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महंगाई फिर बढ़ाएगी टेंशन! अक्टूबर-नवंबर में 6% के पार जा सकती है खुदरा महंगाई

SBI रिसर्च के मुताबिक अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.7% हो सकती है. बेहतर मानसून और खरीफ फसलों की मजबूत बुवाई से साल के अंत में खाद्य महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत में खुदरा महंगाई आने वाले महीनों में फिर बढ़ सकती है और अक्टूबर-नवंबर में यह 6 फीसदी के स्तर को पार कर सकती है. हालांकि, इसके बाद महंगाई में नरमी आने की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में यह करीब 5 फीसदी रह सकती है. भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में 4.45 फीसदी रही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.7 फीसदी हो सकती है.

अक्टूबर-नवंबर में महंगाई बढ़ने का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर खाद्य कीमतों का दबाव बढ़ सकता है. इसके चलते अक्टूबर और नवंबर में महंगाई 6 फीसदी के पार जा सकती है. हालांकि, साल के आगे बढ़ने के साथ खाद्य आपूर्ति बेहतर होने से कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है. एसबीआई रिसर्च ने कहा कि मानसून की स्थिति में सुधार और खरीफ फसलों की मजबूत बुवाई आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है.

बारिश में हुआ सुधार

जून में बारिश की कमी करीब 40 फीसदी थी, जो अब घटकर लगभग 13 फीसदी रह गई है. जुलाई में बारिश सामान्य से अधिक रही, जबकि अगस्त में अब तक मानसून सामान्य रहा है. खरीफ फसलों के तहत बोया गया क्षेत्र पिछले मौसम की तुलना में करीब 2 फीसदी कम है. इसके बावजूद कुछ प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में सामान्य से कम बारिश के बीच भी बुवाई में अपेक्षाकृत मजबूती बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह राज्यों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार का संकेत देता है.

ऐतिहासिक रुझानों से भी संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में महंगाई मौजूदा अनुमानों से कम रह सकती है. साल आगे बढ़ने के साथ खाद्य आपूर्ति मजबूत होने से उपभोक्ता कीमतों पर बढ़ता दबाव कम होने की उम्मीद है.

महंगाई पर आरबीआई की नजर

महंगाई का रुख भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि नीतिगत दरों में बदलाव को लेकर कोई नया फैसला लेने से पहले महंगाई की दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता जरूरी होगी.

हाल की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के विवरण के मुताबिक, मल्होत्रा ने कहा कि पहले की नरम महंगाई दरों के बाद अब कीमतों में सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में मौद्रिक नीति की आगे की दिशा तय करने से पहले और आंकड़ों का इंतजार करना उचित होगा. एसबीआई रिसर्च ने केंद्रीय बैंक के संचार को लेकर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में मौद्रिक नीति के वास्तविक कदम आगे के संकेतों की तुलना में बाजार के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इनमें परिवर्तनीय दर वाली रिवर्स रेपो परिचालन और विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा जुटाने की व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं.

वैश्विक बाजारों से भी जोखिम

रिपोर्ट में अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में हो रहे बदलावों को भी वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है. अमेरिकी सरकार की ओर से लंबी अवधि के सरकारी कर्ज की पुनर्खरीद बढ़ाने जैसे कदमों से अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि की प्रतिफल दरों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है और इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है.

बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड सहित लंबी अवधि की प्रतिफल दरों में गिरावट आई है. यह गिरावट अमेरिकी सरकार की छोटी और लंबी अवधि की परिपक्वता वाले कर्ज की आपूर्ति में संभावित बदलाव की उम्मीदों के बीच आई है.

मानसून और खाद्य आपूर्ति रहेगी अहम

भारत में आने वाले महीनों में महंगाई का रुख मुख्य रूप से खाद्य आपूर्ति और मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा. बेहतर बारिश और खरीफ उत्पादन में मजबूती से खाद्य कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. वहीं, आरबीआई की मौद्रिक नीति की दिशा भी इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में महंगाई किस तरह आगे बढ़ती है. इसलिए अक्टूबर-नवंबर के दौरान महंगाई में संभावित उछाल के बाद चौथी तिमाही में इसमें आने वाली नरमी बाजार और केंद्रीय बैंक दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगी.
 


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