2026 में MSME के लिए त्योहारों के दौरान वित्तपोषण 33% बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये पहुंचा: रिपोर्ट

त्योहारी अवधि के दौरान ई-कॉमर्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी और पेंट्स सहित कई क्षेत्रों में नकदी की जरूरत बढ़ी

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Wednesday, 28 October, 2026
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एम1एक्सचेंज (M1xchange) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 में त्योहारों से पहले वित्तपोषण का आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है. इस दौरान सूक्ष्म उद्यम औपचारिक इनवॉइस डिस्काउंटिंग का इस्तेमाल करने वाले सबसे तेजी से बढ़ते वर्ग के रूप में उभरे हैं. कंपनी ने अपनी नवीनतम फेस्टिव इनसाइट्स रिपोर्ट में कहा कि त्योहारों से पहले वित्तपोषण की मात्रा 2025 के 15,000 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़ी है. इसकी वजह प्रमुख त्योहारी खरीदारी अवधि से पहले छोटे कारोबारों की औपचारिक कार्यशील पूंजी तक बढ़ती पहुंच है.

रिपोर्ट के अनुसार, सूक्ष्म एमएसएमई के लिए वित्तपोषण 2025 की त्योहारी अवधि के दौरान सालाना आधार पर 100 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये हो गया. यह रुझान छोटे कारोबारों के बीच औपचारिक इनवॉइस डिस्काउंटिंग को तेजी से अपनाने का संकेत देता है, जो पारंपरिक रूप से कर्ज के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों के दौरान औसत दैनिक वित्तपोषण में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. एम1एक्सचेंज को उम्मीद है कि 2026 में त्योहारी सीजन के दौरान कुल वित्तपोषण में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होगी, क्योंकि कारोबार अधिक मांग की तैयारी कर रहे हैं और अपने भंडार को फिर से भर रहे हैं.

28 अक्टूबर तक, मौजूदा त्योहारी अवधि के दौरान वित्तपोषण का आंकड़ा पहले ही लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. यह पिछले वर्ष की पूरी त्योहारी अवधि में दर्ज कुल मात्रा से अधिक है, जबकि इस दौरान सबसे अधिक गतिविधि वाला समय अभी जारी है.

यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब एमएसएमई को मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरत का सामना करना पड़ता है. आपूर्तिकर्ताओं को अक्सर बड़े खरीदारों से भुगतान मिलने से पहले ही सामान का निर्माण और उसकी आपूर्ति करनी पड़ती है. इनवॉइस डिस्काउंटिंग कारोबारों को भुगतान चक्र पूरा होने का इंतजार करने के बजाय स्वीकृत व्यापारिक बकाया राशि के आधार पर धन जुटाने की सुविधा देती है.

एम1एक्सचेंज के संस्थापक और प्रमोटर संदीप मोहिंद्रू ने कहा कि सूक्ष्म एमएसएमई के वित्तपोषण में वृद्धि से पता चलता है कि छोटे उद्यम मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से औपचारिक ऋण का इस्तेमाल कर रहे हैं. मोहिंद्रू ने कहा, “सूक्ष्म और छोटे उद्यम अब देरी से होने वाले भुगतानों को अपनी मौसमी वृद्धि में बाधा नहीं बनने दे रहे हैं.” उन्होंने कहा कि टीआरईडीएस (TReDS) कारोबारों को अवैतनिक इनवॉइस को कार्यशील पूंजी में बदलने की सुविधा दे रहा है.

कंज्यूमर गुड्स में बढ़त

रिपोर्ट में 2023 से 2025 के दौरान त्योहारी अवधियों में विभिन्न क्षेत्रों की इनवॉइसिंग गतिविधियों में अंतर को भी रेखांकित किया गया है. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में संबंधित त्योहार-पूर्व अवधि की तुलना में त्योहारी अवधि के दौरान इनवॉइसिंग में औसतन 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

केमिकल्स क्षेत्र में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एफएमसीजी में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, मेटल्स और माइनिंग क्षेत्र में इनवॉइसिंग 19 प्रतिशत बढ़ी. ये रुझान त्योहारी मांग के दौरान भंडार की भरपाई और कार्यशील पूंजी की बढ़ती जरूरतों को दर्शाते हैं.

उभरते क्षेत्रों में भी गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्ज की गई. ई-रिटेल और ई-कॉमर्स में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि पेंट्स क्षेत्र में भी त्योहारी अवधि के दौरान गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि पेंट्स क्षेत्र में यह वृद्धि अपेक्षाकृत छोटे आधार से हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तपोषण के ये रुझान त्योहारी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल कारोबारों की ऋण संबंधी जरूरतों में बदलाव का संकेत देते हैं. खासकर छोटे उद्यम नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने के लिए तेजी से औपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

एम1एक्सचेंज एक ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है. यह बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के माध्यम से कॉरपोरेट खरीदारों से एमएसएमई के बकाये के वित्तपोषण की सुविधा देता है. कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर 81 से अधिक बैंक, 16,000 कॉरपोरेट और 1.25 लाख एमएसएमई पंजीकृत हैं.

प्लेटफॉर्म ने कहा कि उसने 3.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की इनवॉइस डिस्काउंटिंग की सुविधा दी है. टीआरईडीएस व्यवस्था के तहत, एमएसएमई एक इनवॉइस जारी करता है, खरीदार उसे सत्यापित करता है और वित्तपोषक स्वीकृत बकाया राशि के आधार पर बोली लगाते हैं. इसके बाद चयनित वित्तपोषक आपूर्तिकर्ता को भुगतान करता है.


जियो के सफर से AI के भविष्य तक, अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी ने बताया अपना विजन

जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग के मौके पर अंबानी परिवार ने रिलायंस की यात्रा, धीरूभाई अंबानी के सपने और मुकेश अंबानी के विजन को याद किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
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Wednesday, 28 October, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा. जियो प्लेटफॉर्म्स की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में लिस्टिंग के साथ कंपनी ने शेयर बाजार में एक नया अध्याय शुरू किया. इस मौके पर आयोजित समारोह में कारोबारी उपलब्धियों के साथ अंबानी परिवार की विरासत और संघर्ष की कहानी भी सामने आई. जब अनंत, ईशा और आकाश अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के सपनों और पिता मुकेश अंबानी के योगदान को याद किया, तो मुकेश अंबानी भावुक हो गए.

अनंत अंबानी बोले- जियो देश को दिया गया प्रसाद

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय श्री कृष्ण’ से की. उन्होंने कहा कि स्टॉक एक्सचेंज की घंटी उनके लिए मंदिर की घंटी जैसी है. उनके लिए कारोबार एक पूजा है और हर पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है. उन्होंने जियो को देश के साथ साझा किए जाने वाले प्रसाद के रूप में पेश किया.

अनंत ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि चोरवाड़ के एक साधारण घर से शुरू हुआ सपना आज इतने बड़े कारोबारी साम्राज्य में बदल गया है. यमन के अदन में पेट्रोल पंप पर काम करने वाले धीरूभाई ने दिखाया कि एक आम भारतीय भी बड़े सपने देख सकता है. इसके बाद मुकेश अंबानी ने जामनगर की बंजर जमीन पर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी खड़ी की.

उन्होंने कहा कि जियो का बीज ईशा ने बोया था, जिसे आकाश ने अपना सपना बना लिया. अनंत ने कोरोना महामारी के दौरान जियो की भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जब दुनिया थम गई थी, तब डिजिटल कनेक्टिविटी के कारण बच्चों की पढ़ाई जारी रही और दूर रह रहे परिवार वीडियो कॉल के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहे.

अनंत ने जियो के 53 करोड़ ग्राहकों, नेटवर्क स्थापित करने के लिए बारिश और धूप में काम करने वाले तकनीशियनों और डिजिटल इंडिया के विजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि तीनों भाई-बहन भले ही अलग-अलग शरीर हैं, लेकिन उनकी आत्मा एक है.

ईशा अंबानी ने याद किया रिलायंस का पहला आईपीओ

अनंत के बाद ईशा अंबानी ने रिलायंस के शुरुआती दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही परिवार के साथ डिनर के दौरान मुकेश अंबानी 1977 के पहले आईपीओ की चर्चा कर रहे थे. उस समय वह महज 20 साल के थे और रिलायंस के आईपीओ पर काम कर रहे थे.

ईशा के मुताबिक, धीरूभाई अंबानी चाहते थे कि रिलायंस पर केवल कुछ अमीर लोगों का अधिकार न हो, बल्कि देश का आम नागरिक भी कंपनी में हिस्सेदारी रख सके. उन्होंने कहा कि करीब 50 साल बाद जियो की लिस्टिंग के साथ आम लोगों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बनाने की उसी सोच को आगे बढ़ाया गया है.

ईशा ने बताया कि जियो ने महज 10 साल में करीब 15.5 अरब डॉलर का राजस्व और 8 अरब डॉलर का वास्तविक मुनाफा हासिल किया है. उन्होंने इस उपलब्धि के पीछे आकाश अंबानी की मेहनत का भी जिक्र किया. ईशा ने कहा कि पिछले 13 वर्षों के सफर में आकाश शायद ही किसी रात 12 बजे से पहले घर लौटे हों.

उन्होंने दादी कोकिलाबेन, मां नीता अंबानी, मनोज अंकल और परिवार के अन्य सदस्यों का आभार जताया. पिता को संबोधित करते हुए ईशा ने कहा कि उन्होंने हमेशा वह भविष्य देखा, जिसे दूसरे लोग देख नहीं पाए. उन्होंने अपनी उपलब्धियों का श्रेय मुकेश अंबानी के विजन को दिया.

95 मिनट में पूरा सब्सक्रिप्शन, आकाश ने बताया जियो का सफर

जियो के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने निवेशकों का आभार जताते हुए आईपीओ को मिली प्रतिक्रिया का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कंपनी का आईपीओ महज 95 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. उनके मुताबिक, इसके लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मांग आई और 1.3 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने जियो पर भरोसा जताया.

आकाश ने बताया कि विदेश से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पिता के साथ मिलकर भारत को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से लौटे थे. उन्होंने केरल के पहाड़ी इलाके में रहने वाली अंजलि नाम की लड़की का उदाहरण दिया, जिसे स्कूल के पाठ मोबाइल में डाउनलोड करने के लिए रोजाना दो किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ी पर जाना पड़ता था. इलाके में नेटवर्क की समस्या के कारण उसे यह परेशानी उठानी पड़ती थी. जियो की कनेक्टिविटी मिलने के बाद उसकी पढ़ाई आसान हो गई.

आकाश ने 20 फरवरी 2017 की एक घटना भी साझा की, जब जियो ने 10 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार किया था. उन्होंने बताया कि मुकेश अंबानी ने उनसे मजाक में शर्त रखी थी कि जब तक जियो के 10 करोड़ ग्राहक नहीं हो जाते, तब तक उनकी शादी नहीं हो सकती. आकाश के मुताबिक, उस रात उनके पास जश्न मनाने की दो वजहें थीं.

अगले 10 साल में एआई, क्लाउड और स्पेस कनेक्टिविटी पर फोकस

आकाश अंबानी ने जियो के भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कहा कि जब वह कंपनी से जुड़े थे, तब उसके पास न ग्राहक थे और न ही राजस्व. आज जियो के स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म से 54 करोड़ से अधिक ग्राहक जुड़े हैं.

उन्होंने कहा कि जियो के शुरुआती 10 वर्षों में डेटा को आम लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया. अब अगले 10 वर्षों में कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और स्पेस कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगी.

आकाश ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के ‘रोटी, कपड़ा, मकान और मोबाइल’ के सपने को याद करते हुए कहा कि जियो का लक्ष्य तकनीक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में जियो प्लेटफॉर्म्स का नाम शामिल होगा.

अपने संबोधन के अंत में आकाश ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), एनएसई, बीएसई और निवेशकों का आभार जताया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कंपनी अपने प्रदर्शन और कामकाज के जरिए निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने की कोशिश जारी रखेगी.


HUL Q2 Results: मुनाफा 4% बढ़कर ₹2,790 करोड़, बिक्री में 15% की ग्रोथ; ₹19 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में ₹2,790 करोड़ का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 3.9% अधिक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
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Wednesday, 28 October, 2026
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देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान यूनिलीवर ने बुधवार को सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए. जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹2,790 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹2,685 करोड़ था.

कंपनी के मुताबिक, पिछले साल की समान तिमाही में बंद किए गए कारोबार से जुड़े ₹97 करोड़ के नुकसान का भी तुलनात्मक आंकड़ों पर असर पड़ा. वहीं, नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी सहित जारी कारोबार से मुनाफा लगभग स्थिर रहा. असाधारण मदों से पहले कर के बाद मुनाफा 9.5% बढ़कर ₹2,795 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल ₹2,553 करोड़ था.

बिक्री में 14.8% की बढ़ोतरी

सितंबर तिमाही में HUL का कारोबार सालाना आधार पर 14.8% बढ़कर ₹18,071 करोड़ हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह ₹15,742 करोड़ था. अन्य परिचालन आय सहित कंपनी का कुल परिचालन राजस्व 14.5% बढ़कर ₹18,226 करोड़ रहा.

कंपनी की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि (Underlying Sales Growth) 15% रही, जो पिछले 14 तिमाहियों में सबसे अधिक है. इस दौरान बिक्री की मात्रा में अंतर्निहित वृद्धि (Underlying Volume Growth) 7% दर्ज की गई.

HUL का ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 8% बढ़कर ₹4,089 करोड़ हो गया. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,785 करोड़ था. हालांकि, EBITDA मार्जिन 1.4 प्रतिशत अंक घटकर 22.6% रह गया, जबकि एक साल पहले यह 24% था.

इस दौरान कंपनी का कुल कंसॉलिडेटेड खर्च 15.9% बढ़कर ₹14,574 करोड़ हो गया.

होम केयर कारोबार की बिक्री में 22% की वृद्धि

HUL के होम केयर कारोबार ने सितंबर तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का राजस्व 21.4% बढ़कर ₹6,878 करोड़ रहा. अंतर्निहित बिक्री में 22% की वृद्धि हुई, जबकि बिक्री की मात्रा में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, इस कारोबार का मुनाफा 2.6% बढ़कर ₹1,111 करोड़ रहा.

ब्यूटी और वेलबीइंग कारोबार का मुनाफा 16.4% बढ़ा

ब्यूटी और वेलबीइंग सेगमेंट का राजस्व 15.7% बढ़कर ₹4,319 करोड़ पहुंच गया. इस कारोबार का मुनाफा 16.4% बढ़कर ₹1,235 करोड़ रहा. कंपनी की अंतर्निहित बिक्री में 16% की वृद्धि हुई और बिक्री की मात्रा में भी दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

पर्सनल केयर सेगमेंट के मुनाफे में गिरावट

पर्सनल केयर कारोबार का राजस्व 7.9% बढ़कर ₹2,617 करोड़ रहा, लेकिन इस सेगमेंट का मुनाफा 8.7% घटकर ₹449 करोड़ रह गया. इस कारोबार की अंतर्निहित बिक्री में 9% की वृद्धि हुई, जबकि बिक्री की मात्रा लगभग स्थिर रही.

फूड कारोबार का मुनाफा 15.7% बढ़ा

कंपनी के फूड कारोबार का राजस्व सितंबर तिमाही में 8.5% बढ़कर ₹3,849 करोड़ हो गया. इस सेगमेंट का मुनाफा 15.7% बढ़कर ₹834 करोड़ रहा. अंतर्निहित बिक्री में 9% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बिक्री की मात्रा में एकल अंक के निचले स्तर की वृद्धि हुई.

शेयरधारकों को मिलेगा ₹19 प्रति शेयर का डिविडेंड

HUL के निदेशक मंडल ने ₹1 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹19 के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए 12 नवंबर, 2026 को रिकॉर्ड तारीख तय की गई है. पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 25 नवंबर, 2026 को किया जाएगा.

पूरे वित्त वर्ष के लिए मार्जिन अनुमान बरकरार

कंपनी के मुताबिक, बाजार में उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है. HUL को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उसका प्रदर्शन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले बेहतर रहेगा. कंपनी अपने उत्पाद पोर्टफोलियो और बिक्री के विभिन्न माध्यमों को मजबूत करने पर काम कर रही है.

हालांकि, कंपनी ने निकट भविष्य में कच्चे माल की कीमतों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है. इसके बावजूद HUL ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपना कंसॉलिडेटेड EBITDA मार्जिन अनुमान 22% से 24% के दायरे में बरकरार रखा है.
 


21% प्रीमियम पर लिस्ट हुए Jio के शेयर, मार्केट कैप ₹2.36 लाख करोड़ उछला; एयरटेल पीछे छूटी

बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस से 21% से अधिक प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए. इसके बाद कारोबार के दौरान शेयर में तेजी जारी रही और कीमत करीब 23% के प्रीमियम के साथ ₹1,375 तक पहुंच गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
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Wednesday, 28 October, 2026
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मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio) ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की है. कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस से 21% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हुए और कारोबार के दौरान करीब 23% की तेजी के साथ ₹1,375 तक पहुंच गए. इस उछाल से कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर ₹12.66 लाख करोड़ के पार पहुंच गया और वह बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई.

इस तेजी के साथ कंपनी के बाजार पूंजीकरण में इश्यू प्राइस के आधार पर तय मूल्यांकन की तुलना में करीब ₹2.36 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई. जियो का मार्केट कैप बढ़कर ₹12,66,615 करोड़ के आसपास पहुंच गया. लिस्टिंग से पहले इश्यू प्राइस के आधार पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹10,30,491 करोड़ था.

मार्केट कैप में एयरटेल से आगे निकली जियो

जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के बाद कंपनी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई. इसने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया. जियो की तेजी के बीच एयरटेल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 10:25 बजे भारती एयरटेल का शेयर 2.09% गिरकर ₹1,936.65 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान शेयर ₹1,926.45 के निचले स्तर तक भी पहुंचा. इसके चलते कंपनी का मार्केट कैप मंगलवार के करीब ₹12.34 लाख करोड़ से घटकर कारोबार के दौरान लगभग ₹12.02 लाख करोड़ रह गया. इस तरह एयरटेल के बाजार पूंजीकरण में करीब ₹32,325 करोड़ की कमी आई.

जियो की लिस्टिंग ने टेलीकॉम सेक्टर में कंपनियों के बाजार मूल्यांकन की तस्वीर भी बदल दी है. हालांकि, शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ दोनों कंपनियों का बाजार पूंजीकरण भी बदल सकता है.

बाजार में गिरावट के बीच जियो की मजबूत शुरुआत

जियो की शानदार लिस्टिंग ऐसे समय हुई, जब घरेलू शेयर बाजार दबाव में था. बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे सेंसेक्स 955.27 अंक गिरकर 72,642.44 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान यह करीब 995 अंक टूटकर 72,603.57 के स्तर तक पहुंच गया.

इसी तरह निफ्टी 50 भी 249.95 अंक गिरकर 22,498.45 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान सूचकांक 22,497.70 के स्तर तक फिसल गया. इस तरह व्यापक बाजार में गिरावट के बावजूद जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों ने मजबूत शुरुआत की. हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन बाजार की चाल, निवेशकों की मांग और कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन से प्रभावित हो सकता है.
 


मोबाइल PLI स्कीम से 12 लाख को रोजगार, ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव पर अश्विनी वैष्णव का जवाब

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया, जबकि सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स और ₹3 लाख करोड़ का GST मिला.

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Published - Wednesday, 28 October, 2026
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Wednesday, 28 October, 2026
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भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार सरकार की मेक इन इंडिया पहल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है. अब दुनिया के हर चार में से एक आईफोन का निर्माण भारत में हो रहा है. हालांकि, भारत के इस मॉडल की आर्थिक उपयोगिता को लेकर सवाल भी उठे हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता का जिक्र करते हुए भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की तुलना चीन से की गई थी. इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत मिले टैक्स और रोजगार के आंकड़े सामने रखे हैं.

रिपोर्ट में क्या उठाए गए सवाल?

एक मीडिया रिपोर्ट में भारत में आईफोन निर्माण की बढ़ती हिस्सेदारी का जिक्र किया गया. इसके साथ ही सवाल उठाया गया कि महंगे आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता के बीच इस मॉडल से भारत को कितना आर्थिक लाभ मिल रहा है.

रिपोर्ट में यह तर्क भी सामने आया कि चीन के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को अपनाना भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा. इसी बहस के बीच अश्विनी वैष्णव ने सरकारी प्रोत्साहन के बदले मिले राजस्व और पैदा हुए रोजगार का हिसाब साझा किया.

₹19,000 करोड़ की सब्सिडी, ₹3 लाख करोड़ का GST

अश्विनी वैष्णव के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत सरकार अब तक कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दे चुकी है. इसके मुकाबले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स मिला है. इसके अलावा, इस सेक्टर से ₹3 लाख करोड़ का GST राजस्व प्राप्त हुआ है.

इन आंकड़ों के जरिए मंत्री ने यह रेखांकित किया कि सरकारी प्रोत्साहन के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से टैक्स के रूप में भी बड़ा राजस्व हासिल हुआ है. हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में पूरी योजना की लागत और लाभ का आकलन नहीं हैं, लेकिन सरकार की ओर से इन्हें स्कीम के आर्थिक योगदान के तौर पर पेश किया गया है.

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की उपलब्धियों में रोजगार को भी अहम बताया गया है. अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कुल 25 लाख लोगों को रोजगार दिया है. इनमें से 12 लाख लोगों को अकेले मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों में काम मिला है.

इस तरह मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रोजगार सृजन का एक बड़ा हिस्सा बनकर उभरी है. सरकार की ओर से साझा किए गए ये आंकड़े इस क्षेत्र के विस्तार और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों को रेखांकित करते हैं.

भारत में बढ़ रहा आईफोन निर्माण

भारत में आईफोन का बढ़ता उत्पादन देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विस्तार को दिखाता है. हालांकि, इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता का आकलन करने के लिए घरेलू स्तर पर पुर्जों के निर्माण, आयात पर निर्भरता, स्थानीय कंपनियों की भागीदारी और उत्पादन से मिलने वाले आर्थिक लाभ जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी होगा.

फिलहाल, सामने आए आंकड़ों के जरिए सरकार ने मोबाइल PLI स्कीम के पक्ष में अपना आर्थिक तर्क रखा है. इस बहस का केंद्र यही है कि सरकारी प्रोत्साहन से बढ़े उत्पादन का लाभ टैक्स राजस्व, रोजगार और देश में विकसित हो रही मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के रूप में किस हद तक मिल रहा है.

 


पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथनॉल नहीं मिलाएगी सरकार, हरदीप सिंह पुरी ने बताई वजह

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों को गलत जानकारी बताते हुए कहा कि इस योजना से सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत हुई है, जिसमें से ₹1.40 लाख करोड़ किसानों को मिले हैं.

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Published - Wednesday, 28 October, 2026
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Wednesday, 28 October, 2026
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पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार की फिलहाल एथनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. मंगलवार को दक्षिण गोवा में ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया. मंत्री ने कहा कि जैव ईंधन और E20 से जुड़ी गलत जानकारी फैलाई जा रही है.

E20 पेट्रोल पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?

E20 पेट्रोल में 20% एथनॉल और 80% पेट्रोल होता है. पुरी ने कहा कि एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य 20% था और फिलहाल इससे आगे बढ़ाने की सरकार की कोई इच्छा नहीं है. उन्होंने E20 ईंधन के खिलाफ किए जा रहे दावों को एक मनगढ़ंत कहानी बताया.

मंत्री ने सोशल मीडिया पर किए गए उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन बंद पड़ रहे हैं और उनमें खराबी आ रही है. उनके मुताबिक, अगर ईंधन से बड़े पैमाने पर इंजन को नुकसान हो रहा होता, तो सड़कों पर इसका असर साफ दिखाई देता. उन्होंने कहा कि हर दिन करीब छह करोड़ वाहन ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर पहुंचते हैं.

E20 से सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत का दावा

सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च होती है और चालू खाते पर दबाव पड़ता है.

हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया कि E20 पेट्रोल की शुरुआत से केंद्र सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत हुई है. इसमें से ₹1.40 लाख करोड़ किसानों को दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि एथनॉल उत्पादन ने किसानों को खाद्यान्न उत्पादक के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन से जुड़ने का अवसर भी दिया है.

पुराने वाहनों में आ सकती है परेशानी

E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों में समस्याएं आने की शिकायतों पर पुरी ने कहा कि यह ईंधन इसके अनुरूप तैयार किए गए वाहनों के लिए है. उन्होंने 2003 से पहले बने पुराने वाहनों में कुछ समस्याएं होने की बात कही.

मंत्री ने यह भी कहा कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों से जुड़ी समस्या सामने आई थी, क्योंकि इनका इस्तेमाल अन्य चीजों के परिवहन के लिए भी किया जाता था. इंजन को नुकसान पहुंचने के दावे पर उन्होंने संबंधित वाहन निर्माता की ओर से कानूनी कार्रवाई किए जाने का भी जिक्र किया.

हालांकि, E20 को लेकर वाहन चालकों की शिकायतों और इंजन पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन वाहन की तकनीक, निर्माण वर्ष और निर्माता के निर्देशों के आधार पर किया जाना जरूरी है.

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी मिली अनुमति

इस बीच, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए हैं. इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति दी गई है. ये वाहन अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने के लिए तैयार किए जाते हैं.

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E85 यानी 85% एथनॉल और 15% पेट्रोल वाले ईंधन के साथ-साथ E100 जैसे लगभग शुद्ध एथनॉल वाले ईंधन पर भी चल सकते हैं. हालांकि, ऐसे ईंधन का इस्तेमाल केवल संबंधित ईंधन के अनुकूल तैयार किए गए वाहनों में ही किया जा सकता है.

‘अनुसंधान से व्यवसायीकरण तक ऊर्जा नवाचार को गति देना’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय कर रहा है. इस दौरान एथनॉल मिश्रण, ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे.

 


SAIL का मुनाफा चार गुना से ज्यादा बढ़कर ₹1,774 करोड़, आय में करीब 20% की बढ़ोतरी

जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर चार गुना से अधिक बढ़कर ₹1,774 करोड़ हो गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील कंपनी सेल (SAIL) ने पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹427 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था. वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹1,636 करोड़ रहा था. इस तरह जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में भी मुनाफे में 8.4% की बढ़ोतरी हुई है.

कंपनी की परिचालन से आय भी बढ़कर ₹31,998 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में ₹26,704 करोड़ थी. SAIL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एके पांडा ने कहा कि वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन परिचालन क्षमता और वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है.

पहली छमाही में मुनाफा तीन गुना से ज्यादा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर के दौरान SAIL का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा तीन गुना से अधिक बढ़कर ₹3,410 करोड़ हो गया. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी ने ₹1,112 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था.

इस दौरान कंपनी का ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का लाभ (EBITDA) 55% बढ़कर ₹8,917 करोड़ रहा. पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह ₹5,754 करोड़ था.

दूसरी तिमाही में बिक्री और उत्पादन बढ़ा

सितंबर तिमाही में SAIL की बिक्री मात्रा सालाना आधार पर 5.1% बढ़कर 51.6 लाख टन हो गई. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 49.1 लाख टन स्टील की बिक्री की थी.

कंपनी का कच्चे इस्पात का उत्पादन भी बढ़कर 48.5 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 46.5 लाख टन था.

हालांकि, वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी की कुल बिक्री मात्रा मामूली घटकर 93.3 लाख टन रही. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 94.6 लाख टन थी. बिक्री मात्रा में हल्की गिरावट के बावजूद कंपनी के मुनाफे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया.

₹20,583 करोड़ रहा बकाया कर्ज

SAIL का बकाया कर्ज ₹20,583 करोड़ रहा. कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए कर्ज घटाने पर भी ध्यान दे रही है. एके पांडा के मुताबिक, कंपनी आगे भी लागत को तर्कसंगत बनाने, इन्वेंट्री कम करने और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान देगी. इसके साथ ही कर्ज में लगातार कमी लाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे.

कंपनी को उम्मीद है कि लागत नियंत्रण, परिचालन दक्षता और बेहतर उत्पाद मिश्रण पर फोकस से उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूती मिलेगी.


रक्षा क्षेत्र में AI को बढ़ावा, सर्वम ने रक्षा मंत्रालय के साथ किया 5 साल का समझौता

भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में AI परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन के लिए साझा ढांचा तैयार होगा, निर्णय समर्थन, लक्ष्य पहचान और डेटा फ्यूजन पर रहेगा फोकस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी सर्वम (Sarvam) ने रक्षा मंत्रालय के हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ IDS) के साथ पांच साल का समझौता ज्ञापन (MoU) किया है. इसके तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में AI आधारित परियोजनाओं का विकास और क्रियान्वयन किया जाएगा. यह समझौता रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इस समझौते के तहत तीनों सेनाओं के साथ-साथ HQ IDS के अंतर्गत आने वाले संयुक्त और एकीकृत संगठनों के लिए AI कार्यक्रमों का एक साझा ढांचा तैयार किया जाएगा. इससे एक ही सहयोग के तहत कई परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा.

समझौते के अनुसार, सर्वम परिचालन, प्रशिक्षण और निर्णय लेने में सहायता से जुड़े कार्यों के लिए AI एप्लिकेशन तैयार करेगी, उनका विकास करेगी और उन्हें तैनात करेगी. तैनाती के बाद कंपनी तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी. वहीं, HQ IDS परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा.

तीनों सेनाओं में साझा AI तकनीक का इस्तेमाल

सर्वम के मुताबिक, इस सहयोग के तहत तीनों सेनाएं साझा AI फाउंडेशन मॉडल, एजेंटिक इंफ्रास्ट्रक्चर, भू-स्थानिक प्रणालियों और परसेप्शन तकनीकों का इस्तेमाल कर सकेंगी. इससे एक सेना की परियोजना से मिले अनुभव और सीख को दूसरी सेनाओं की परियोजनाओं में भी लागू किया जा सकेगा.

इस साझेदारी के तहत निर्णय समर्थन प्रणाली, लक्ष्य पहचान और सेंसर से लेकर हथियार तक की पूरी प्रक्रिया में डेटा फ्यूजन पर ध्यान दिया जाएगा. इन प्रणालियों का उद्देश्य सैन्य अभियानों में उपलब्ध जानकारी का बेहतर इस्तेमाल करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है. हालांकि, परिचालन संबंधी फैसलों में मानवीय निगरानी बनी रहेगी.

कंपनी के अनुसार, इन AI प्रणालियों का निर्माण भारत में विकसित तकनीक के आधार पर किया जाएगा और इन्हें संप्रभु यानी देश के नियंत्रण वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैनात किया जाएगा.

आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र में AI को बढ़ावा

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास और इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है. सैन्य आधुनिकीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है.

इस परियोजना को सर्वम की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा संबंधी विशेष इकाई 'चाणक्य' के माध्यम से लागू किया जाएगा. इसके लिए कंपनी अपने AI टेक्नोलॉजी स्टैक का इस्तेमाल करेगी, जिसमें उसका Sarvam 105B फाउंडेशन मॉडल भी शामिल है.

सर्वम के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा, "देश की रक्षा के लिए तीनों सेनाओं के साथ काम करना हमारे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है." उन्होंने कहा कि कंपनी इन परियोजनाओं को लागू करने में उच्चतम मानकों का पालन करेगी.

कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी के तहत ऐसी AI परत विकसित करने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल होंगी, जो तीनों सेनाओं की रक्षा क्षमताओं के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ने में मदद करेगी. इससे विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और रक्षा क्षेत्र में AI के इस्तेमाल को व्यापक बनाने की दिशा में काम किया जाएगा.

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पेटीएम के मुनाफे में जबरदस्त उछाल, दूसरी तिमाही में 226 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 28% बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये हुआ, UPI मर्चेंट चार्ज से कमाई बढ़ने की उम्मीद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम (Paytm) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 226 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 21 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,061 करोड़ रुपये था. बेहतर परिचालन मार्जिन, वित्तीय सेवाओं के कारोबार में वृद्धि और UPI लेनदेन पर मर्चेंट चार्ज से अतिरिक्त कमाई की संभावनाओं ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है.

पेटीएम ब्रांड का संचालन करने वाली कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस (One 97 Communications) ने लगातार छठी तिमाही में मुनाफा दर्ज किया है. कंपनी का ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का लाभ (EBITDA) सालाना आधार पर 90 फीसदी बढ़कर 270 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, EBITDA मार्जिन बढ़कर 10 फीसदी पहुंच गया, जो कंपनी की परिचालन लाभप्रदता में सुधार को दर्शाता है.

ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं, जब पात्र UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए कमाई का नया अवसर बन सकता है. हालांकि, पेटीएम का मानना है कि इस बदलाव का वित्तीय प्रभाव अगले दो से तीन तिमाहियों में अधिक स्पष्ट और स्थिर हो सकेगा.

पहली छमाही में मुनाफा तीन गुना से ज्यादा बढ़ा

सितंबर तिमाही में पेटीएम ने राजस्व वृद्धि के साथ परिचालन दक्षता में भी सुधार दर्ज किया. कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के 21 करोड़ रुपये से बढ़कर 226 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, EBITDA पिछले साल के करीब 142 करोड़ रुपये से बढ़कर 270 करोड़ रुपये पहुंच गया.

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) सालाना आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़कर 445 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 144 करोड़ रुपये था.

कंपनी के मुताबिक, मर्चेंट और कंज्यूमर कारोबार में मजबूती, सेवाओं से कमाई बढ़ाने की बेहतर क्षमता और परिचालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने में योगदान दिया.

UPI मर्चेंट चार्ज से कमाई बढ़ने की उम्मीद

UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए ढांचे को पेटीएम के भुगतान कारोबार के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है. MDR वह शुल्क है, जो पात्र मर्चेंट लेनदेन को प्रोसेस करने के लिए लिया जाता है. इस शुल्क से होने वाली आय भुगतान क्षेत्र से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच वितरित होती है.

पेटीएम को उम्मीद है कि नए ढांचे के लागू होने के बाद उसके पेमेंट प्रोसेसिंग मार्जिन में 2.5 बेसिस पॉइंट का सुधार हो सकता है. हालांकि, कंपनी के अनुसार, इसका पूरा प्रभाव स्थिर होने में करीब दो से तीन तिमाहियों का समय लग सकता है.

लेनदेन की संख्या और मूल्य बढ़ने के साथ मर्चेंट पेमेंट कारोबार की लाभप्रदता में सुधार की संभावना है. विश्लेषकों ने भी संकेत दिया है कि UPI मर्चेंट चार्ज से कंपनी की भविष्य की कमाई को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव लेनदेन के प्रकार, भुगतान व्यवस्था में शुल्क के वितरण और कंपनी के मार्जिन में होने वाले स्थायी सुधार पर निर्भर करेगा.

वित्तीय सेवाओं और मर्चेंट पेमेंट से कारोबार को मजबूती

पेटीएम के वित्तीय सेवा कारोबार ने राजस्व वृद्धि में अहम भूमिका निभाई. वित्तीय सेवाओं के वितरण से होने वाला राजस्व सालाना आधार पर 49 फीसदी बढ़कर 912 करोड़ रुपये हो गया. इसमें मर्चेंट लोन, पर्सनल लोन और अन्य वित्तीय उत्पादों के वितरण का योगदान रहा.

वहीं, भुगतान सेवाओं से राजस्व 25 फीसदी बढ़कर 1,434 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी ने लगातार छठी तिमाही में उपभोक्ता UPI बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई. तिमाही के दौरान पेटीएम के जरिए UPI लेनदेन का मूल्य 42 फीसदी बढ़ा, जबकि उद्योग की वृद्धि दर 19 फीसदी रही.

कंपनी का मर्चेंट नेटवर्क भी बढ़ा है. सब्सक्रिप्शन प्लान का इस्तेमाल करने वाले मर्चेंट की संख्या सालाना आधार पर 27 लाख बढ़कर 1.64 करोड़ हो गई. इससे भुगतान सेवाओं और संबंधित वित्तीय उत्पादों के जरिए कमाई बढ़ाने के अवसर मजबूत हुए हैं.

AI के इस्तेमाल से लागत घटाने में मदद

पेटीएम अपने कंज्यूमर प्लेटफॉर्म, मर्चेंट परिचालन, इंजीनियरिंग, जोखिम प्रबंधन, कर्ज वसूली और धोखाधड़ी रोकने जैसी गतिविधियों में AI का इस्तेमाल बढ़ा रही है. कंपनी के अनुसार, AI के जरिए परिचालन दक्षता बढ़ने से राजस्व के मुकाबले अप्रत्यक्ष खर्च का अनुपात घटकर 46 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 52 फीसदी था. राजस्व में वृद्धि और लागत प्रबंधन में सुधार से कंपनी को भविष्य में परिचालन लाभप्रदता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. सितंबर 2026 के अंत में पेटीएम के पास 13,617 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध थी. इससे कंपनी को कारोबार के विस्तार और निवेश के लिए वित्तीय संसाधन मिलते हैं.

पेटीएम के शेयर में भी तेजी

पेटीएम के शेयर 26 अक्टूबर को 2.39 फीसदी की तेजी के साथ 1,654.70 रुपये पर बंद हुए. इस दौरान निफ्टी 50 में 0.68 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन बेहतर मुनाफे और UPI मर्चेंट चार्ज से भविष्य में होने वाली संभावित कमाई को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी दर्शाता है.

आने वाली तिमाहियों में कंपनी के सामने राजस्व वृद्धि को बनाए रखने के साथ बढ़ते लेनदेन और भुगतान कारोबार की बेहतर लाभप्रदता को मजबूत मार्जिन में बदलने की चुनौती होगी. UPI मर्चेंट चार्ज का वास्तविक योगदान और लागत में कमी को बनाए रखने की क्षमता पेटीएम के भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगी.


मुंबई रिफाइनरी के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 250 करोड़ रुपये खर्च करेंगी टाटा पावर और BPCL

BPCL की मुंबई रिफाइनरी में 90 मेगावाट बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए विकसित होगा 110 केवी का पावर नेटवर्क, 24 महीने में पूरा होने की उम्मीद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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टाटा पावर (Tata Power) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने मुंबई रिफाइनरी के लिए 110 किलोवोल्ट (kV) का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 250 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति जताई है. प्रस्तावित नेटवर्क का इस्तेमाल रिफाइनरी में पेट्रो रेसिड फ्लूडाइज्ड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट (PRFCCU) की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा. इस परियोजना पर कुल 14,203 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है.

दोनों कंपनियों ने इस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस परियोजना को पूरा होने में करीब 24 महीने लगने की उम्मीद है. टाटा पावर 110 केवी का पावर कनेक्शन उपलब्ध कराने के साथ इससे जुड़े बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की डिजाइनिंग और विकास का काम भी करेगी.

90 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी पूरी

BPCL की PRFCCU परियोजना की प्रोसेसिंग क्षमता सालाना 30 लाख मीट्रिक टन (3 MMTPA) है. यह BPCL की उन परियोजनाओं में दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है, जिन पर फिलहाल काम चल रहा है. वहीं, मुंबई रिफाइनरी में शुरू की गई यह अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है.

इस यूनिट को संचालित करने के लिए 90 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी. प्रस्तावित पावर इंफ्रास्ट्रक्चर इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा. इससे रिफाइनरी की परिचालन संबंधी जरूरतों के मुताबिक बिजली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

ट्रॉम्बे में 400 केवी ट्रांसमिशन सुविधा विकसित करने की योजना

इस बीच, टाटा पावर अगले पांच वर्षों में मुंबई के ट्रॉम्बे में 400 केवी की ट्रांसमिशन सुविधा विकसित करने की भी योजना बना रही है. इस प्रस्तावित सुविधा का उद्देश्य कंपनी के ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और मुंबई के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ाना है.

110 केवी के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर टाटा पावर और BPCL का प्रस्तावित निवेश मुंबई रिफाइनरी की एक बड़ी परियोजना की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है. वहीं, ट्रॉम्बे में प्रस्तावित 400 केवी ट्रांसमिशन सुविधा से शहर के औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
 


अमेजन के साथ मिलकर 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रक उतारेगी टाटा मोटर्स, लंबी दूरी की माल ढुलाई पर फोकस

त्योहारी सीजन में दिल्ली से शुरू होगी इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती, NH-48 पर दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई के 2,800 किलोमीटर लंबे फ्रेट कॉरिडोर पर भी बढ़ेगा इलेक्ट्रिक परिवहन

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने भारत में अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए टाटा मोटर्स के साथ साझेदारी की है. इस समझौते के तहत अमेजन के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में अगले तीन वर्षों में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल किए जाएंगे. कंपनी का दावा है कि किसी ई-कॉमर्स कंपनी की ओर से भारत में इलेक्ट्रिक ट्रकों की यह सबसे बड़ी नियोजित तैनाती होगी. इसका उद्देश्य शहरों के भीतर माल ढुलाई से लेकर लंबी दूरी के राष्ट्रीय राजमार्गों पर परिवहन को इलेक्ट्रिक वाहनों की मदद से बढ़ावा देना है.

इस योजना के तहत टाटा मोटर्स के इलेक्ट्रिक ट्रक अमेजन की विभिन्न सुविधाओं के बीच, शहरों में और राष्ट्रीय माल ढुलाई कॉरिडोर पर सामान पहुंचाएंगे. इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती की शुरुआत त्योहारी सीजन में दिल्ली से होगी, जब ई-कॉमर्स और खुदरा कारोबार में माल ढुलाई की मांग बढ़ जाती है.

दिल्ली से शुरू होगी टाटा अल्ट्रा E.7 की तैनाती

अमेजन अपने मिडिल-माइल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में टाटा मोटर्स के हल्के और मध्यम श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल करेगा. शुरुआती चरण में टाटा अल्ट्रा E.7 इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती की जाएगी. इन वाहनों का इस्तेमाल शहरों के भीतर और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच सामान पहुंचाने के लिए किया जाएगा.

इस समझौते के तहत टाटा मोटर्स इलेक्ट्रिक ट्रकों की आपूर्ति करेगी, जबकि अमेजन के कैरियर पार्टनर इन वाहनों का संचालन करेंगे. दोनों कंपनियां इलेक्ट्रिक ट्रकों को बड़े स्तर पर अपनाने में आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए मिलकर काम करेंगी. इसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसिंग और परिचालन संबंधी सहायता शामिल है.

2,800 किलोमीटर लंबे दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर भी जोर

इस पहल का एक प्रमुख हिस्सा NH-48 पर दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई के 2,800 किलोमीटर लंबे माल ढुलाई कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रकों का संचालन करना है. यह कॉरिडोर सात राज्यों से होकर गुजरता है और देश के प्रमुख ई-कॉमर्स बाजारों को जोड़ता है.

इस मार्ग पर इलेक्ट्रिक ट्रकों का संचालन आसान बनाने के लिए विशेष चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसमें याहवी के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे चार्जिंग हब भी शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, देशभर में याहवी की ओर से विकसित 10 चार्जिंग यार्ड भी इलेक्ट्रिक ट्रकों के संचालन में मदद कर रहे हैं.

इस विस्तार के जरिए अमेजन का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल लास्ट-माइल डिलीवरी तक सीमित रखने के बजाय लंबी दूरी की माल ढुलाई में भी बढ़ाना है.

सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजनाओं को मिलेगा समर्थन

यह पहल केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की कोशिशों के अनुरूप है. इसमें पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE), ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI Auto) तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (PLI ACC) से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है.

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अमेजन और टाटा मोटर्स की साझेदारी देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की बढ़ती जरूरतों को भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक ट्रकों के जरिए पूरा करने की क्षमता दिखाती है. वहीं, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, परिवहन और आईटी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देना परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में भी मदद मिल सकती है.

2040 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य

अमेजन के एशिया-पैसिफिक, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और तुर्की के ऑपरेशंस वाइस प्रेसिडेंट अभिनव सिंह ने कहा कि कंपनी के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना 2040 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने की रणनीति का अहम हिस्सा है.

उन्होंने कहा, "क्लाइमेट प्लेज के सह-संस्थापक के रूप में अमेजन, LaneShift जैसी पहलों के जरिए पूरे उद्योग के साथ मिलकर काम कर रहा है. इन पहलों के तहत वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक ट्रकों का परीक्षण किया जाता है और यह समझने की कोशिश की जाती है कि इनके व्यापक इस्तेमाल के लिए किस तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी. हमारा लक्ष्य 2040 तक कार्बन उत्सर्जन को शुद्ध रूप से शून्य करना है और परिवहन व्यवस्था में बदलाव इस लक्ष्य को हासिल करने का अभिन्न हिस्सा है."

सिंह ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरे परिवहन नेटवर्क पर ध्यान देना होगा. इसमें ग्राहकों तक पैकेज पहुंचाने वाले वाहनों से लेकर लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच सामान ले जाने वाले बड़े ट्रक और लंबी दूरी के माल परिवहन मार्ग शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि अमेजन अपने नेटवर्क में 3,000 से अधिक हल्के और मध्यम श्रेणी के इलेक्ट्रिक मालवाहक ट्रक तैनात करेगा. इन ट्रकों को कंपनी के कैरियर पार्टनर संचालित करेंगे. अमेजन वाहन निर्माताओं और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर वाहनों की उपलब्धता, वित्तपोषण और लीजिंग मॉडल तथा शुरुआती लागत कम करने पर काम कर रहा है. इसके साथ ही, नेटवर्क में समर्पित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है.

सिंह के मुताबिक, इलेक्ट्रिक ट्रकों को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए वाहन निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, चार्जिंग ऑपरेटरों और वित्तपोषण भागीदारों को मिलकर काम करना होगा. बुनियादी ढांचे का विस्तार, वित्त तक बेहतर पहुंच और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को तेज करना इस बदलाव के लिए जरूरी है. कंपनी के अनुसार, भारत के 500 से अधिक शहरों में उसके 15,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन चल रहे हैं.

इलेक्ट्रिक ट्रकिंग को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी

टाटा मोटर्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड (ट्रक्स) राजेश कौल ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक ट्रकिंग अब शुरुआती परीक्षणों से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के चरण में पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को केवल पायलट परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, औद्योगिक सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, इस्पात, सीमेंट, कंटेनर और थोक माल सहित पूरे माल परिवहन तंत्र की जरूरतों को पूरा करना होगा.

कौल ने कहा, "हमारा सिद्धांत उत्पादकता से कोई समझौता नहीं करना है. इसमें पेलोड, परिचालन समय और लाभप्रदता शामिल हैं, क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहक को लाभ मिलना चाहिए."

उन्होंने बताया कि टाटा मोटर्स का इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन पोर्टफोलियो 17 टन से लेकर 55 टन तक की श्रेणियों में फैला हुआ है. इसमें लास्ट-माइल, शहरों में वितरण, मिडिल-माइल, क्षेत्रीय माल परिवहन, निर्माण और लंबी दूरी के माल परिवहन के लिए वाहन शामिल हैं. कंपनी ने इलेक्ट्रिक बसों और छोटे कमर्शियल वाहनों के क्षेत्र में अपने अनुभव का भी उल्लेख किया. कौल के मुताबिक, टाटा मोटर्स की इलेक्ट्रिक बसें 10 से अधिक शहरों में चल रही हैं और इन बसों ने अब तक कुल मिलाकर 64 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है.

कौल ने कहा कि इलेक्ट्रिक ट्रकों को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए केवल वाहन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं, वित्तपोषण और साझेदारी से जुड़े पूरे इकोसिस्टम का विकास जरूरी है. उन्होंने कहा कि चार्जिंग के क्षेत्र में कई स्टार्टअप सामने आ रहे हैं, जो दो शहरों के बीच बुनियादी ढांचा विकसित कर इसे राजस्व के मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "एक बड़ा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और उन्नत ईवी तकनीक मिलकर ऐसा समाधान तैयार करते हैं, जो व्यावहारिक, भरोसेमंद और सबसे बढ़कर व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य है."

कौल के मुताबिक, अमेजन के साथ यह साझेदारी अगले तीन वर्षों में 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती के जरिए स्वच्छ मोबिलिटी को बड़े स्तर पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी. शुरुआत में टाटा अल्ट्रा E.7 ट्रक अमेजन के मिडिल-माइल लॉजिस्टिक्स में इस्तेमाल होंगे. इसके बाद कंपनी अपने व्यापक इलेक्ट्रिक वाहन पोर्टफोलियो के जरिए दूसरे परिचालन और लंबी दूरी के मार्गों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी.

उन्होंने बताया कि अमेजन की टीम ने लगभग छह से आठ महीने पहले दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख मार्गों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों की जरूरतों पर चर्चा की थी. इन मार्गों पर परिचालन के लिए हल्के सामान की ढुलाई करने वाले दो एक्सल के वाहन और 32 फीट डेक लंबाई जैसे तकनीकी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है. इन वाहनों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.

कौल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां उद्योग को निवेश करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार करने में मदद कर रही हैं. उन्होंने पीएम ई-ड्राइव, पीएलआई योजनाओं और राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीतिगत समर्थन से कंपनियों को भरोसे के साथ निवेश करने और तेजी से विस्तार करने में मदद मिलती है.

उन्होंने कहा, "टिकाऊ मोबिलिटी तभी सफल होती है, जब वह पर्यावरणीय प्रदर्शन, परिचालन की विश्वसनीयता और आर्थिक व्यवहार्यता, तीनों पहलुओं पर खरी उतरे."

कौल के मुताबिक, टाटा मोटर्स की प्रतिबद्धता केवल उत्पाद उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. कंपनी उन्नत इंजीनियरिंग, स्थानीयकरण, मजबूत सर्विस सपोर्ट और साझेदारियों के माध्यम से इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर इकोसिस्टम तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं.

टाटा अल्ट्रा E.7 में फास्ट चार्जिंग और हाई-वोल्टेज सुरक्षा

टाटा अल्ट्रा E.7 इलेक्ट्रिक ट्रक को इंटीग्रेटेड ई-एक्सल तकनीक पर तैयार किया गया है. इसमें CCS2 फास्ट चार्जिंग, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और नई पीढ़ी का क्रैश-टेस्टेड केबिन दिया गया है. इसमें हाई-वोल्टेज सुरक्षा प्रणाली भी मौजूद है.

कंपनी के अनुसार, इस ट्रक को कम परिचालन लागत, बेहतर अपटाइम और माल ढुलाई के दौरान उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है.

अमेजन इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए C40 Cities के साथ चलाए गए LaneShift कार्यक्रम का भी समर्थन कर चुका है. इस कार्यक्रम के तहत बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रकों का पायलट संचालन किया गया था. इसने शून्य टेलपाइप उत्सर्जन वाले ट्रकों के लिए भारत का पहला प्रमाण-आधारित रोडमैप तैयार करने में भी योगदान दिया.

इसके अलावा, The Climate Pledge ने हाल ही में SuperEV नाम का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है. इसका उद्देश्य चार्जिंग, वाहन, वित्तपोषण और नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच को एक ही जगह उपलब्ध कराकर कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना आसान बनाना है.

अमेजन और टाटा मोटर्स की यह साझेदारी भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन ट्रकों की चरणबद्ध तैनाती, चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता और परिचालन लागत में होने वाले बदलावों के आधार पर किया जा सकेगा.