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भारत में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग लीजिंग में 15% की बढ़ोतरी, छह महीने में 36.8 मिलियन वर्गफुट पर पहुंची
विनिर्माण और थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स की बढ़ती मांग से बाजार को मिला सहारा, मुंबई सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा; दूसरी छमाही में भी मजबूत मांग की उम्मीद
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. नाइट फ्रैंक इंडिया की ‘इंडिया वेयरहाउसिंग मार्केट रिपोर्ट-एच1 2026’ के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में देश के आठ प्रमुख बाजारों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग लीजिंग सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़कर 36.8 मिलियन वर्गफुट हो गई. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, ऊंची माल ढुलाई लागत, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद इस क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया है.
विनिर्माण से सबसे ज्यादा मांग
विनिर्माण क्षेत्र औद्योगिक और वेयरहाउसिंग परिसंपत्तियों की मांग का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. कुल लीजिंग में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 46 फीसदी रही और इसने 17 मिलियन वर्गफुट क्षेत्र दर्ज किया. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 17 फीसदी अधिक है.
इसके बाद थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स यानी 3पीएल क्षेत्र का स्थान रहा. इस क्षेत्र ने 11.1 मिलियन वर्गफुट की लीजिंग की, जो कुल लेनदेन का 30 फीसदी है. 3पीएल क्षेत्र में सालाना आधार पर 27 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
मुंबई सबसे आगे
मुंबई 10.7 मिलियन वर्गफुट के साथ औद्योगिक और वेयरहाउसिंग लीजिंग का सबसे बड़ा बाजार रहा. यह शहर के लिए अब तक की सबसे अधिक छमाही लीजिंग है और पिछले साल की समान अवधि से 44 फीसदी अधिक है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 5.9 मिलियन वर्गफुट लीजिंग हुई, जो 17 फीसदी अधिक है. वहीं बेंगलूरु में 4 मिलियन वर्गफुट लीजिंग दर्ज की गई, जिसमें 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
कोलकाता ने प्रमुख बाजारों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की. यहां लीजिंग 69 फीसदी बढ़कर 2.4 मिलियन वर्गफुट हो गई. अहमदाबाद में यह 15 फीसदी बढ़कर 4.1 मिलियन वर्गफुट रही. इसके विपरीत पुणे, चेन्नई और हैदराबाद में लीजिंग गतिविधियों में क्रमशः 12 फीसदी, 27 फीसदी और 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
समर्पित माल ढुलाई गलियारे से मिला फायदा
पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के पूरा होने से भी इस क्षेत्र को फायदा मिला है. इससे विनिर्माण केंद्रों, बंदरगाहों और उपभोक्ता केंद्रों के बीच माल की आवाजाही बेहतर हुई है. नाइट फ्रैंक के मुताबिक, बेहतर संपर्क व्यवस्था ने विनिर्माताओं और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद की है. इससे भारत उत्पादन और वितरण केंद्र के रूप में और मजबूत हुआ है.
नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार मजबूत बना हुआ है. विनिर्माण गतिविधियों, बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत घरेलू मांग से कंपनियों का भरोसा कायम है.
सभी प्रमुख बाजारों में किराये बढ़े
रिपोर्ट के मुताबिक, आठों प्रमुख बाजारों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग परिसंपत्तियों के किराये में बढ़ोतरी हुई. चेन्नई में किराये में सबसे ज्यादा 7 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई और औसत किराया 25.7 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति माह पहुंच गया. पुणे 28.7 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति माह के औसत किराये के साथ देश का सबसे महंगा वेयरहाउसिंग बाजार रहा.
मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किराये में 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं बेंगलूरु और अहमदाबाद में किराये 6 फीसदी बढ़े. नाइट फ्रैंक ने इसका कारण मजबूत मांग के साथ जमीन खरीद, निर्माण और वित्तपोषण की लागत में लगातार वृद्धि को बताया.
कुल वेयरहाउसिंग स्टॉक 584.9 मिलियन वर्गफुट
2026 की पहली छमाही में भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग स्टॉक सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़कर 584.9 मिलियन वर्गफुट हो गया. वहीं रिक्तता दर पिछले साल की समान अवधि के 12.1 फीसदी से घटकर 11.4 फीसदी रह गई. इससे संकेत मिलता है कि नई आपूर्ति के साथ मांग भी मजबूत बनी हुई है.
देश के कुल औद्योगिक और वेयरहाउसिंग स्टॉक में उच्च गुणवत्ता वाली ‘ग्रेड ए’ सुविधाओं की हिस्सेदारी 47 फीसदी रही. यह बेहतर बुनियादी ढांचे वाली परिसंपत्तियों के प्रति कंपनियों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है. कुल राष्ट्रीय स्टॉक में मुंबई की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 33 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र 20 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
दूसरी छमाही में भी मजबूत मांग की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी छमाही में भी औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है. विनिर्माण क्षमता के विस्तार, लॉजिस्टिक्स सेवाओं की बढ़ती आउटसोर्सिंग, नीतिगत समर्थन और बेहतर बहु-माध्यम परिवहन बुनियादी ढांचे से बाजार को सहारा मिलने की संभावना है. हालांकि, नई और उच्च गुणवत्ता वाली आपूर्ति तैयार करने के सामने जमीन की उपलब्धता, बिखरे हुए भू-स्वामित्व, नियामकीय जटिलताएं और परियोजनाओं की मंजूरी में लगने वाला लंबा समय बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
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