-रनिंग योजना में नुवामा की प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन आंतरिक नियंत्रण को मजबूत करने का नियामक का निर्देश जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है. टैक्स छापेमारी ने संभावित वित्तीय अनियमितताओं जैसे कि बिना रिपोर्ट किए गए मुनाफे या नुवामा की सेवाओं के माध्यम से की गई टैक्स चोरी को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

नुवामा का बाजार प्रदर्शन प्रभावित

4 जुलाई, 2025 को, जेन स्ट्रीट विवाद की खबर के बाद नुवामा के शेयर की कीमत में 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जो उसके नियामकीय संकटों को लेकर निवेशकों की चिंता को दर्शाती है. हाई-प्रोफाइल घोटालों से बार-बार जुड़ाव से ग्राहकों और निवेशकों के बीच नुवामा के प्रति भरोसा कमजोर हो सकता है, जिससे इसकी एक प्रमुख वेल्थ मैनेजमेंट और ब्रोकिंग फर्म के रूप में प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है.

नियामकीय कार्रवाई

SEBI के अंतरिम आदेश ने पारेख, सालगांवकर और अशोक कुमार पोद्दार (कोलकाता स्थित ब्रोकर और पारेख के सहयोगी) को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया और 22 संदिग्ध संस्थाओं के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया. नियामक ने ₹65.77 करोड़ के अवैध लाभ की वसूली का भी आदेश दिया, जिसे ब्याज अर्जित करने वाले खातों में जमा किया जाना है, जब तक आगे की कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती. आरोपियों को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 21 दिन का समय दिया गया, साथ ही प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प भी प्रदान किया गया.

नुवामा की कथित विफलताएं और बाजार पर प्रभाव

जेन स्ट्रीट जांच और केतन पारेख घोटाले दोनों में नुवामा की संलिप्तता इसकी निगरानी प्रणालियों में महत्वपूर्ण कमियों को उजागर करती है. जेन स्ट्रीट मामले में, डेरिवेटिव एक्सपायरी दिनों पर असामान्य रूप से उच्च मार्केट शेयर को चिन्हित न कर पाना इस बात का संकेत है कि असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न का पता लगाने के लिए नुवामा की निगरानी प्रणाली मजबूत नहीं थी.

इसी तरह, केतन पारेख मामले में, सालगांवकर के साथ नुवामा के रेफरल एग्रीमेंट ने गैर-सार्वजनिक जानकारी (NPI) के लीक होने का रास्ता खोला, जो दो साल से अधिक समय तक बिना पहचाने रह गया. ये घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या उच्च-मूल्य वाले संस्थागत ग्राहकों को संभालने और भ्रामक गतिविधियों का पता लगाने के लिए नुवामा की अनुपालन प्रणाली पर्याप्त है. जेन स्ट्रीट की भ्रामक ट्रेडिंग में सहायता और समर्थन देने के आरोप विशेष रूप से गंभीर हैं, क्योंकि वे या तो जानबूझकर की गई लापरवाही या सक्रिय मिलीभगत का संकेत देते हैं. हालांकि SEBI को अब तक फ्रंट-रनिंग योजना में नुवामा की प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन आंतरिक नियंत्रण को मजबूत करने का नियामक का निर्देश जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है. टैक्स छापेमारी ने संभावित वित्तीय अनियमितताओं जैसे कि बिना रिपोर्ट किए गए मुनाफे या नुवामा की सेवाओं के माध्यम से की गई टैक्स चोरी को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

नुवामा का बाजार प्रदर्शन प्रभावित

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