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इन 2 कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने को बेकरार है सरकार, पर नहीं मिल रहे खरीदार! 

मोदी सरकार 2 खाद कंपनियों में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की कोशिश काफी समय से कर रही है, लेकिन निवेशक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मोदी सरकार (Modi Government) अपने डिसइनवेस्टमेंट यानी विनिवेश अभियान के तहत कई सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी कम करना चाहती है. इस लिस्ट में राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) भी शामिल हैं. सरकार की योजना इन दिग्गज खाद कंपनियों में अपनी 10 से 20 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की है, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है. क्योंकि उसे खरीदार ही नहीं मिल रहे. बता दें कि काफी पहले ही यह साफ हो गया था कि मोदी सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी. 

ये है मोदी सरकार की योजना
एक मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दोनों खाद कंपनियों के लिए ऑफर फॉर सेल फिलहाल नहीं आने वाला. क्योंकि निवेशक इनमें खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) RCF में 10% और NFL में 20% हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में लगा हुआ है. दोनों कंपनियों में सरकार अपने हिस्से के 1200 करोड़ रुपए के शेयर बेचना चाहती है. दरअसल, केंद्र सरकार की योजना वित्त वर्ष 2023-24 में विनिवेश के माध्यम से 51 हजार करोड़ जुटाने की है, लेकिन अभी तक उसकी झोली में केवल 5601 करोड़ रुपए ही आए हैं. 

इस वजह से घटी दिलचस्पी 
राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) नामी कंपनियां हैं और मार्केट में भी इस समय तेजी का रुख है. ऐसे में यह सवाल लाजमी हो जाता है कि आखिर निवेशक इन पर दांव लगाने को इच्छुक क्यों नहीं हैं? जानकार मानते हैं कि बाजार में भले ही तेजी का माहौल हो, लेकिन खाद की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है, और यही वजह निवेशकों की दिलचस्पी को कम कर रही है. गौरतलब है कि सरकारी खाद कंपनियों में अभी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी मौजूदा समय में आधा प्रतिशत भी नहीं है.  

इन सेक्टर्स में है ज्यादा रुचि
रिपोर्ट के मुताबिक, RCF और NLF में निवेशकों की दिलचस्पी नहीं होने के चलते OFS की योजना अटकी हुई है. खाद सेक्टर के बजाये निवेशकों की दिलचस्पी डिफेंस और रेलवे पीएसयू में अधिक नजर आ रही है. ऐसा इसलिए कि खाद की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है, इसलिए निवेशकों के लिए उसमें मुनाफा कमाने की गुंजाइश एक सीमा पर आकर रुख जाती है. जबकि बाकी सेक्टर्स में मुनाफा काफी ज्यादा है. OFS की बात करें, तो ऑफर फॉर सेल कंपनी के शेयर बेचने का एक तरीका होता है जिसमें लिस्टेड कंपनी के प्रमोटरों को अपनी मौजूदा शेयरहोल्डिंग पारदर्शी तरीके से घटाने का मौका मिलता है.
 


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