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ISM 2.0 में चिप डिजाइन और टैलेंट पर होगा सबसे ज्यादा फोकस, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मिलेगी रफ्तार : वैष्णव

चिप डिजाइन को शीर्ष प्राथमिकता बनाकर, टैलेंट डेवलपमेंट और मजबूत इकोसिस्टम पर फोकस करते हुए सरकार भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का अहम केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

भारत सरकार सेमीकंडक्टर नीति के अगले चरण India Semiconductor Mission 2.0 के तहत चिप डिजाइन, टैलेंट डेवलपमेंट और मजबूत इकोसिस्टम को केंद्र में रखने जा रही है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊंचे स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करेगा.

ISM 2.0 में डिजाइन बनेगा पहली प्राथमिकता

बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बजट में घोषित ISM 2.0 मिशन के तहत सरकार का फोकस चिप डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने पर होगा. इसके साथ ही उपकरण, मटेरियल और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि Semicon 2.0 मिशन में डिजाइन को सबसे ऊपर, उसके बाद उपकरण और मटेरियल तथा फिर टैलेंट को गहराई से विकसित करने पर जोर रहेगा.

हाई-एंड डिजाइन में भारत की बढ़ती भूमिका

यह बयान ऐसे समय आया है जब क्वालकॉम टेक्नोलॉजीज ने 2 नैनोमीटर सेमीकंडक्टर डिजाइन का सफल टेप-आउट पूरा किया है, जिसमें भारत के इंजीनियरों की अहम भूमिका रही. हालांकि भारत में अभी इतनी उन्नत नोड पर चिप निर्माण नहीं हो रहा है, लेकिन सरकार डिजाइन को भविष्य की मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार मानकर आगे बढ़ रही है.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में अब एंड-टू-एंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट हो रहा है और देश की भूमिका में संरचनात्मक बदलाव आया है.

बैक-ऑफिस से एंड-टू-एंड डेवलपमेंट तक का सफर

मंत्री ने कहा कि वह दौर खत्म हो चुका है जब भारत को केवल बैक-ऑफिस डेवलपमेंट तक सीमित माना जाता था. आज कस्टमर प्रोडक्ट डेफिनिशन से लेकर फाइनल सिलिकॉन डिजाइन, टेप-आउट और वैलिडेशन तक पूरा प्रोसेस भारत में ही किया जा रहा है.

टैलेंट होगा ISM 2.0 की रीढ़

ISM 2.0 का एक अहम स्तंभ टैलेंट डेवलपमेंट होगा. सरकार सेमीकंडक्टर इंजीनियरों की वैश्विक कमी को देखते हुए सिस्टम-लेवल डिजाइन क्षमताएं विकसित कर रही है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने 10 साल में 85 हजार सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पिछले चार साल में ही 67 हजार इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. यह प्रशिक्षण 315 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में चल रहे कार्यक्रमों के जरिए दिया गया है. उन्होंने कहा कि भारत का यह मॉडल दुनिया के बहुत कम देशों में देखने को मिलता है, जहां छात्र खुद चिप डिजाइन कर रहे हैं, टेप-आउट कर रहे हैं और फाइनल प्रोडक्ट को वैलिडेट कर रहे हैं.

ग्लोबल टैलेंट गैप को पाट सकता है भारत

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में लगभग 10 लाख प्रोफेशनल्स की कमी है और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का मानना है कि भारत इस गैप का बड़ा हिस्सा भर सकता है.

मैन्युफैक्चरिंग के लिए चरणबद्ध रोडमैप

मैन्युफैक्चरिंग को लेकर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह एक दीर्घकालिक लक्ष्य है और भारत इसे बहुत व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाएगा. फिलहाल 28 नैनोमीटर निर्माण से शुरुआत की जा रही है और ISM 2.0 के अगले चरण में 7 नैनोमीटर तक पहुंचने का स्पष्ट रोडमैप तय किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार पहले चलना सीख रही है, उसके बाद दौड़ने की रणनीति पर काम किया जाएगा.

इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर

ISM 2.0 के तहत एडवांस्ड पीसीबी, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, डेटा सेंटर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स पर भी फोकस रहेगा, जिन्हें चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा हुआ माना जा रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ISM 2.0 को 1,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

20 साल की दीर्घकालिक रणनीति

अश्विनी वैष्णव ने सेमीकंडक्टर मिशन को मल्टी-डिकेड जर्नी बताया और कहा कि यह कोई शॉर्ट-टर्म प्रयास नहीं है. देश को कम से कम 20 साल का रोडमैप तैयार करना होगा, ताकि इस इंडस्ट्री में क्षमताओं का लगातार विकास होता रहे.

PLI और निवेश से मजबूत हो रहा सेक्टर

केंद्र सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम और नीतिगत सुधारों के जरिए वैश्विक चिपमेकर्स को आकर्षित करने की कोशिश की है. 2021 में शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक करीब 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें एक वेफर फैब प्लांट और कई ATMP और OSAT यूनिट्स शामिल हैं. इन प्रोजेक्ट्स में कुल निवेश प्रतिबद्धता लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की है.


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