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क्या खाली हो गई OCCRP की बंदूक या अभी और होंगे फायर? कारोबारियों में बेचैनी!  

अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ाने वाला संगठन OCCRP क्या और भी कुछ खुलासे कर सकता है, इसी पर सबकी निगाहें हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की अडानी समूह (Adani Group) को लेकर आई रिपोर्ट ने तहलका मचा दिया है. हर तरफ OCCRP की ही चर्चा है. इस बीच एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या OCCRP के आरोपों की बंदूक में केवल अडानी ग्रुप के नाम की ही गोली थी, या अभी और धमाके संभव हैं. बता दें कि अडानी समूह पर इस रिपोर्ट से कुछ दिन पहले ही खबर आ गई थी कि OCCRP भारत के कुछ औद्योगिक घरानों को लेकर बड़ा खुलासा करने की तैयारी में है. इन 'कुछ' घरानों में क्या केवल अडानी का ही नाम था या OCCRP ने किसी दूसरे समूह की भी जन्मकुंडली खंगाल रखी है, अब सब यही जानना चाहते हैं.

औद्योगिक घराने चिंतित
अडानी पर खुलासे से कुछ दिन पहले आईं खबरों में बताया गया था कि खोजी रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म OCCRP भारत के कुछ औद्योगिक घराने के बारे में रिपोर्ट या लेखों की एक सीरीज प्रकाशित कर सकता है. इसी को लेकर संभावना जताई जा रही है कि OCCRP की बंदूक से अभी कुछ और फायर हो सकते हैं. अडानी समूह पर खुलासे के बाद बाकी कारोबारियों में भी कुछ न कुछ बेचैनी है कि कहीं उन्हें लेकर कोई खुलासा न हो जाए. हिंडनबर्ग के खुलासे से अडानी समूह को हुए नुकसान से सभी वाकिफ हैं. इसलिए कोई नहीं चाहता कि उनके नाम की भी कोई रिपोर्ट प्रकाशित हो . 

कौन है OCCRP?
OCCRP का गठन यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लातिनी अमेरिका में फैले कम से कम 24 गैर-लाभकारी जांच केंद्रों द्वारा किया गया है. इस संगठन को अरबपति जॉर्ज सोरोस (George Soros) और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड (Rockefeller Brothers Fund) का समर्थन प्राप्त है. 2006 में अस्तित्व में आया OCCRP संगठित अपराध पर रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता का दावा करता है और मीडिया हाउसेस के साथ साझेदारी में रिपोर्ट, लेखों को प्रकाशित करता है. OCCRP को जॉर्ज सोरोस की यूनिट ओपन सोसायटी फाउंडेशन फंड मुहैया कराती है. इसके अलावा, उसे फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर ब्रदर्स फंड और ओक फाउंडेशन से भी फंड मिलता है. 

कौन हैं वो दो नाम?
OCCRP ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अडानी ग्रुप ने गुपचुप तरीके से खुद अपने शेयर खरीदकर स्टॉक एक्सचेंज में लाखों डॉलर का निवेश किया था. इस खुलासे में दो लोगों के नाम सामने आए हैं. रिपोर्ट बताती है कि नासिर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग ने अडानी के शेयरों में खरीद फरोख्त की, इन दोनों के अडानी परिवार से पुराने व्यापारिक संबंध हैं. दोनों ने अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी से जुड़ी कंपनियों में निवेशक और शेयरधारक के तौर पर काम किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Nasser Ali Shaban Ahli यूएई के कारोबारी हैं और उन्हें गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी का करीबी माना जाता है. वहीं, चांग चुंग-लिंग एक चीनी कारोबारी हैं और गुदामी इंटरनेशनल नामक कंपनी चलाते हैं. OCCRP का दावा है कि 2002 से गुदामी इंटरनेशल अडानी समूह की रिलेटेड पार्टी रही है.


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