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Wipro के बाद अब इस दिग्गज IT कंपनी ने फ्रेशर्स को थमाई Pink Slip
छंटनी का सिलसिला जारी है. विप्रो के बाद अब इंफोसिस ने बड़े पैमाने पर फ्रेशर्स को नौकरी से निकाल दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
विप्रो (Wipro) के बाद अब इंफोसिस (Infosys) ने भी फ्रेशर्स पर गाज गिराई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंफोसिस ने इंटरनल फ्रेशर असेसमेंट (FA) टेस्ट में फेल होने के वाले सैकड़ों फ्रेशर एम्प्लॉइज को कंपनी से बाहर कर दिया है. कंपनी ने कई राउंड में कर्मचारियों की छंटनी की है, जिसमें कुल 600 फ्रेशर्स को नौकरी से बाहर किया गया है. इससे पहले, विप्रो ने इंटरनल टेस्ट में खराब प्रदर्शन के चलते 452 फ्रेशर्स को नौकरी से निकाल दिया था. कंपनी की तरफ से कहा गया था कि ट्रेनिंग के बाद भी बार-बार टेस्ट में खराब प्रदर्शन के चलते उसे कर्मचारियों को टर्मिनेट करना पड़ा.
केवल 60 ने पास किया टेस्ट
मीडिया रिपोर्ट्स में छंटनी की जद में आए इंफोसिस के कर्मचारी के हवाले से बताया गया है कि उसने पिछले साल अगस्त में Infosys में काम करना शुरू किया था और उसे SAP ABAP स्ट्रीम के लिए ट्रेनिंग दी गई थी. उसकी टीम के 150 में से केवल 60 लोगों ने FA एग्जाम पास किया था, बाकियों को 2 हफ्ते पहले टर्मिनेट कर दिया गया था. पिछले बैच (जुलाई 2022 में ऑनबोर्ड किए गए फ्रेशर्स) के 150 फ्रेशर्स में से टेस्ट में फेल होने के बाद लगभग 85 फ्रेशर्स को भी नौकरी से बाहर किया गया था.
लगातार गिर रही गाज
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इंफोसिस ने इंटरनल टेस्ट में फेल होने पर 600 एम्प्लॉइज को नौकरी से निकाल दिया गया है. दो हफ्ते पहले, FA टेस्ट में फेल होने पर 208 फ्रेशर्स को निकाल दिया गया था. पिछले कुछ महीनों में कुल मिलाकर लगभग 600 फ्रेशर्स को FA टेस्ट में फेल होने के बाद नौकरी से निकाला गया है. हालांकि, कंपनी की तरफ से अब तक इस बारे में कोई बयान नहीं आया है.
'उन्हें' क्यों नहीं निकाला?
निकाले गए कर्मचारियों का कहना है कि जुलाई 2022 से पहले कंपनी में शामिल होने वाले नए लोगों को इंटरनल टेस्ट में फेल होने के बाद भी टर्मिनेट नहीं किया गया था. हालांकि, कंपनी के एक प्रतिनिधि का दावा है कि इंटरनल टेस्ट में फेल होने वाले कर्मचारियों को हमेशा टर्मिनेट किया गया है. गौरतलब है कि पिछले साल से शुरू हुआ बड़े पैमाने पर छंटनी का सिलसिला नए साल यानी 2023 में भी जारी है. बड़ी से लेकर छोटी कंपनियां तक अपने करी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं.
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