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ब्याज दरें स्थिर, REIT फंडिंग के प्रस्ताव से कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश बढ़ने की उम्मीद

RBI MPC का रेपो रेट स्थिर रखने और REIT को बैंक लोन देने का प्रस्ताव रियल एस्टेट सेक्टर के लिए दोहरी राहत लेकर आया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला सेक्टर को स्थिरता से आगे बढ़ाकर अगले ग्रोथ फेज की नींव रखने वाला साबित हो सकता है.

रितु राणा 7 months ago

लंबे समय से फंडिंग की कमी और ऊंची लागत से जूझ रहे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) ने राहत और उम्मीद दोनों का संदेश दिया है. रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने के साथ-साथ MPC ने रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) को सीमित और सुरक्षित शर्तों पर बैंक लोन देने का प्रस्ताव रखा है. इस फैसले को कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है.

REIT को लोन का प्रस्ताव, फंडिंग के नए रास्ते

RBI MPC के प्रस्ताव के अनुसार, अगर बैंकों को REIT को लोन देने की अनुमति मिलती है, तो ऑफिस स्पेस, मॉल और बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के नए विकल्प खुलेंगे. अब तक REIT को सीधे बैंक फाइनेंसिंग सीमित तौर पर ही मिल पाती थी. बैंकों की भागीदारी से सेक्टर में भरोसा बढ़ेगा और अटके हुए प्रोजेक्ट्स को रफ्तार मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि REIT के जरिए आने वाली पूंजी अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली होती है, जिससे संस्थागत निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा.

डेवलपर्स और खरीदारों के लिए क्या मायने रखता है फैसला
वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर गौरव के सिंह ने कहा, “दिसंबर में इसी तरह के ब्रेक के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव न करने से यह कंटिन्यूटी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहजनक है. स्थिर ब्याज दरें घर खरीदारों के भरोसे को बनाए रखने और खरीदने के फैसलों को सपोर्ट कर रही हैं, खासकर एंड-यूजर-ड्रिवन मार्केट में, डेवलपर्स के लिए अनुमानित उधार लागत बेहतर कैश फ्लो प्लानिंग और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करती है.”

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन ने कहा, “रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत है. इससे घर खरीदारों की ईएमआई संतुलित रहेगी और डेवलपर्स को नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने में सहूलियत मिलेगी.”

व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (स्ट्रैटेजी) सुदीप भट्ट ने कहा, “दिसंबर 2025 में रेपो रेट कटौती के बाद कुल 125 बेसिस पॉइंट की राहत मिल चुकी है. मौजूदा स्थिरता होम लोन दरों को संतुलित रखती है और डेवलपर्स के लिए लिक्विडिटी बेहतर बनाती है.”

एम3एम इंडिया के डायरेक्टर फाइनेंस यतीश वहाल ने कहा, “एमपीसी द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए आवश्यक स्थिरता प्रदान करता है, विशेषकर ऐसे समय में जब मांग मजबूत बनी हुई है और खरीदारों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. एक अनुमानित ब्याज दर वातावरण होम लोन की वहनीयता को समर्थन देता है और डेवलपर्स को पूंजी निवेश की योजना अधिक स्पष्टता के साथ बनाने में सक्षम बनाता है.”  

BankBazaar के CEO आदिल शेट्टी ने कहा, “RBI का रेट स्थिर रखने का फैसला यह दिखाता है कि अब फोकस महंगाई, लिक्विडिटी और ट्रांसमिशन पर है. होम लोन अभी भी प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं. उधारकर्ता EMI बढ़ाकर या बैलेंस ट्रांसफर से लागत घटा सकते हैं.”

निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत

PropertyPistol के फाउंडर एवं MD आशीष नारायण अग्रवाल ने कहा, “LTV नियम और स्थिर EMI पहली बार घर खरीदने वालों के लिए मददगार हैं. REIT को बैंक लोन देने का प्रस्ताव कमर्शियल एसेट्स के लिए लॉन्ग टर्म फंडिंग को मजबूत करेगा.”

InvestoXpert Advisors के फाउंडर विशाल रहेजा ने कहा, “125 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद उधारी लागत सामान्य हो चुकी है. बैंक लेंडिंग टू REITs और इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स रियल एस्टेट में पूंजी के प्रवाह को तेज करेगा.”

 

खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, मांग रहेगी स्थिर

क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा, “रेपो रेट को स्थिर रखना खरीदारों के लिए भरोसे का बड़ा संकेत है. जब ब्याज दरों में अचानक बदलाव की आशंका नहीं होती, तब ग्राहक आत्मविश्वास के साथ घर खरीदने का निर्णय लेते हैं. इससे बाजार में स्थिर और टिकाऊ मांग बनी रहती है.”

वहीं, निराला वर्ल्ड के सीएमडी सुरेश गर्ग के मुताबिक, “एक संतुलित बजट के बाद ब्याज दरों को स्थिर रखना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक फैसला है. इससे खरीदार और निवेशक दोनों के लिए अनावश्यक उतार-चढ़ाव की आशंका खत्म होती है.”

SS Group के MD एवं CEO अशोक सिंह जौनापुरिया ने कहा, “रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखना हाउसिंग मार्केट के लिए बेहद अहम है. NCR में लग्जरी और बड़े साइज के घरों की मांग पहले से ही मजबूत है.”

Ralith Realty के CEO राकेश कौल ने कहा, “जब EMI में बदलाव नहीं होता, तो खरीदार बिना झिझक फैसला लेते हैं. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस से रेजिडेंशियल डिमांड और मजबूत होगी.”

रोजगार और सहायक उद्योगों को मिलेगा समर्थन

विजन बिजनेस पार्क के फाउंडर अतुल विक्रम सिंह ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर का सीधा असर रोजगार पर पड़ता है और आरबीआई का यह फैसला कंस्ट्रक्शन, स्टील, सीमेंट और अन्य सहायक उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होगा.

आरजी ग्रुप के डायरेक्टर हिमांशु गर्ग ने कहा, “पिछले कुछ समय में ब्याज दरों में जो नरमी आई है, उसका पूरा लाभ अभी मिलना बाकी है. रेपो रेट को स्थिर रखने से उस असर को जमीन पर उतरने का समय मिलेगा और हाउसिंग डिमांड संतुलित तरीके से आगे बढ़ेगी.”

 

डेवलपर्स ने फैसले को बताया दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक

त्रेहन आइरिस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमन त्रेहन ने कहा, “रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने का आरबीआई का फैसला व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करता है. यह नीति घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को जरूरी स्पष्टता और पूर्वानुमान देती है, जिससे आवासीय और कमर्शियल रियल एस्टेट में मांग बनी रहती है.”

अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल ने कहा, “रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए जरूरी स्थिरता और स्पष्टता लेकर आया है. इससे उधारी लागत का अनुमान आसान होता है और डेवलपर्स को प्रोजेक्ट प्लानिंग और प्राइसिंग रणनीतियों में मदद मिलती है.” 

पिछले एक साल में रेपो रेट का सफर

 1. फरवरी 2025: 6.50 प्रतिशत (यथावत)
 2. अप्रैल 2025: 6.25 प्रतिशत (0.25 प्रतिशत कटौती)
 3. जून 2025: 6.00 प्रतिशत (0.25 प्रतिशत कटौती)
 4. अगस्त 2025: 5.75 प्रतिशत (0.25 प्रतिशत कटौती)
 5. अक्टूबर 2025: 5.50 प्रतिशत (0.25 प्रतिशत कटौती)
 6. दिसंबर 2025: 5.25 प्रतिशत (0.25 प्रतिशत कटौती)
 7. फरवरी 2026: 5.25 प्रतिशत (स्थिर)

रेपो रेट स्थिर रहने से रियल एस्टेट को क्या लाभ

1. होम लोन की ब्याज दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं
2. एंड यूजर खरीदारों का भरोसा मजबूत
3. मिडिल क्लास और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत
4. डेवलपर्स की फाइनेंशियल प्लानिंग होगी आसान
5. नई आवासीय और कमर्शियल परियोजनाओं को गति
6. कंस्ट्रक्शन और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों को समर्थन

 


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