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ईरान संकट की मार, भारतीय बाजार में बासमती चावल के दाम गिरे
ईरान-इजरायल तनाव ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाओं का असर भारतीय कृषि और निर्यात बाजारों पर कितनी तेजी से पड़ सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की कृषि मंडियों तक पहुंचने लगा है. खासतौर पर बासमती चावल के निर्यात पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के मुताबिक, ईरान में हालात बिगड़ने से वहां होने वाला बासमती चावल निर्यात प्रभावित हुआ है, जिसके चलते घरेलू बाजार में कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है.
एक्सपोर्ट रुकने से घरेलू बाजार में दबाव
IREF के अनुसार, ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है और पेमेंट साइकिल भी बाधित हुई है. इसका नतीजा यह हुआ कि निर्यात के लिए तैयार बासमती चावल घरेलू बाजार में आने लगा, जिससे सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना. मार्केट सूत्रों का कहना है कि बीते एक सप्ताह में बासमती चावल की अलग-अलग किस्मों के दाम 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं.
IREF ने जताई चिंता, भरोसे पर असर
IREF ने बताया कि मौजूदा संकट ने न सिर्फ लॉजिस्टिक्स बल्कि खरीदारों के भरोसे को भी कमजोर किया है. फेडरेशन का कहना है कि ईरान जैसे बड़े बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से एक्सपोर्टर्स सतर्क हो गए हैं और नए ऑर्डर लेने में झिझक दिख रही है, जिसका असर कीमतों पर साफ नजर आ रहा है.
ईरान भारत के लिए बड़ा बाजार रहा है
IREF के एक्सपोर्ट डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को करीब 468.10 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,225 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात किया. यह मात्रा करीब 5.99 लाख मीट्रिक टन रही. परंपरागत रूप से ईरान भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े और भरोसेमंद बाजारों में शामिल रहा है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस ट्रेड फ्लो को अनिश्चित बना दिया है.
एक्सपोर्टर्स को सतर्क रहने की सलाह
IREF के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. प्रेम गर्ग ने कहा कि ईरान भारतीय बासमती के लिए हमेशा एक अहम डेस्टिनेशन रहा है, लेकिन मौजूदा उथल-पुथल ने ट्रेड चैनल को प्रभावित किया है. उन्होंने बताया कि पेमेंट में देरी और शिपमेंट रिस्क बढ़ने से एक्सपोर्टर्स को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर क्रेडिट एक्सपोजर और डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर.
IREF की एडवाइजरी, जोखिम कम करने पर जोर
बदलते हालात को देखते हुए IREF ने एक्सपोर्टर्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें ईरानी कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े जोखिमों की दोबारा समीक्षा करने, ज्यादा सुरक्षित पेमेंट मैकेनिज्म अपनाने और केवल ईरान के लिए तैयार इन्वेंट्री पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की सलाह दी गई है. फेडरेशन ने किसानों और व्यापारियों दोनों से सोच-समझकर कदम उठाने की अपील की है.
अमेरिका के टैरिफ से भी बढ़ी चिंता
ईरान संकट के बीच, IREF ने अमेरिका की ओर से आने वाले टैरिफ संकेतों पर भी चिंता जताई है. फेडरेशन के अनुसार, अमेरिका पहले ही भारतीय चावल के निर्यात पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है, जो पहले 10 प्रतिशत हुआ करता था. ऐसे में पश्चिम एशिया की अस्थिरता और अमेरिकी टैरिफ, दोनों मिलकर भारतीय चावल निर्यात के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बना रहे हैं.
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