सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन इन शेयरों में निवेश से भर सकती है झोली! 

आज शेयर बाजार के लिए सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन है. कुछ शेयरों में आज तेजी के संकेत मिल रहे हैं.

Last Modified:
Friday, 26 May, 2023
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शेयर बाजार (Stock Market) में गुरुवार को भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. हालांकि कारोबारी सत्र की समाप्ति पर मार्केट तेज लिवाली के चलते हरे निशान पर बंद हुआ. इस दौरान, BSE सेंसेक्स 98.98 अंक की बढ़त के साथ 61,872.62 और NSE निफ्टी 35.75 अंक के उछाल के साथ 18,321.15 पर पहुंच गया. अडानी समूह की कंपनियों के लिए गुरुवार कुछ राहत लेकर आया. समूह की ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. 6 फीसदी से ज्यादा लुढ़कने के बाद Adani Enterprises Ltd कल 2.92% की मजबूती के साथ बंद हुआ. 

तेजी और मंदी के संकेत
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) ने आज कुछ शेयरों में तेजी का रुख दर्शाया है. इसमें Indian Hotels, Engineers India, Apollo Tyres और United Breweries शामिल हैं. इसके साथ ही MACD ने कुछ शेयरों में मंदी के भी संकेत दिए हैं. यानी इनमें आज गिरावट देखने को मिल सकती है. इस लिस्ट में Lemon Tree Hotels, Jubilant Food, Lakshmi Machine, InterGlobe और Century Ply शामिल हैं. हालांकि Jubilant Food के शेयरों में कल 3.84% की तेजी आई थी और यह 492 रुपए पर पहुंच गया था. 

अच्छा है पिछला रिकॉर्ड 
तेजी के संकेत वाले शेयरों के पिछले रिकॉर्ड की बात करें, तो Indian Hotels के शेयर कल 1.47% की उछाल के साथ 380.75 रुपए पर बंद हुए थे. इस शेयर ने पिछले एक महीने में 11.67% का रिटर्न दिया है और यह अपने 52 वीक के हाई लेवल 389.40 के करीब पहुंच गया है. Engineers India Ltd के शेयरों में भी कल करीब 2 फीसदी का उछाल आया. 110.50 रुपए के भाव पर मिल रहा ये शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर 111 रुपए की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. Apollo Tyres के लिए भी गुरुवार अच्छा रहा. इस दौरान उसमें 1.26% की मजबूती आई. बीते 5 दिनों में इसने करीब 7 और एक महीने में 16.07% का रिटर्न दिया है. वहीं, United Breweries भी तेजी के साथ 1,443 रुपए पर पहुंच गया है.

इनमें मजबूत खरीदारी
इसके अलावा, IDFC, Global Health, Chalet Hotels, Balkrishna Ind, Aster DM Health, KPIT Tech और Ceat के शेयरों पर भी आज नजर बनाए रखें. इन शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. 


रिलायंस के शेयरधारकों ने जियो की पार्टी की कीमत चुकाई

जियो ने 30,200 करोड़ रुपये जुटाए. उसी दिन रिलायंस का बाजार मूल्य 51,700 करोड़ रुपये घट गया. बाहरी निवेशकों ने भारत के सबसे चर्चित शेयर को छूट पर खरीदा, जबकि जिन लोगों के पास यह पहले से था, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
BWHindia

पलक शाह

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के साथ हुआ अन्याय?

बुधवार को मुकेश अंबानी के कारोबारी साम्राज्य के लिए सबसे बड़ा दिन था.

जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग 21 फीसदी प्रीमियम पर हुई और शेयर करीब 27 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. पहले ही दिन यह भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई. अंबानी समूह कुल बाजार मूल्य के मामले में टाटा समूह से आगे निकल गया. मुंबई के मरीन ड्राइव से लेकर दुबई के बुर्ज खलीफा तक जश्न मनाया गया, रोशनी और शो आयोजित किए गए.

लेकिन एक समूह इस जश्न से बाहर रह गया: वे लोग, जिनके पास जियो पहले से था.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2 करोड़ से अधिक शेयरधारक रिलायंस के शेयरों के जरिए जियो के मालिक रहे हैं, जब से इसका पहला सिम कार्ड बेचा गया था. बुधवार को जब उनकी कंपनी का सबसे कीमती कारोबार तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बाजार में उतरा, तब उन्होंने अपने ही शेयर को गिरते हुए देखा.

रिलायंस का शेयर 3.19 फीसदी गिरकर 1,158 रुपये पर आ गया, जो इसके 52 सप्ताह के निचले स्तर से सिर्फ 5.80 रुपये ऊपर था.

दिन का गणित

आइए, आंकड़ों को समझते हैं.

30,188 करोड़ रुपये: जियो ने आईपीओ से इतनी रकम जुटाई.

51,700 करोड़ रुपये: उसी दिन रिलायंस के शेयरधारकों के बाजार मूल्य में इतनी गिरावट आई.

कारोबारी सत्र की शुरुआत में रिलायंस का मूल्य करीब 16.19 लाख करोड़ रुपये था. सत्र के अंत में यह घटकर 15.67 लाख करोड़ रुपये रह गया.

मूल कंपनी को अपनी सहायक कंपनी द्वारा जुटाई गई रकम से 1.7 गुना अधिक का नुकसान हुआ. यह मूल्य को सामने लाने की प्रक्रिया नहीं थी. लिस्टिंग के दिन उन शेयरधारकों के लिए मूल्य का विनाश हुआ, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक इंतजार किया था.

बाहरी निवेशकों ने छूट पर खरीदा

आईपीओ ने बाजार को वह सौदा दिया, जो रिलायंस के शेयरधारकों को कभी नहीं मिला.

बाहरी निवेशकों ने जियो को 1,119 रुपये प्रति शेयर पर खरीदा. शाम तक इसकी कीमत 1,417.50 रुपये हो गई. एंकर निवेशकों, संस्थानों, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और खुदरा निवेशकों को एक ही दिन में 27 करोड़ नए शेयरों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का सामूहिक लाभ हुआ.

लिस्टिंग हुई. पिछले दरवाजे का रास्ता बंद हुआ. शेयर गिर गया.

रिलायंस के शेयरधारकों को उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में जियो के शेयर नहीं मिले. इसके बजाय उन्हें दो चीजें मिलीं:

हिस्सेदारी में कमी.

आईपीओ नए शेयर जारी करके लाया गया था, इसलिए जियो में रिलायंस की हिस्सेदारी 66.43 फीसदी से घटकर करीब 64.48 फीसदी रह गई. नया पैसा जियो में आया, जिसका ज्यादातर इस्तेमाल उसका कर्ज चुकाने में होना है, जबकि नए शेयर बाहरी निवेशकों को मिले.

कतार में एक जगह.

एक आरक्षित कोटे के तहत रिलायंस के शेयरधारक बाकी निवेशकों के समान कीमत पर लॉटरी के जरिए जियो के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते थे.

देखिए, इसका मूल्य कितना था. 12 शेयरों के एक लॉट के आवंटन से बुधवार को 3,582 रुपये का लाभ हुआ. उसी दिन रिलायंस के हर शेयर पर 38.20 रुपये का नुकसान हुआ.

94 से अधिक रिलायंस शेयर रखने वाले किसी भी शेयरधारक को रिलायंस में हुए नुकसान की रकम, जियो के एक लॉट से हुए लाभ से अधिक थी. इतनी हिस्सेदारी का मूल्य मुश्किल से 1.1 लाख रुपये था. शेयरधारकों को मिला कथित ‘इनाम’ उनके अपने ही नुकसान से मिट गया.

वह चेतावनी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

इस स्थिति का अनुमान दो साल पहले ही लिखित रूप में लगाया गया था.

जब पहली बार जियो की लिस्टिंग पर चर्चा हुई थी, तब जेफरीज ने दो रास्ते बताए थे. रिलायंस फाउंडेशन के बजाय जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के मामले की तरह स्पिन-ऑफ किया जाता, तो हर रिलायंस शेयरधारक को सीधे जियो के शेयर मिलते और होल्डिंग कंपनी पर लागू छूट से बचा जा सकता था. आईपीओ के जरिए रिलायंस अपना नियंत्रण बनाए रख सकती थी, लेकिन ब्रोकर ने चेतावनी दी थी कि इससे होल्डिंग कंपनी पर 20 फीसदी या उससे अधिक की छूट लागू हो सकती है.

जेफरीज का अनुमान था कि स्पिन-ऑफ से रिलायंस के शेयर में 15-18 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. रिलायंस ने आईपीओ का रास्ता चुना.

इसका समझौता स्पष्ट था. स्पिन-ऑफ से जियो पर प्रमोटरों का प्रभावी नियंत्रण करीब 66 फीसदी से घटकर लगभग 33 फीसदी रह जाता. आईपीओ ने नियंत्रण रिलायंस के हाथों में बनाए रखा. अब बाजार ने उस नियंत्रण की कीमत तय कर दी है और रिलायंस के अल्पांश शेयरधारक इसकी कीमत चुका रहे हैं.

टेलीकॉम कारोबार से कम मूल्य का पूरा कारोबारी समूह

यह वह आंकड़ा है, जिसे हर रिलायंस शेयरधारक को लेकर चिंतित होना चाहिए.

जियो में रिलायंस की 64.48 फीसदी हिस्सेदारी का मूल्य अब करीब 8.41 लाख करोड़ रुपये है. पूरी रिलायंस कंपनी का मूल्य 15.67 लाख करोड़ रुपये है.

इससे बाकी सभी कारोबारों के लिए 7.26 लाख करोड़ रुपये बचते हैं: भारत का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स, सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल कारोबार, देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन, तेल और गैस कारोबार तथा नवीकरणीय ऊर्जा में वह निवेश, जिसे अंबानी ने रिलायंस का भविष्य बताया है.

इन सभी का संयुक्त मूल्य अब टेलीकॉम कंपनी में रिलायंस की हिस्सेदारी के मूल्य से भी कम आंका जा रहा है, जिसकी लिस्टिंग सिर्फ एक दिन पहले हुई थी.

जो निवेशक जियो में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें अब इसके लिए रिलायंस के शेयर खरीदने की जरूरत नहीं है. बाजार में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, बुधवार को निवेशकों ने इसी दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि वेल्थ डेस्क और फैमिली ऑफिस जियो को सीधे खरीदने के लिए रिलायंस के शेयर बेच रहे थे.

लंबी गिरावट

बुधवार की गिरावट कोई एक दिन की घटना नहीं थी.

सितंबर में रिलायंस का शेयर 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था. जियो का आईपीओ राहत देने वाला कदम माना जा रहा था, जिससे आखिरकार कंपनी के भीतर छिपे मूल्य को सामने आने की उम्मीद थी. निवेशकों ने जियो में अप्रत्यक्ष निवेश के विकल्प के रूप में आईपीओ से पहले रिलायंस के शेयर खरीदे थे.

अब रिलायंस का शेयर 1,611.80 रुपये के 52 सप्ताह के उच्च स्तर से 28 फीसदी नीचे है. पिछले एक साल में इसमें 22 फीसदी और छह महीने में 17 फीसदी की गिरावट आई है. छह साल पहले मेटा, गूगल और वैश्विक फंडों को जियो की हिस्सेदारी बेचने के बाद रिलायंस का शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था. इस बार जियो की लिस्टिंग ने इसे नए निचले स्तरों की ओर धकेल दिया.

बचाव में क्या तर्क दिए जाएंगे?

उनके पास भी कुछ तर्क हैं और उन्हें सुना जाना चाहिए.

मूडीज ने आईपीओ को क्रेडिट के लिहाज से सकारात्मक बताया था, क्योंकि इससे प्राप्त 27,500 करोड़ रुपये जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होंगे और पूरे समूह की ब्याज लागत कम होगी. रिलायंस का जियो पर नियंत्रण अब भी बरकरार है. उसकी हिस्सेदारी का मूल्य अब बाजार भाव के आधार पर तय हो रहा है. 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले सतर्कता ने भी पूरे बाजार पर दबाव डाला. एयरटेल का शेयर भी गिरा.

लेकिन इनमें से कोई भी बात यह नहीं समझाती कि उसी दिन बाहरी निवेशकों ने 8,000 करोड़ रुपये कमाए, जबकि अंदरूनी शेयरधारकों को 51,700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

असली परीक्षा कल होगी

रिलायंस 30 अक्टूबर, शुक्रवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी. पहली बार विश्लेषक ऐसी रिलायंस का मूल्यांकन करेंगे, जिसका सबसे बड़ा विकास इंजन अब अलग से बाजार में कारोबार कर रहा है और जिसका मूल्य बाजार भाव पर तय हो रहा है. साथ ही, होल्डिंग कंपनी पर छूट भी लागू हो रही है.

मुकेश अंबानी के सामने अब सवाल यह नहीं है कि जियो का मूल्य 13 लाख करोड़ रुपये है या नहीं. बाजार इसका जवाब दे चुका है.

सवाल यह है कि एक दशक तक जियो की तरक्की को वित्तपोषित करने वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को उसका मूल्य किसी और के पास जाता हुआ क्यों देखना पड़ा.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.)


जियो की शानदार लिस्टिंग: पहले दिन किसने खरीदे शेयर और किसने कमाए ₹3,300 करोड़?

एनएसई पर अकेले 24,276 करोड़ रुपये के शेयरों का कारोबार हुआ. एंकर निवेशकों के शेयर लॉक-इन में हैं. बाजार बंद होने तक बिकने योग्य हर तीन में से दो शेयरों के नए मालिक बन चुके थे. तो आखिर किसने पैसा कमाया और कौन इन शेयरों को अपने पास रखकर रह गया?

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
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पलक शाह

जियो के शेयरों का बड़ा हस्तांतरण

सुबह 10 बजे जियो एक लॉटरी टिकट जैसा था.

दोपहर 3:30 बजे तक यह भारतीय शेयर बाजारों में एक ही कारोबारी सत्र में अब तक की सबसे बड़ी नकदी निकासी बन चुका था.

कई अमीर निवेशकों ने 1,350 रुपये पर खरीदारी के ऑर्डर लगाए थे. उन्हें उम्मीद थी कि लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत में गिरावट आएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस शेयर पर नजर रखने वाले बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि किसी को पता नहीं चल पा रहा था कि यह मांग कहां से आ रही है. लेकिन इसका संदेश स्पष्ट था: जियो नीचे नहीं गिरेगा.

कारोबार बंद होने तक अकेले एनएसई पर 24,276 करोड़ रुपये के शेयरों का लेनदेन हो चुका था. यह रकम भारत की ज्यादातर कंपनियों के कुल बाजार मूल्य से भी अधिक है. और यह कारोबार ऐसे शेयर में हुआ, जो एक दिन पहले तक एक्सचेंज पर मौजूद ही नहीं था.

इश्यू प्राइस 1,119 रुपये था. बाजार खुलते ही शेयर 1,358 रुपये पर पहुंच गया. बाजार बंद होने पर इसकी कीमत 1,419 रुपये थी.

छह घंटे में 26.8 फीसदी की बढ़त.

लेकिन तेजी तो सिर्फ आतिशबाजी थी. असली खेल इसके पीछे चल रहा था: शेयरों का एक बड़ा हिस्सा एक समूह के हाथों से निकलकर दूसरे समूह के पास जा रहा था. इस दौरान एक सवाल लगातार बड़ा होता गया.

आखिर कौन अमीर बन गया और किसने इसकी कीमत चुकाई?

बाकी सभी निवेशक बाहर थे

बुधवार को क्या हुआ, यह समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन इसमें कारोबार नहीं कर सकता था.

मुकेश अंबानी की रिलायंस शेयर नहीं बेच सकती थी. मेटा शेयर नहीं बेच सकती थी. गूगल शेयर नहीं बेच सकता था. साल 2020 में जियो में निवेश करने वाले सॉवरेन फंड और प्राइवेट इक्विटी फर्म भी शेयर नहीं बेच सकते थे. आईपीओ खुलने से पहले 7.25 करोड़ शेयर खरीदने वाले एंकर निवेशक भी इन्हें नहीं बेच सकते थे.

वे सभी लॉक-इन में थे और बाकी लोगों की तरह स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थे.

इसका मतलब था कि बाजार खुलने के समय जियो के ऐसे शेयर केवल एक समूह के पास थे, जिन्हें बेचने पर कोई रोक नहीं थी: आईपीओ में शेयर पाने वाले लोग. इनमें खुदरा निवेशक, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs), गैर-एंकर संस्थागत निवेशक, रिलायंस के शेयरधारक और जियो के कर्मचारी शामिल थे.

इन सभी के पास कुल 19.75 करोड़ शेयर थे. यही जियो के वे सभी शेयर थे, जिनका बाजार में स्वतंत्र रूप से कारोबार किया जा सकता था.

फिर बाजार खुला.

बाजार में शेयरों की बाढ़

कारोबार बंद होने तक एनएसई पर 17.73 करोड़ और बीएसई पर 1.68 करोड़ शेयरों का कारोबार हुआ.

इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में कुल 19.4 करोड़ शेयरों का लेनदेन हुआ, जो बाजार में स्वतंत्र रूप से कारोबार के लिए उपलब्ध कुल शेयरों का 98 फीसदी था.

कारोबार की कुल मात्रा में किसी शेयर को हर बार गिना जाता है, जब वह एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है. इसलिए यह आंकड़ा खरीद-बिक्री की हलचल बताता है, न कि वास्तविक बिक्री की मात्रा. यह जानने के लिए कि कितने शेयर वास्तव में अपने मालिकों के पास से निकले, डिलीवरी के आंकड़ों पर नजर डालनी होगी.

एनएसई: 68.56 फीसदी डिलीवरी, यानी करीब 12.16 करोड़ शेयर.

बीएसई: 73.06 फीसदी डिलीवरी, यानी करीब 1.23 करोड़ शेयर.

इसका मतलब है कि 13.4 करोड़ शेयर दिन के अंत में ऐसे डीमैट खातों में थे, जो कारोबारी सत्र की शुरुआत में उनके मालिक नहीं थे. यह जियो के उन सभी शेयरों का करीब 68 फीसदी है, जिन्हें बेचा जा सकता था.

चूंकि बाजार खुलने के समय बिना लॉक-इन वाले शेयर केवल आईपीओ में शेयर पाने वालों के पास थे, इसलिए इस निष्कर्ष से बचना मुश्किल है कि भारत के सबसे बड़े आईपीओ का बड़ा हिस्सा लिस्टिंग के दिन ही बिक गया.

कमाई का दिन

अब बात पैसे की.

इश्यू प्राइस के हिसाब से इन 13.4 करोड़ शेयरों की कीमत करीब 15,000 करोड़ रुपये थी. एनएसई पर 1,369 रुपये के औसत कारोबार मूल्य के हिसाब से इनकी बिक्री से करीब 18,300 करोड़ रुपये मिले.

यानी एक ही दोपहर में करीब 3,300 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. इसमें टैक्स और ब्रोकरेज शामिल नहीं हैं.

खुदरा निवेशक के लिए इसका हिसाब मोबाइल स्क्रीन पर ही समझ आ जाता है. 23 अक्टूबर को 12 शेयरों के एक लॉट के लिए 13,428 रुपये चुकाएं. 28 अक्टूबर को कुछ घंटे इंतजार करें. फिर उसे 17,028 रुपये में बेच दें.

दिवाली से पहले 3,600 रुपये का मुनाफा. ज्यादातर निवेशकों ने यह देखने के लिए इंतजार नहीं किया कि क्या यह मुनाफा 4,000 रुपये तक पहुंच सकता है.

रहस्यमयी खरीदार

जो पैसा बाजार से बाहर गया, वह कहीं न कहीं से आया भी होगा.

किसी ने करीब 18,000 करोड़ रुपये नकद देकर ऐसे शेयर खरीदे, जो महज पांच दिन पहले 1,119 रुपये में उपलब्ध थे. खरीदारों ने बिकवाली के दबाव वाले बाजार में भी प्रति शेयर 250 रुपये अधिक देने में हिचक नहीं दिखाई.

और यह जानने के लिए किसी को आपको बताने की जरूरत नहीं है कि वे कौन हैं.

किसी बड़े सौदे का खुलासा तभी होता है, जब कोई ग्राहक कंपनी की इक्विटी का 0.5 फीसदी से अधिक कारोबार करता है. जियो के मामले में इसका मतलब 4.6 करोड़ से अधिक शेयर या एक ही नाम पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का सौदा है. कोई फंड जियो के हजारों करोड़ रुपये के शेयर छोटे-छोटे हिस्सों में खरीद सकता है और उसका नाम कभी खुलासे की सूची में नहीं आएगा.

जिस दिन करीब 18,000 करोड़ रुपये के जियो शेयर नए हाथों में गए, उस दिन विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे बाजार में मिलाकर केवल 1,515 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. इससे दो संभावनाएं बनती हैं और दोनों ही असाधारण हैं. या तो संस्थानों ने दूसरे शेयर बेचकर जियो खरीदा — इस दौरान रिलायंस का शेयर 3.46 फीसदी गिरकर 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया और एयरटेल में भी गिरावट आई — या फिर बड़ी मात्रा में खरीदारी संस्थागत निवेशकों के दायरे से बाहर के लोगों ने की. इनमें अमीर व्यक्ति, फैमिली ऑफिस, कंपनियां और अपने खाते से कारोबार करने वाले डेस्क शामिल हो सकते हैं.

रिलायंस का शेयर क्यों गिरा?

जियो उस दिन बाजार का सितारा था, जबकि उसकी मूल कंपनी रिलायंस को नुकसान उठाना पड़ा. जिस दिन उसकी सहायक कंपनी जश्न मना रही थी, उसी दिन रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 3.46 फीसदी गिरकर 1,158.50 रुपये पर आ गया और 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब बंद हुआ.

डीलिंग रूम में इसकी अलग-अलग व्याख्याएं थीं. बाजार में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, ट्रेजरी डेस्क, वेल्थ मैनेजर और फैमिली ऑफिस जियो में निवेश के लिए नकदी जुटाने के वास्ते रिलायंस के शेयर बेच रहे थे. यानी वे मूल कंपनी के बजाय उसकी सहायक कंपनी में सीधे निवेश कर रहे थे. उनका तर्क यह हो सकता है कि जब जियो में सीधे निवेश करने का विकल्प मौजूद है, तो रिफाइनिंग से लेकर रिटेल तक कारोबार करने वाले समूह के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से जियो का मालिकाना हक क्यों रखा जाए?

हालांकि, किसी ने इस बदलाव की पुष्टि नहीं की है. शेयर पर दबाव के दूसरे कारण भी थे, जिनमें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता शामिल थी.

लेकिन अगर बाजार में चल रही यह चर्चा सही है, तो लिस्टिंग के पहले ही दिन जियो के कुछ शेयरों की खरीद के लिए प्रभावी रूप से रिलायंस के अपने शेयरों का इस्तेमाल हुआ.

इसका जवाब उन आंकड़ों में छिपा है, जो कई हफ्तों तक सार्वजनिक नहीं होंगे. तब तक बाजार संकेतों से ही निष्कर्ष निकाल रहा है.

किसने जियो के पीछे दौड़ लगाई?

वे निवेशक जो आईपीओ में शेयर पाने से चूक गए: एंकर निवेशकों की सूची से बाहर के संस्थागत निवेशकों ने 329 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई थी. उन्हें केवल 4.9 करोड़ शेयर मिले. यह ऐसा था, जैसे 67 पिज्जा ऑर्डर करने पर सिर्फ एक पिज्जा मिले. बुधवार को वे जितने चाहें उतने शेयर खरीद सकते थे. बस उन्हें प्रति शेयर 250 रुपये अतिरिक्त चुकाने थे.

इंडेक्स में शामिल होने की उम्मीद रखने वाले निवेशक: 13 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ जियो अब भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी है. उसने भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक को पीछे छोड़ दिया है. देर-सवेर प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में इसे शामिल करना होगा और इंडेक्स फंड को किसी भी कीमत पर शेयर खरीदने पड़ेंगे. बुधवार को खरीदारी करने वालों के लिए यह भविष्य में एक संभावित खरीदार होगा.

वे फंड मैनेजर जिनके पास विकल्प नहीं है: अगर भारत का दूसरा सबसे बड़ा शेयर तेजी से बढ़ता है और आपके पोर्टफोलियो में उसका हिस्सा नहीं है, तो निवेशकों के सामने आपकी स्थिति कमजोर हो सकती है. अब जियो में कम निवेश रखना भी अपने आप में एक दांव बन गया है.

डे ट्रेडर्स: एनएसई पर कारोबार की करीब एक-तिहाई मात्रा में वास्तविक डिलीवरी नहीं हुई. इन सौदों में पैसा बाजार बंद होने से पहले खरीद-बिक्री करके और कीमतों के अंतर से कमाई करके निकल गया.

इन खरीदारों और विक्रेताओं के नाम अंततः सामने आएंगे. इसके लिए फंड के प्रवाह के आंकड़ों, फंड फैक्टशीट और जियो की पहली शेयरधारिता रिपोर्ट का इंतजार करना होगा. तब तक जियो में 18,000 करोड़ रुपये की खरीदारी के पीछे के चेहरे सामने नहीं हैं.

लंच तक विश्लेषकों के अनुमान से आगे निकला जियो

नोमुरा ने जियो पर कवरेज शुरू करते हुए 1,340 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया था. एलारा कैपिटल ने 1,367 रुपये का लक्ष्य रखा था.

जियो ने बाजार खुलते ही नोमुरा का लक्ष्य पार कर लिया और बाजार बंद होने तक एलारा के लक्ष्य से भी आगे निकल गया.

अब प्रकाशित अनुमानों में केवल नोमुरा का सबसे बेहतर संभावित परिदृश्य 1,690 रुपये का है, जो मौजूदा कीमत से ऊपर है.

1,119 रुपये के इश्यू प्राइस पर भी जियो का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2026 के EV/EBITDA के करीब 13.5 गुना था, जबकि एयरटेल के लिए यह लगभग 10 गुना था. बुधवार की 27 फीसदी तेजी ने इस अंतर को और बढ़ा दिया. 1,419 रुपये पर खरीदारी करने वाले निवेशक आज के जियो के लिए भुगतान नहीं कर रहे हैं. वे उन टैरिफ बढ़ोतरी की उम्मीद पर दांव लगा रहे हैं, जिनकी अभी घोषणा नहीं हुई है, और उस विकास पर भरोसा कर रहे हैं, जो अभी आया नहीं है.

जियो की कीमत अब रिलायंस के आधे से ज्यादा

रिलायंस के पास जियो की 64.5 फीसदी हिस्सेदारी है. बुधवार को बाजार बंद होने के समय इस हिस्सेदारी का मूल्य करीब 8.4 लाख करोड़ रुपये था.

लिस्टिंग से एक दिन पहले रिलायंस की पूरी कंपनी का मूल्य करीब 16.2 लाख करोड़ रुपये था.

इसका मतलब है कि टेलीकॉम कारोबार की यह सहायक कंपनी अब अपनी मूल कंपनी के आधे से अधिक मूल्य की हो चुकी है. रिलायंस के बाकी सभी कारोबार, जिनमें रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल स्टोर और नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ा निवेश शामिल है, का प्रभावी मूल्य जियो से कम आंका जा रहा है.

हालांकि, यह पैसा रिलायंस के खाते में नकद के रूप में नहीं आया है. आईपीओ नए शेयर जारी करके लाया गया था और इससे प्राप्त करीब 27,500 करोड़ रुपये जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल होंगे.

लेकिन गुरुवार सुबह तक मुंबई के हर रिलायंस विश्लेषक से एक ही सवाल पूछा जाएगा: होल्डिंग कंपनी पर लागू मूल्यांकन की छूट अब कहां जाएगी?

शेयरों का असली हस्तांतरण अभी बाकी है

बुधवार का दिन सिर्फ एक झलक था.

2020 में मेटा, गूगल और कई वैश्विक फंडों ने जियो में 5 लाख करोड़ रुपये से कम के इक्विटी मूल्यांकन पर निवेश किया था. आज बाजार में इसका मूल्य करीब 13 लाख करोड़ रुपये है. यानी यह 2.7 गुना बढ़ चुका है.

उन निवेशकों के शेयर अब भी लॉक-इन में हैं. लॉक-इन की अवधि खत्म होगी. इंडेक्स में शामिल होने से ऐसे खरीदार आएंगे, जिनके पास खरीदारी से इनकार करने का विकल्प नहीं होगा.

जब 2020 के निवेशक अपने शेयर बेचने का फैसला करेंगे, तो शेयरों का वह ढेर बुधवार को बेचे गए 13.4 करोड़ शेयरों को भी छोटा बना देगा.

28 अक्टूबर को भारत के नए शेयरधारकों ने बाजार को शेयर बेचे और 3,300 करोड़ रुपये लेकर चले गए.

अगली बार विक्रेता वैश्विक दिग्गज होंगे और खरीदार आपका इंडेक्स फंड होगा.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.


विश्व बैंक की चेतावनी: 2026 में 10% महंगे हो सकते हैं खाद्य पदार्थ, ऊर्जा संकट और अल नीनो बढ़ाएंगे दबाव

विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी ताजा 'कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि 2026 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुल मिलाकर 23 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
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मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, तेल और खाद की बढ़ती कीमतों तथा अल नीनो के खतरे से दुनिया भर में खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है. विश्व बैंक के ताजा अनुमान के मुताबिक, 2026 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. ऊर्जा की कीमतें भी इस साल 32 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है. इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ अनाज की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और गरीब देशों में खाद्य असुरक्षा का संकट गहरा सकता है.

विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी ताजा 'कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि 2026 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुल मिलाकर 23 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है. हालांकि, 2027 में इनमें 7 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में संघर्ष और तेल की आपूर्ति में रुकावटों के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है. वहीं, अनाज की आपूर्ति में बाधाएं और अल नीनो के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने का जोखिम खाद्य संकट को और गंभीर बना सकता है.

ऊर्जा की कीमतों में 32% बढ़ोतरी का अनुमान
विश्व बैंक के मुताबिक, 2026 में ऊर्जा की कीमतों में 32 फीसदी की वृद्धि हो सकती है. इससे पिछले तीन वर्षों में कीमतों में आई गिरावट पलटने का अनुमान है. ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत इस साल 91 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जबकि 2025 में यह 69 डॉलर प्रति बैरल थी. 2027 में ब्रेंट क्रूड के औसतन 79 डॉलर प्रति बैरल पर आने का अनुमान है.

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में 5.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है. वर्ष 2020 की वैश्विक मंदी को छोड़ दें, तो यह चार दशक से अधिक समय में सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है. तेल की खपत में भी 2.5 फीसदी की कमी आने का अनुमान है. उत्पादन खपत से कम रहने के कारण तेल के भंडार से लगातार निकासी करनी पड़ रही है.

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल का युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा और खाद की कीमतों में तेज उछाल आया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं ने भी तेल, गैस और खाद की आपूर्ति को प्रभावित किया है. विश्व बैंक के नए अनुमान अप्रैल में जारी अनुमानों से काफी अधिक हैं.

खाद्य पदार्थों की कीमतें दो साल में 18% बढ़ने की आशंका
विश्व बैंक का अनुमान है कि 2026 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 10 फीसदी और 2027 में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. इस तरह दो वर्षों में खाद्य कीमतें कुल मिलाकर लगभग 18 फीसदी बढ़ सकती हैं.

रिपोर्ट में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं. मध्य पूर्व में संघर्ष से अनाज की आपूर्ति बाधित हो रही है, जबकि अल नीनो के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है. इसके अलावा, ईंधन और खाद महंगी होने से खेती की लागत बढ़ रही है. यूरिया की कीमतों में साल की शुरुआत में तेज उछाल आया था, हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई. इसके बावजूद 2026 में खाद की कीमतों में 14 फीसदी वृद्धि का अनुमान है. 2027 तक इनके 2025 के स्तर पर लौटने की संभावना जताई गई है.

संघर्ष बढ़ा तो और महंगा हो सकता है तेल और अनाज
विश्व बैंक के मौजूदा अनुमान इस आधार पर तैयार किए गए हैं कि आपूर्ति को प्रभावित करने वाले संघर्ष और गंभीर नहीं होंगे. लेकिन मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने या रूस के तेल ढांचे को नुकसान जारी रहने पर ऊर्जा की कीमतें अनुमान से अधिक बढ़ सकती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, काला सागर के रास्ते अनाज की ढुलाई पर हमले और अत्यधिक तीव्र अल नीनो मिलकर वैश्विक खाद्य संकट पैदा कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी मौजूदा अनुमान से 12 फीसदी अधिक हो सकती हैं और 2022 के स्तर को पार कर सकती हैं. इससे गरीब देशों में खाद्य असुरक्षा और गरीबी बढ़ने का खतरा है.

धातुओं और सोने-चांदी की कीमतों में भी तेजी
विश्व बैंक ने 2026 में औद्योगिक धातुओं की कीमतों में 25 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है. एल्युमीनियम, तांबा और टिन की कीमतों में तेजी के पीछे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटरों से बढ़ती मांग के साथ आपूर्ति में रुकावटें भी जिम्मेदार हैं. 2027 में धातुओं की कीमतों में 3 फीसदी गिरावट का अनुमान है.

वहीं, भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में कीमती धातुओं की मांग बनी हुई है. विश्व बैंक के अनुसार, 2026 में इनकी कीमतों में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. 2027 में कुछ नरमी आने के बावजूद कीमतें 2015 से 2019 के औसत स्तर से तीन गुना से अधिक रह सकती हैं.

गरीब देशों की मदद के लिए 60 अरब डॉलर तक की राशि
विश्व बैंक समूह ने मौजूदा वित्तीय साधनों के जरिए 50 अरब से 60 अरब डॉलर तक की राशि उपलब्ध कराई है. इसमें 25 अरब डॉलर की पहले से तय वित्तीय सहायता भी शामिल है. इस राशि का इस्तेमाल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सरकारों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने और कंपनियों तथा कृषि क्षेत्र को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में किया जा सकता है.

मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से विश्व बैंक कमजोर देशों को 8.7 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता दे चुका है. विश्व बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट और प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप के निदेशक आयहान कोसे ने कहा कि सबसे गरीब लोगों की सुरक्षा करना और भारी कर्ज से जूझ रहे कम आय वाले देशों की मदद करना प्राथमिकता होनी चाहिए.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्थिक और बाजार संबंधी तनाव के दौरान अलग-अलग कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच संबंध मजबूत हो जाते हैं. मौजूदा संघर्ष के दौरान भी ऐसा देखने को मिला है. औद्योगिक धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अन्य कमोडिटी पर सबसे अधिक पड़ता है, जबकि संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमतों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गई है.
 


हुंडई मोटर इंडिया का मुनाफा 24% घटा, खर्च बढ़ने से दूसरी तिमाही में लगा झटका

हुंडई मोटर इंडिया ने बुधवार को दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 18.5 फीसदी बढ़कर 20,696.06 करोड़ रुपये हो गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
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हुंडई मोटर इंडिया के मुनाफे में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में करीब 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा घटकर 1,196.16 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 1,572.26 करोड़ रुपये था. कंपनी की परिचालन आय में बढ़ोतरी के बावजूद खर्च बढ़ने से मुनाफे पर दबाव पड़ा.

आय बढ़ी, लेकिन खर्च में भी इजाफा

हुंडई मोटर इंडिया ने बुधवार को दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 18.5 फीसदी बढ़कर 20,696.06 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल की समान तिमाही में यह 17,460.82 करोड़ रुपये थी.

कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 20,920.02 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 17,692.03 करोड़ रुपये थी. हालांकि, इस दौरान कंपनी के कुल खर्च में करीब 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तिमाही में कुल खर्च बढ़कर 19,302.18 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 15,566.07 करोड़ रुपये था.

टैक्स से पहले मुनाफा भी 24% घटा

खर्च में बढ़ोतरी का असर कंपनी के टैक्स से पहले के मुनाफे (PBT) पर भी पड़ा. दूसरी तिमाही में यह 23.9 फीसदी गिरकर 1,617.83 करोड़ रुपये रह गया. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का PBT 2,125.96 करोड़ रुपये था.

पहली छमाही में मुनाफे में 29% की गिरावट

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान भी कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई. इस अवधि में हुंडई मोटर इंडिया की परिचालन आय 9.3 फीसदी बढ़कर 37,030.69 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 33,873.70 करोड़ रुपये थी.

हालांकि, पहली छमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 29.1 फीसदी घटकर 2,084.79 करोड़ रुपये रह गया. पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में कंपनी ने 2,941.49 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था. इस तरह, हुंडई मोटर इंडिया की आय में बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ते खर्च ने कंपनी की लाभप्रदता पर दबाव डाला है.
 


बाजार में सुस्त शुरुआत के संकेत, क्रूड 114 डॉलर के पार; जियो, आज इन शेयरों पर नजर

बुधवार को सेंसेक्स 352.64 अंक गिरकर 73,246.03 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 में 50.90 अंकों की गिरावट आई और यह 22,698.85 पर बंद हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. बुधवार को सेंसेक्स 352.64 अंक गिरकर 73,246.03 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 में 50.90 अंकों की गिरावट आई और यह 22,698.85 पर बंद हुआ. वहीं, आज गिफ्ट निफ्टी करीब 22,730 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिससे बाजार के सपाट से कमजोर खुलने की आशंका है. कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तरों से नरमी आई है, लेकिन ब्रेंट क्रूड अब भी 114 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.75-4 फीसदी के दायरे में स्थिर रखा है.

वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के बीच निवेशकों की नजर आज जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, वेदांता, टीवीएस मोटर और JSW एनर्जी समेत कई शेयरों पर रहेगी. इसके अलावा कई बड़ी कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिनसे बाजार को आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं.

अमेरिकी फेड के फैसले से बाजार को मिले मिले-जुले संकेत

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. हालांकि, दो सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया, जिससे दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है. इस घटनाक्रम के बीच पिछले सत्र में अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली, जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर करीब 5.02 फीसदी पर पहुंच गई.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय अमेरिकी बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे सकते हैं. इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है. वहीं, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों, आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. निवेशकों की नजर अब फेडरल रिजर्व के अगले कदमों को लेकर मिलने वाले संकेतों पर रहेगी.

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनीं चिंता

कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम चिंता बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि WTI क्रूड का भाव करीब 102 डॉलर प्रति बैरल है. तेल की कीमतें ऊंची रहने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव में कमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

एशियाई बाजारों में तेजी

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले. जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.5 फीसदी से अधिक चढ़े. हालांकि, एशियाई बाजारों की तेजी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय बाजार में बड़ी तेजी की राह में बाधा बन सकते हैं.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, गुरुवार को जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, वेदांता, टीवीएस मोटर, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स और JSW एनर्जी के शेयरों में हलचल रह सकती है. जियो प्लेटफॉर्म्स की मजबूत लिस्टिंग के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. बजाज ऑटो की सितंबर तिमाही में आय 34 फीसदी और समायोजित मुनाफा 35 फीसदी बढ़ा है, जबकि हीरो मोटोकॉर्प का मुनाफा 4.6 फीसदी बढ़कर 1,456 करोड़ रुपये रहा. वेदांता का मुनाफा 78 फीसदी बढ़कर 6,202 करोड़ रुपये और टीवीएस मोटर का कंसोलिडेटेड मुनाफा 52 फीसदी बढ़कर 1,377 करोड़ रुपये पहुंच गया. टीटागढ़ रेल सिस्टम्स को रेल मंत्रालय से 1,717 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऑर्डर मिला है, जबकि JSW एनर्जी का मुनाफा 50 फीसदी बढ़कर 1,056 करोड़ रुपये रहा.

इसके अलावा बंधन बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और फोर्टिस हेल्थकेयर से जुड़ी खबरें भी शेयरों को प्रभावित कर सकती हैं. बंधन बैंक का सितंबर तिमाही का मुनाफा बढ़कर 622 करोड़ रुपये रहा. वहीं, अमेरिकी दवा नियामक USFDA ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की जांच को औपचारिक रूप से बंद कर दिया है. फोर्टिस हेल्थकेयर ने बेंगलुरु के सुगुना हॉस्पिटल का करीब 277 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया है.

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

गुरुवार को एशियन पेंट्स, कोल इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन, अंबुजा सीमेंट्स, ट्रेंट, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, सुजलॉन एनर्जी और लॉरस लैब्स समेत कई कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों की बिक्री, मुनाफे, मार्जिन और प्रबंधन के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी. इन नतीजों से संबंधित शेयरों में कारोबार के दौरान हलचल देखने को मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


2026 में MSME के लिए त्योहारों के दौरान वित्तपोषण 33% बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये पहुंचा: रिपोर्ट

त्योहारी अवधि के दौरान ई-कॉमर्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी और पेंट्स सहित कई क्षेत्रों में नकदी की जरूरत बढ़ी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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एम1एक्सचेंज (M1xchange) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 में त्योहारों से पहले वित्तपोषण का आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है. इस दौरान सूक्ष्म उद्यम औपचारिक इनवॉइस डिस्काउंटिंग का इस्तेमाल करने वाले सबसे तेजी से बढ़ते वर्ग के रूप में उभरे हैं. कंपनी ने अपनी नवीनतम फेस्टिव इनसाइट्स रिपोर्ट में कहा कि त्योहारों से पहले वित्तपोषण की मात्रा 2025 के 15,000 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़ी है. इसकी वजह प्रमुख त्योहारी खरीदारी अवधि से पहले छोटे कारोबारों की औपचारिक कार्यशील पूंजी तक बढ़ती पहुंच है.

रिपोर्ट के अनुसार, सूक्ष्म एमएसएमई के लिए वित्तपोषण 2025 की त्योहारी अवधि के दौरान सालाना आधार पर 100 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये हो गया. यह रुझान छोटे कारोबारों के बीच औपचारिक इनवॉइस डिस्काउंटिंग को तेजी से अपनाने का संकेत देता है, जो पारंपरिक रूप से कर्ज के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों के दौरान औसत दैनिक वित्तपोषण में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. एम1एक्सचेंज को उम्मीद है कि 2026 में त्योहारी सीजन के दौरान कुल वित्तपोषण में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होगी, क्योंकि कारोबार अधिक मांग की तैयारी कर रहे हैं और अपने भंडार को फिर से भर रहे हैं.

28 अक्टूबर तक, मौजूदा त्योहारी अवधि के दौरान वित्तपोषण का आंकड़ा पहले ही लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. यह पिछले वर्ष की पूरी त्योहारी अवधि में दर्ज कुल मात्रा से अधिक है, जबकि इस दौरान सबसे अधिक गतिविधि वाला समय अभी जारी है.

यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब एमएसएमई को मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरत का सामना करना पड़ता है. आपूर्तिकर्ताओं को अक्सर बड़े खरीदारों से भुगतान मिलने से पहले ही सामान का निर्माण और उसकी आपूर्ति करनी पड़ती है. इनवॉइस डिस्काउंटिंग कारोबारों को भुगतान चक्र पूरा होने का इंतजार करने के बजाय स्वीकृत व्यापारिक बकाया राशि के आधार पर धन जुटाने की सुविधा देती है.

एम1एक्सचेंज के संस्थापक और प्रमोटर संदीप मोहिंद्रू ने कहा कि सूक्ष्म एमएसएमई के वित्तपोषण में वृद्धि से पता चलता है कि छोटे उद्यम मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से औपचारिक ऋण का इस्तेमाल कर रहे हैं. मोहिंद्रू ने कहा, “सूक्ष्म और छोटे उद्यम अब देरी से होने वाले भुगतानों को अपनी मौसमी वृद्धि में बाधा नहीं बनने दे रहे हैं.” उन्होंने कहा कि टीआरईडीएस (TReDS) कारोबारों को अवैतनिक इनवॉइस को कार्यशील पूंजी में बदलने की सुविधा दे रहा है.

कंज्यूमर गुड्स में बढ़त

रिपोर्ट में 2023 से 2025 के दौरान त्योहारी अवधियों में विभिन्न क्षेत्रों की इनवॉइसिंग गतिविधियों में अंतर को भी रेखांकित किया गया है. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में संबंधित त्योहार-पूर्व अवधि की तुलना में त्योहारी अवधि के दौरान इनवॉइसिंग में औसतन 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

केमिकल्स क्षेत्र में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एफएमसीजी में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, मेटल्स और माइनिंग क्षेत्र में इनवॉइसिंग 19 प्रतिशत बढ़ी. ये रुझान त्योहारी मांग के दौरान भंडार की भरपाई और कार्यशील पूंजी की बढ़ती जरूरतों को दर्शाते हैं.

उभरते क्षेत्रों में भी गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्ज की गई. ई-रिटेल और ई-कॉमर्स में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि पेंट्स क्षेत्र में भी त्योहारी अवधि के दौरान गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि पेंट्स क्षेत्र में यह वृद्धि अपेक्षाकृत छोटे आधार से हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तपोषण के ये रुझान त्योहारी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल कारोबारों की ऋण संबंधी जरूरतों में बदलाव का संकेत देते हैं. खासकर छोटे उद्यम नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने के लिए तेजी से औपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

एम1एक्सचेंज एक ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है. यह बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के माध्यम से कॉरपोरेट खरीदारों से एमएसएमई के बकाये के वित्तपोषण की सुविधा देता है. कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर 81 से अधिक बैंक, 16,000 कॉरपोरेट और 1.25 लाख एमएसएमई पंजीकृत हैं.

प्लेटफॉर्म ने कहा कि उसने 3.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की इनवॉइस डिस्काउंटिंग की सुविधा दी है. टीआरईडीएस व्यवस्था के तहत, एमएसएमई एक इनवॉइस जारी करता है, खरीदार उसे सत्यापित करता है और वित्तपोषक स्वीकृत बकाया राशि के आधार पर बोली लगाते हैं. इसके बाद चयनित वित्तपोषक आपूर्तिकर्ता को भुगतान करता है.


जियो के सफर से AI के भविष्य तक, अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी ने बताया अपना विजन

जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग के मौके पर अंबानी परिवार ने रिलायंस की यात्रा, धीरूभाई अंबानी के सपने और मुकेश अंबानी के विजन को याद किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा. जियो प्लेटफॉर्म्स की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में लिस्टिंग के साथ कंपनी ने शेयर बाजार में एक नया अध्याय शुरू किया. इस मौके पर आयोजित समारोह में कारोबारी उपलब्धियों के साथ अंबानी परिवार की विरासत और संघर्ष की कहानी भी सामने आई. जब अनंत, ईशा और आकाश अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के सपनों और पिता मुकेश अंबानी के योगदान को याद किया, तो मुकेश अंबानी भावुक हो गए.

अनंत अंबानी बोले- जियो देश को दिया गया प्रसाद

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय श्री कृष्ण’ से की. उन्होंने कहा कि स्टॉक एक्सचेंज की घंटी उनके लिए मंदिर की घंटी जैसी है. उनके लिए कारोबार एक पूजा है और हर पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है. उन्होंने जियो को देश के साथ साझा किए जाने वाले प्रसाद के रूप में पेश किया.

अनंत ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि चोरवाड़ के एक साधारण घर से शुरू हुआ सपना आज इतने बड़े कारोबारी साम्राज्य में बदल गया है. यमन के अदन में पेट्रोल पंप पर काम करने वाले धीरूभाई ने दिखाया कि एक आम भारतीय भी बड़े सपने देख सकता है. इसके बाद मुकेश अंबानी ने जामनगर की बंजर जमीन पर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी खड़ी की.

उन्होंने कहा कि जियो का बीज ईशा ने बोया था, जिसे आकाश ने अपना सपना बना लिया. अनंत ने कोरोना महामारी के दौरान जियो की भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जब दुनिया थम गई थी, तब डिजिटल कनेक्टिविटी के कारण बच्चों की पढ़ाई जारी रही और दूर रह रहे परिवार वीडियो कॉल के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहे.

अनंत ने जियो के 53 करोड़ ग्राहकों, नेटवर्क स्थापित करने के लिए बारिश और धूप में काम करने वाले तकनीशियनों और डिजिटल इंडिया के विजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि तीनों भाई-बहन भले ही अलग-अलग शरीर हैं, लेकिन उनकी आत्मा एक है.

ईशा अंबानी ने याद किया रिलायंस का पहला आईपीओ

अनंत के बाद ईशा अंबानी ने रिलायंस के शुरुआती दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही परिवार के साथ डिनर के दौरान मुकेश अंबानी 1977 के पहले आईपीओ की चर्चा कर रहे थे. उस समय वह महज 20 साल के थे और रिलायंस के आईपीओ पर काम कर रहे थे.

ईशा के मुताबिक, धीरूभाई अंबानी चाहते थे कि रिलायंस पर केवल कुछ अमीर लोगों का अधिकार न हो, बल्कि देश का आम नागरिक भी कंपनी में हिस्सेदारी रख सके. उन्होंने कहा कि करीब 50 साल बाद जियो की लिस्टिंग के साथ आम लोगों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बनाने की उसी सोच को आगे बढ़ाया गया है.

ईशा ने बताया कि जियो ने महज 10 साल में करीब 15.5 अरब डॉलर का राजस्व और 8 अरब डॉलर का वास्तविक मुनाफा हासिल किया है. उन्होंने इस उपलब्धि के पीछे आकाश अंबानी की मेहनत का भी जिक्र किया. ईशा ने कहा कि पिछले 13 वर्षों के सफर में आकाश शायद ही किसी रात 12 बजे से पहले घर लौटे हों.

उन्होंने दादी कोकिलाबेन, मां नीता अंबानी, मनोज अंकल और परिवार के अन्य सदस्यों का आभार जताया. पिता को संबोधित करते हुए ईशा ने कहा कि उन्होंने हमेशा वह भविष्य देखा, जिसे दूसरे लोग देख नहीं पाए. उन्होंने अपनी उपलब्धियों का श्रेय मुकेश अंबानी के विजन को दिया.

95 मिनट में पूरा सब्सक्रिप्शन, आकाश ने बताया जियो का सफर

जियो के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने निवेशकों का आभार जताते हुए आईपीओ को मिली प्रतिक्रिया का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कंपनी का आईपीओ महज 95 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. उनके मुताबिक, इसके लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मांग आई और 1.3 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने जियो पर भरोसा जताया.

आकाश ने बताया कि विदेश से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पिता के साथ मिलकर भारत को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से लौटे थे. उन्होंने केरल के पहाड़ी इलाके में रहने वाली अंजलि नाम की लड़की का उदाहरण दिया, जिसे स्कूल के पाठ मोबाइल में डाउनलोड करने के लिए रोजाना दो किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ी पर जाना पड़ता था. इलाके में नेटवर्क की समस्या के कारण उसे यह परेशानी उठानी पड़ती थी. जियो की कनेक्टिविटी मिलने के बाद उसकी पढ़ाई आसान हो गई.

आकाश ने 20 फरवरी 2017 की एक घटना भी साझा की, जब जियो ने 10 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार किया था. उन्होंने बताया कि मुकेश अंबानी ने उनसे मजाक में शर्त रखी थी कि जब तक जियो के 10 करोड़ ग्राहक नहीं हो जाते, तब तक उनकी शादी नहीं हो सकती. आकाश के मुताबिक, उस रात उनके पास जश्न मनाने की दो वजहें थीं.

अगले 10 साल में एआई, क्लाउड और स्पेस कनेक्टिविटी पर फोकस

आकाश अंबानी ने जियो के भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कहा कि जब वह कंपनी से जुड़े थे, तब उसके पास न ग्राहक थे और न ही राजस्व. आज जियो के स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म से 54 करोड़ से अधिक ग्राहक जुड़े हैं.

उन्होंने कहा कि जियो के शुरुआती 10 वर्षों में डेटा को आम लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया. अब अगले 10 वर्षों में कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और स्पेस कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगी.

आकाश ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के ‘रोटी, कपड़ा, मकान और मोबाइल’ के सपने को याद करते हुए कहा कि जियो का लक्ष्य तकनीक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में जियो प्लेटफॉर्म्स का नाम शामिल होगा.

अपने संबोधन के अंत में आकाश ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), एनएसई, बीएसई और निवेशकों का आभार जताया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कंपनी अपने प्रदर्शन और कामकाज के जरिए निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने की कोशिश जारी रखेगी.


HUL Q2 Results: मुनाफा 4% बढ़कर ₹2,790 करोड़, बिक्री में 15% की ग्रोथ; ₹19 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में ₹2,790 करोड़ का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 3.9% अधिक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान यूनिलीवर ने बुधवार को सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए. जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹2,790 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹2,685 करोड़ था.

कंपनी के मुताबिक, पिछले साल की समान तिमाही में बंद किए गए कारोबार से जुड़े ₹97 करोड़ के नुकसान का भी तुलनात्मक आंकड़ों पर असर पड़ा. वहीं, नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी सहित जारी कारोबार से मुनाफा लगभग स्थिर रहा. असाधारण मदों से पहले कर के बाद मुनाफा 9.5% बढ़कर ₹2,795 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल ₹2,553 करोड़ था.

बिक्री में 14.8% की बढ़ोतरी

सितंबर तिमाही में HUL का कारोबार सालाना आधार पर 14.8% बढ़कर ₹18,071 करोड़ हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह ₹15,742 करोड़ था. अन्य परिचालन आय सहित कंपनी का कुल परिचालन राजस्व 14.5% बढ़कर ₹18,226 करोड़ रहा.

कंपनी की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि (Underlying Sales Growth) 15% रही, जो पिछले 14 तिमाहियों में सबसे अधिक है. इस दौरान बिक्री की मात्रा में अंतर्निहित वृद्धि (Underlying Volume Growth) 7% दर्ज की गई.

HUL का ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 8% बढ़कर ₹4,089 करोड़ हो गया. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,785 करोड़ था. हालांकि, EBITDA मार्जिन 1.4 प्रतिशत अंक घटकर 22.6% रह गया, जबकि एक साल पहले यह 24% था.

इस दौरान कंपनी का कुल कंसॉलिडेटेड खर्च 15.9% बढ़कर ₹14,574 करोड़ हो गया.

होम केयर कारोबार की बिक्री में 22% की वृद्धि

HUL के होम केयर कारोबार ने सितंबर तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का राजस्व 21.4% बढ़कर ₹6,878 करोड़ रहा. अंतर्निहित बिक्री में 22% की वृद्धि हुई, जबकि बिक्री की मात्रा में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, इस कारोबार का मुनाफा 2.6% बढ़कर ₹1,111 करोड़ रहा.

ब्यूटी और वेलबीइंग कारोबार का मुनाफा 16.4% बढ़ा

ब्यूटी और वेलबीइंग सेगमेंट का राजस्व 15.7% बढ़कर ₹4,319 करोड़ पहुंच गया. इस कारोबार का मुनाफा 16.4% बढ़कर ₹1,235 करोड़ रहा. कंपनी की अंतर्निहित बिक्री में 16% की वृद्धि हुई और बिक्री की मात्रा में भी दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

पर्सनल केयर सेगमेंट के मुनाफे में गिरावट

पर्सनल केयर कारोबार का राजस्व 7.9% बढ़कर ₹2,617 करोड़ रहा, लेकिन इस सेगमेंट का मुनाफा 8.7% घटकर ₹449 करोड़ रह गया. इस कारोबार की अंतर्निहित बिक्री में 9% की वृद्धि हुई, जबकि बिक्री की मात्रा लगभग स्थिर रही.

फूड कारोबार का मुनाफा 15.7% बढ़ा

कंपनी के फूड कारोबार का राजस्व सितंबर तिमाही में 8.5% बढ़कर ₹3,849 करोड़ हो गया. इस सेगमेंट का मुनाफा 15.7% बढ़कर ₹834 करोड़ रहा. अंतर्निहित बिक्री में 9% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बिक्री की मात्रा में एकल अंक के निचले स्तर की वृद्धि हुई.

शेयरधारकों को मिलेगा ₹19 प्रति शेयर का डिविडेंड

HUL के निदेशक मंडल ने ₹1 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹19 के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए 12 नवंबर, 2026 को रिकॉर्ड तारीख तय की गई है. पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 25 नवंबर, 2026 को किया जाएगा.

पूरे वित्त वर्ष के लिए मार्जिन अनुमान बरकरार

कंपनी के मुताबिक, बाजार में उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है. HUL को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उसका प्रदर्शन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले बेहतर रहेगा. कंपनी अपने उत्पाद पोर्टफोलियो और बिक्री के विभिन्न माध्यमों को मजबूत करने पर काम कर रही है.

हालांकि, कंपनी ने निकट भविष्य में कच्चे माल की कीमतों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है. इसके बावजूद HUL ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपना कंसॉलिडेटेड EBITDA मार्जिन अनुमान 22% से 24% के दायरे में बरकरार रखा है.
 


21% प्रीमियम पर लिस्ट हुए Jio के शेयर, मार्केट कैप ₹2.36 लाख करोड़ उछला; एयरटेल पीछे छूटी

बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस से 21% से अधिक प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए. इसके बाद कारोबार के दौरान शेयर में तेजी जारी रही और कीमत करीब 23% के प्रीमियम के साथ ₹1,375 तक पहुंच गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio) ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की है. कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस से 21% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हुए और कारोबार के दौरान करीब 23% की तेजी के साथ ₹1,375 तक पहुंच गए. इस उछाल से कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर ₹12.66 लाख करोड़ के पार पहुंच गया और वह बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई.

इस तेजी के साथ कंपनी के बाजार पूंजीकरण में इश्यू प्राइस के आधार पर तय मूल्यांकन की तुलना में करीब ₹2.36 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई. जियो का मार्केट कैप बढ़कर ₹12,66,615 करोड़ के आसपास पहुंच गया. लिस्टिंग से पहले इश्यू प्राइस के आधार पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹10,30,491 करोड़ था.

मार्केट कैप में एयरटेल से आगे निकली जियो

जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के बाद कंपनी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई. इसने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया. जियो की तेजी के बीच एयरटेल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 10:25 बजे भारती एयरटेल का शेयर 2.09% गिरकर ₹1,936.65 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान शेयर ₹1,926.45 के निचले स्तर तक भी पहुंचा. इसके चलते कंपनी का मार्केट कैप मंगलवार के करीब ₹12.34 लाख करोड़ से घटकर कारोबार के दौरान लगभग ₹12.02 लाख करोड़ रह गया. इस तरह एयरटेल के बाजार पूंजीकरण में करीब ₹32,325 करोड़ की कमी आई.

जियो की लिस्टिंग ने टेलीकॉम सेक्टर में कंपनियों के बाजार मूल्यांकन की तस्वीर भी बदल दी है. हालांकि, शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ दोनों कंपनियों का बाजार पूंजीकरण भी बदल सकता है.

बाजार में गिरावट के बीच जियो की मजबूत शुरुआत

जियो की शानदार लिस्टिंग ऐसे समय हुई, जब घरेलू शेयर बाजार दबाव में था. बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे सेंसेक्स 955.27 अंक गिरकर 72,642.44 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान यह करीब 995 अंक टूटकर 72,603.57 के स्तर तक पहुंच गया.

इसी तरह निफ्टी 50 भी 249.95 अंक गिरकर 22,498.45 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान सूचकांक 22,497.70 के स्तर तक फिसल गया. इस तरह व्यापक बाजार में गिरावट के बावजूद जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों ने मजबूत शुरुआत की. हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन बाजार की चाल, निवेशकों की मांग और कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन से प्रभावित हो सकता है.
 


मोबाइल PLI स्कीम से 12 लाख को रोजगार, ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव पर अश्विनी वैष्णव का जवाब

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया, जबकि सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स और ₹3 लाख करोड़ का GST मिला.

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Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार सरकार की मेक इन इंडिया पहल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है. अब दुनिया के हर चार में से एक आईफोन का निर्माण भारत में हो रहा है. हालांकि, भारत के इस मॉडल की आर्थिक उपयोगिता को लेकर सवाल भी उठे हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता का जिक्र करते हुए भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की तुलना चीन से की गई थी. इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत मिले टैक्स और रोजगार के आंकड़े सामने रखे हैं.

रिपोर्ट में क्या उठाए गए सवाल?

एक मीडिया रिपोर्ट में भारत में आईफोन निर्माण की बढ़ती हिस्सेदारी का जिक्र किया गया. इसके साथ ही सवाल उठाया गया कि महंगे आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता के बीच इस मॉडल से भारत को कितना आर्थिक लाभ मिल रहा है.

रिपोर्ट में यह तर्क भी सामने आया कि चीन के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को अपनाना भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा. इसी बहस के बीच अश्विनी वैष्णव ने सरकारी प्रोत्साहन के बदले मिले राजस्व और पैदा हुए रोजगार का हिसाब साझा किया.

₹19,000 करोड़ की सब्सिडी, ₹3 लाख करोड़ का GST

अश्विनी वैष्णव के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत सरकार अब तक कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दे चुकी है. इसके मुकाबले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स मिला है. इसके अलावा, इस सेक्टर से ₹3 लाख करोड़ का GST राजस्व प्राप्त हुआ है.

इन आंकड़ों के जरिए मंत्री ने यह रेखांकित किया कि सरकारी प्रोत्साहन के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से टैक्स के रूप में भी बड़ा राजस्व हासिल हुआ है. हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में पूरी योजना की लागत और लाभ का आकलन नहीं हैं, लेकिन सरकार की ओर से इन्हें स्कीम के आर्थिक योगदान के तौर पर पेश किया गया है.

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की उपलब्धियों में रोजगार को भी अहम बताया गया है. अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कुल 25 लाख लोगों को रोजगार दिया है. इनमें से 12 लाख लोगों को अकेले मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों में काम मिला है.

इस तरह मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रोजगार सृजन का एक बड़ा हिस्सा बनकर उभरी है. सरकार की ओर से साझा किए गए ये आंकड़े इस क्षेत्र के विस्तार और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों को रेखांकित करते हैं.

भारत में बढ़ रहा आईफोन निर्माण

भारत में आईफोन का बढ़ता उत्पादन देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विस्तार को दिखाता है. हालांकि, इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता का आकलन करने के लिए घरेलू स्तर पर पुर्जों के निर्माण, आयात पर निर्भरता, स्थानीय कंपनियों की भागीदारी और उत्पादन से मिलने वाले आर्थिक लाभ जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी होगा.

फिलहाल, सामने आए आंकड़ों के जरिए सरकार ने मोबाइल PLI स्कीम के पक्ष में अपना आर्थिक तर्क रखा है. इस बहस का केंद्र यही है कि सरकारी प्रोत्साहन से बढ़े उत्पादन का लाभ टैक्स राजस्व, रोजगार और देश में विकसित हो रही मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के रूप में किस हद तक मिल रहा है.