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FY26 में 7.3% GDP ग्रोथ से बीमा सेक्टर को मिलेगा बूस्ट, डिमांड बढ़ने की उम्मीद : मूडीज
मूडीज का आकलन बताता है कि FY26 में मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती आय, डिजिटल विस्तार और सरकारी सुधार मिलकर भारतीय बीमा सेक्टर के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार बीमा उद्योग के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है. तेज GDP ग्रोथ से लोगों की आमदनी बढ़ेगी, जिससे बीमा उत्पादों की मांग, प्रीमियम कलेक्शन और सेक्टर की मुनाफेबिलिटी में सुधार की उम्मीद जताई गई है.
FY26 में 7.3% GDP ग्रोथ का अनुमान
मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में भारत की GDP ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रह सकती है, जो FY25 में 6.5 प्रतिशत थी. एजेंसी का कहना है कि इस मजबूत आर्थिक वृद्धि का सीधा असर लोगों की क्रय शक्ति पर पड़ेगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान प्रति व्यक्ति आय सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 11,176 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
बीमा प्रीमियम में दिख रही तेज रफ्तार
मूडीज के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच बीमा उद्योग का कुल प्रीमियम 17 प्रतिशत बढ़कर ₹10.9 लाख करोड़ तक पहुंच गया. इस अवधि में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लाइफ इंश्योरेंस के नए कारोबार में 20 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला. यह ग्रोथ पिछले वित्त वर्ष FY25 से कहीं ज्यादा तेज है, जब कुल प्रीमियम में केवल 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.
कमजोर मुनाफेबिलिटी में सुधार की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत आर्थिक माहौल, बढ़ती आमदनी और प्रीमियम कलेक्शन में तेजी से बीमा सेक्टर की फिलहाल कमजोर प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार हो सकता है. मूडीज का मानना है कि आने वाले समय में बीमा कंपनियों की कमाई और मार्जिन बेहतर हो सकते हैं.
डिजिटलाइजेशन और जागरूकता से बढ़ी मांग
मूडीज ने बीमा प्रीमियम में तेजी के पीछे डिजिटलाइजेशन और जोखिम के प्रति बढ़ती जागरूकता को अहम वजह बताया है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बीमा उत्पादों की पहुंच आसान हुई है, जिससे नए ग्राहक जुड़ रहे हैं. यह सरकार के ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ लक्ष्य के अनुरूप भी है.
सरकारी सुधार और FDI से मिलेगा सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सरकारी बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने पर भी ध्यान दे रही है. LIC में पहले ही माइनॉरिटी स्टेक की बिक्री की जा चुकी है और कुछ सरकारी बीमा कंपनियों के रीकैपिटलाइजेशन पर विचार किया जा रहा है. भविष्य में विलय या निजीकरण की संभावना से भी इन कंपनियों को मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा, बीमा क्षेत्र में FDI सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने से कंपनियों को अतिरिक्त पूंजी और ग्रोथ का मौका मिलेगा.
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