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IndiGrid का बड़ा कदम: देश के इन दो राज्यों में ₹2,108 करोड़ का निवेश
सौर ऊर्जा और ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश न केवल उसकी दीर्घकालिक योजनाओं को बल देगा, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में भी योगदान करेगा।.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट कंपनी इंडिग्रिड (IndiGrid) ने शनिवार को दो अहम प्रोजेक्ट्स खरीदने की घोषणा की है. कंपनी ने राजस्थान में सोलर एनर्जी और कर्नाटक में बिजली ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए कुल 2,108 करोड़ रुपये की डील फाइनल की है. समायोजन के बाद इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 2,175 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यह डील इंडिग्रिड को ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
राजस्थान में 300 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट
पहला प्रोजेक्ट रिन्यू सोलर आयन प्राइवेट लिमिटेड (RSAPL) से जुड़ा है, जो राजस्थान के बाड़मेर में स्थित है. यहां 300 मेगावाट क्षमता वाला सोलर प्लांट मार्च 2024 से ऑपरेशनल है. इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसके पास सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ 25 साल का फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें 2.37 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची जाएगी.
बाड़मेर क्षेत्र की अनुकूल धूप और इंडिग्रिड के पहले से मौजूद प्रोजेक्ट की नजदीकी, संचालन और रखरखाव को और सुविधाजनक बनाती है. यह प्लांट रिन्यू सोलर पावर की 100% सब्सिडियरी है.
कर्नाटक में 276 किमी की ट्रांसमिशन लाइन
दूसरा प्रोजेक्ट कोप्पल नरेंद्र ट्रांसमिशन लिमिटेड (KNTL) है, जो कर्नाटक में स्थित एक बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट है. यह अक्टूबर 2023 से चालू है और इसमें 276 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन के साथ-साथ 2,500 एमवीए की ट्रांसफॉर्मर क्षमता मौजूद है.
यह प्रोजेक्ट पहले रिन्यू सोलर पावर (51%) और नॉरफंड व केएलपी (49%) की संयुक्त स्वामित्व वाली इकाई के पास था. इस क्षेत्र में ग्रिड विस्तार की गति को देखते हुए इंडिग्रिड को भविष्य में और निवेश के अवसर मिलने की संभावना है.
फंडिंग प्लान और इंडिग्रिड की रणनीति
इंडिग्रिड के प्रबंध निदेशक हर्ष शाह ने कहा कि ये निवेश हमारे दीर्घकालिक विजन का हिस्सा हैं, जिसमें हम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं. कंपनी इस डील को पूरा करने के लिए अपने फंड, इंटरनल रिसोर्स और कर्ज का उपयोग करेगी. डील के बाद कंपनी का ऋण-एसेट अनुपात 62% रहेगा, जो फाइनेंशियल लचीलापन बनाए रखने में मदद करेगा और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए जगह छोड़ेगा.
मंजूरी प्रक्रिया और अगला कदम
दोनों प्रोजेक्ट्स की डील को अब नियामक और अनुबंधात्मक मंजूरियों की आवश्यकता है. डील के पूरी होने पर इंडिग्रिड को इन दोनों कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण मिलेगा. इन अधिग्रहणों के बाद इंडिग्रिड की स्थिति भारत के रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन सेक्टर में और अधिक मजबूत होगी और यह कंपनी को ऊर्जा क्षेत्र में एक सिस्टमेटिक और टिकाऊ निवेशक के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी.
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