होम / बिजनेस / लग्जरी होटल चलाने वाली कंपनी की लिस्टिंग रही ऑर्डिनरी, निवेशक हुए मायूस  

लग्जरी होटल चलाने वाली कंपनी की लिस्टिंग रही ऑर्डिनरी, निवेशक हुए मायूस  

शेयर बाजार में आज लग्जरी होटल चलाने वाली कंपनी जुनिपर होटल्स की लिस्टिंग हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लग्जरी होटल चलाने वाली जुनिपर होटल्स (Juniper Hotels) की शेयर बाजार में एंट्री हो गई है. हालांकि, कंपनी की लिस्टिंग निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने में सफल नहीं हो पाई है. जुनिपर होटल्स के शेयरों की BSE पर 361.20 रुपए और NSE पर 365 रुपए के भाव पर लिस्टिंग हुई है. इसका मतलब है कि कंपनी के आईपीओ में निवेश करने वालों 1 फीसदी से कुछ ज्यादा का लिस्टिंग गेन मिला है. बता दें कि इसके आईपीओ को निवेशकों का मिलाजुला रिस्पांस मिला था. 

अब तक इतना हुआ फायदा 
लिस्टिंग के बाद जुनिपर होटल्स के शेयरों में थोड़ा उछाल जरूर देखने को मिला, लेकिन वैसे नहीं जैसे निवेशकों को उम्मीद रही होगी. दिन चढ़ने के बाद आईपीओ निवेशक 6.02 फीसदी मुनाफे में पहुंच गए थे. Juniper Hotels IPO 1800 करोड़ रुपए का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 21 फरवरी से खुला था और 23 फरवरी को बंद हो गया था. इस आईपीओ को मिला-जुला रिस्पांस ही मिला था. यह ओवरऑल 2.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था. इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 3.11 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.89 गुना और खुदरा निवेशकों का आरक्षित हिस्सा 1.31 गुना सब्सक्राइब हुआ था. 

इतना था प्राइज बैंड 
इस आईपीओ के तहत 10 रुपए की फेस वैल्यू वाले 5 करोड़ नए शेयर जारी हुए हैं और इसका प्राइज बैंड 342 से 360 रुपए प्रति इक्विटी शेयर तय किया था. कंपनी आईपीओ से मिली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों को पूरा करने पर करेगी. आईपीओ के लिए दस्तावेज दाखिल करते समय कंपनी ने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में बताया था कि वो मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, रायपुर और हम्पी में 1836 कमरे ऑपरेट कर रही है. इसकी सराफ होटल्स और हयात होटल्स कॉरपोरेशन के साथ साझेदारी है. 

ऐसा है कंपनी का पोर्टफोलियो
पिछले साल सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, Juniper Hotels के पोर्टफोलियो में सात होटल्स और सर्विस्ड अपार्टमेंट्स हैं. कंपनी के वित्तीय सेहत पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2023 में उसे 1.5 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा था. इसी तरह, वित्त वर्ष 2022 में कंपनी को 188 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था. हालांकि, इस दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रिवेन्यु करीब दोगुना होकर 666.85 करोड़ रुपए पर पहुंच गया था. अब देखने वाली बात ये होगी कि आने वाले दिनों में कंपनी के शेयर कैसा परफॉर्म करते हैं.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

जून में भारत के सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी, 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा PMI

सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया.

1 hour ago

केरल से पनामा तक: ब्लैकरॉक का अदृश्य साम्राज्य

भारत के विझिंजम बंदरगाह को अडानी और MSC के बीच एक सामान्य लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन दस्तावेज कहीं अधिक बड़ी कहानी बताते हैं. 'उस गुप्त हाथ के पीछे का साम्राज्य' का दूसरा भाग

4 hours ago

हमारी मुंबई, उनकी बैलेंस शीट

वह अनकही कहानी कि कैसे गुजराती और जैन व्यापारी समुदायों ने बॉम्बे की वित्तीय संरचना खड़ी की, जबकि बाद में राजनीति ने उस पर दावा करने की कला को सिद्ध कर लिया.

5 hours ago

OMCs की अंडर-रिकवरी 2.19 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची, पेट्रोल-डीजल पर मिल सकती है राहत

हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराया. इसके चलते कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा.

6 hours ago

अडानी पर निवेशकों का भरोसा बरकरार, ₹15,000 करोड़ के QIP पर ₹38,000 करोड़ की बोलियां

कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) प्लांट के निर्माण, सड़क परियोजनाओं के लिए कंसेशन फीस के भुगतान और अन्य पूंजीगत खर्चों में करेगी.

6 hours ago


बड़ी खबरें

हमारी मुंबई, उनकी बैलेंस शीट

वह अनकही कहानी कि कैसे गुजराती और जैन व्यापारी समुदायों ने बॉम्बे की वित्तीय संरचना खड़ी की, जबकि बाद में राजनीति ने उस पर दावा करने की कला को सिद्ध कर लिया.

5 hours ago

जून में भारत के सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी, 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा PMI

सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया.

1 hour ago

W.O.R.L.D. मॉडल: आपके संगठन की अदृश्य संरचना को देखने के लिए एक विश्व-निर्माण ढांचा

इस लेख में नवाचार रणनीतिकार रंजन मलिक ने W.O.R.L.D. मॉडल पेश किया है, जो बताता है कि किसी भी संगठन में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत उसकी 'अदृश्य दुनिया' को समझने से होती है.

2 hours ago

गेल की वित्तीय रणनीति को मिलेगी नई दिशा, एस.के. सिन्हा बने निदेशक (वित्त)

तीन दशक से अधिक के अनुभव वाले वित्त विशेषज्ञ एस.के. सिन्हा अब गेल (इंडिया) की वित्तीय रणनीति और भविष्य की विकास योजनाओं का नेतृत्व करेंगे.

4 hours ago

केरल से पनामा तक: ब्लैकरॉक का अदृश्य साम्राज्य

भारत के विझिंजम बंदरगाह को अडानी और MSC के बीच एक सामान्य लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन दस्तावेज कहीं अधिक बड़ी कहानी बताते हैं. 'उस गुप्त हाथ के पीछे का साम्राज्य' का दूसरा भाग

4 hours ago