होम / बिजनेस / Akshata Murty की झोली में गिरे 138 करोड़ रुपए, बैठे-बैठे ही हो गई कमाई! 

Akshata Murty की झोली में गिरे 138 करोड़ रुपए, बैठे-बैठे ही हो गई कमाई! 

अक्षता मूर्ति के पास इंफोसिस के शेयर हैं. कंपनी ने हाल ही में अपने निवेशकों को डिविडेंड देने की बात कही है, इससे अक्षता को भी बड़ा फायदा होने वाला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) के संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति (Akshata Murty) की दौलत को पंख लग गए हैं. इस साल उनकी नेटवर्थ में कम से कम 138 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है और उसकी वजह है इंफोसिस का एक फैसला. दरअसल,  चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों से उत्साहित इंफोसिस ने डिविडेंड देने का निर्णय लिया है. कंपनी एक शेयर पर 18 रुपए का डिविडेंड देगी. ऐसे में जिसके पास इंफोसिस के शेयर बड़ी संख्या में हैं उनकी बैठे-बैठे तगड़ी कमाई होने वाली है और अक्षता मूर्ति में उन्हीं में से एक हैं.

इस तरह हो रही है कमाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्षता मूर्ति के पास 3,89,57,096 शेयर हैं. वह इंफोसिस के प्रमोटरों में भी शामिल हैं. अक्षता की कंपनी में मौजूदा हिस्सेदारी 1.05 प्रतिशत है. कंपनी के डिविडेंड के फैसले से अक्षता मूर्ति को करीब 70 करोड़ रुपए का फायदा होगा. कंपनी ने इससे पहले अप्रैल तिमाही के नतीजों के बाद भी डिविडेंड की घोषणा की थी. उस समय 17.50 रुपए का अंतरिम डिविडेंड दिया गया था. जिसके चलते अक्षता को 68 रुपए का फायदा हुआ था. इस हिसाब से देखें तो चालू वित्त वर्ष में उनकी नेटवर्थ में 138 करोड़ रुपए का इजाफा हो जाएगा. यहां ये भी जानना जरूरी है कि अक्षता को चालू वित्त वर्ष के दूसरे डिविडेंड का लाभ तभी मिलेगा, जब वह अपने शेयरों को 25 अक्टूबर तक होल्ड करके रखेंगी.

कंपनी पर लगने वाला है ताला
अक्षता मूर्ति की दौलत में भले ही बड़ा इजाफा हुआ हो, लेकिन उनकी कंपनी 'कैटामरान वेंचर्स यूके लिमिटेड' (Catamaran Ventures UK Ltd) पर ताला लगने जा रहा है. हाल ही में खबर आई थी कि अक्षता की इन्वेस्टमेंट कंपनी बंद होने वाली है. 'कैटामरान वेंचर्स यूके लिमिटेड' को अक्षता ने 2013 में शुरू किया था. उस समय कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए ऋषि भी अक्षता की मदद करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने कंपनी के निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया. अब ऋषि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री हैं, तो उनसे 'कैटामरान वेंचर्स' पर ध्यान देने की उम्मीद बेमानी है. हालांकि, कंपनी के बंद होने का ये कारण नहीं है.

भारी पड़े गलत फैसले   
कैटामरान वेंचर्स यूके लिमिटेड Infosys में अक्षता के शेयरों से हासिल राशि के एक निवेश साधन के तौर पर काम करती रही है. 2015 में ऋषि सुनक के निदेशक पद से इस्तीफा देने के बाद से अक्षता कंपनी की एकमात्र डायरेक्टर हैं. पिछले साल कंपनी के इन्वेस्टमेंट का मूल्य लगभग 38 लाख पाउंड रहा, जो 2021 के 35 लाख पाउंड से अधिक है. जबकि अक्षता मूर्ति का बकाया 46 लाख पाउंड से अधिक था. अब सवाल ये उठता है कि आखिर 'कैटामरान वेंचर्स यूके लिमिटेड' को बंद करने की नौबत क्यों आई? दरअसल, इसकी वजह है गलत कंपनियों में निवेश. कैटामरान वेंचर्स ने जिन वेंचर्स में निवेश किया, उनका रिटर्न बहुत अच्छा नहीं रहा. उदाहरण के तौर पर कैटामरान के निवेश वाले एजुकेशन स्टार्टअप 'मिसेज वर्डस्मिथ (Mrs Wordsmith) ब्रिटिश सरकार की Future Fund नामक महामारी सहायता योजना से 6.5 लाख पाउंड हासिल करने के 6 महीने के भीतर ही बंद हो गया. इसके अलावा, कैटामरान के निवेश वाली फर्नीचर कंपनी न्यू क्राफ्ट्समैन भी नवंबर-22 में बंद हो गई.

विवादों में घिरी रही कंपनी
अक्षता की कंपनी ने एजुकेशन टेक्नोलॉजी बिजनेस से जुड़ी फर्म स्टडी हॉल में भी पैसा लगाया था. इस फर्म को पिछले साल सरकारी संस्था इनोवेट यूके से 3.50 लाख पाउंड का अनुदान भी मिला, लेकिन विपक्षी दल लेबर पार्टी ने इस पर सवाल उठा दिए. अक्षता और उनकी कंपनी की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब बच्चों की देखभाल से जुड़ी संस्था Koru Kids में अक्षता के निवेश और इसके सरकार की योजना से लाभान्वित होने की बात सामने आई. विपक्ष ने इस मुद्दे पर जमकर बवाल काटा, जिसका असर कंपनी की छवि पर भी पड़ा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि निवेश का बेहतर रिटर्न मिला होता, तो 'कैटामरान वेंचर्स यूके लिमिटेड' को बंद करने की नौबत नहीं आती.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

लौह अयस्क होगा महंगा, स्क्रैप बनेगा स्टील इंडस्ट्री का सबसे बड़ा कच्चा माल: डॉ. अशोक पांडा

सेल के सीएमडी डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि स्टील किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसका प्रत्यक्ष योगदान भले ही 7-8 प्रतिशत के आसपास हो, लेकिन यह पूरे औद्योगिक विकास को गति देता है.

8 hours ago

35 अरब डॉलर के माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो पर संकट, कमजोर मानसून बढ़ा सकता है डिफॉल्ट

ग्रामीण आय पर दबाव से माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की रिकवरी को झटका लगने की आशंका

11 hours ago

सेबी का बड़ा फैसला: अब रुपये में होगी FPI फीस की पेमेंट, MF को भी मिली इंट्रा-डे उधारी की छूट

विदेशी निवेशकों के लिए शुल्क भुगतान की प्रक्रिया होगी आसान, म्युचुअल फंड सेटलमेंट में बढ़ेगी लिक्विडिटी

11 hours ago

भारत के ऑटो कंपोनेंट उद्योग ने भरी रफ्तार, FY26 में कारोबार 12.7% बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

एसोसिएशन का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी उद्योग 8% से 10% की दर से बढ़ सकता है. इसके पीछे घरेलू बाजार में मजबूत मांग और निर्यात में बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया गया है.

14 hours ago

भारत में स्टील की मांग ने पकड़ी रफ्तार, Q1 में 8.3% बढ़ी खपत; आयात में 49% का उछाल

बुनियादी ढांचा और ऑटो सेक्टर की मजबूत मांग से बढ़ी स्टील की खपत, चीन समेत तीन देशों से आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू

14 hours ago


बड़ी खबरें

लौह अयस्क होगा महंगा, स्क्रैप बनेगा स्टील इंडस्ट्री का सबसे बड़ा कच्चा माल: डॉ. अशोक पांडा

सेल के सीएमडी डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि स्टील किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसका प्रत्यक्ष योगदान भले ही 7-8 प्रतिशत के आसपास हो, लेकिन यह पूरे औद्योगिक विकास को गति देता है.

8 hours ago

सेबी का बड़ा फैसला: अब रुपये में होगी FPI फीस की पेमेंट, MF को भी मिली इंट्रा-डे उधारी की छूट

विदेशी निवेशकों के लिए शुल्क भुगतान की प्रक्रिया होगी आसान, म्युचुअल फंड सेटलमेंट में बढ़ेगी लिक्विडिटी

11 hours ago

शनि वक्री 2026: रणनीतिक आत्ममंथन जो अटूट कारोबारी नींव तैयार करता है

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं, करियर से लेकर रिश्तों तक, शनि वक्री लोगों को त्वरित परिणामों के पीछे भागने के बजाय दीर्घकालिक फैसलों की समीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है.

10 hours ago

35 अरब डॉलर के माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो पर संकट, कमजोर मानसून बढ़ा सकता है डिफॉल्ट

ग्रामीण आय पर दबाव से माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की रिकवरी को झटका लगने की आशंका

11 hours ago

भारत में स्टील की मांग ने पकड़ी रफ्तार, Q1 में 8.3% बढ़ी खपत; आयात में 49% का उछाल

बुनियादी ढांचा और ऑटो सेक्टर की मजबूत मांग से बढ़ी स्टील की खपत, चीन समेत तीन देशों से आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू

14 hours ago