होम / बिजनेस / भारत का REIT बाजार छह गुना बढ़कर 1.7 लाख करोड़ रुपये के पार, नए लिस्टिंग और नियमों से मिला बूस्ट
भारत का REIT बाजार छह गुना बढ़कर 1.7 लाख करोड़ रुपये के पार, नए लिस्टिंग और नियमों से मिला बूस्ट
वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) के स्वामित्व वाली व्यावसायिक रियल एस्टेट संपत्तियों को मोनेटाइज करने के लिए विशेष REIT संरचना बनाने का प्रस्ताव दिया है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत का सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) बाजार पिछले छह वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में इसका मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह जानकारी रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म CBRE की एक नई रिपोर्ट में दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020 में जब भारत का पहला REIT शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ था, तब इस बाजार का कुल मार्केट कैप करीब 27,100 करोड़ रुपये था. तब से नए REIT लिस्टिंग और मौजूदा ट्रस्ट के यूनिट प्राइस में लगातार बढ़ोतरी के कारण इस सेक्टर में तेज़ विस्तार देखने को मिला है.
यूनिट प्राइस में मजबूत बढ़त और नई लिस्टिंग से मिला सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारत में कुल पांच सूचीबद्ध REIT मौजूद हैं. इनमें सबसे नया नाम Knowledge Realty Trust REIT है, जो अगस्त 2025 में शेयर बाजार में लिस्ट हुआ था. रिपोर्ट में बताया गया कि बाकी चार सूचीबद्ध REIT ने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही से वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के बीच यूनिट कीमतों में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की. इससे आय देने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिख रहा है.
CBRE में भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के चेयरमैन और सीईओ अंशुमान मैगज़ीन के मुताबिक, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद REIT बाजार ने निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न दिया है. उनका कहना है कि ऐसे निवेश साधनों की लिस्टिंग निवेशकों को आसान एग्जिट विकल्प देती है और इससे संस्थागत निवेशकों की भागीदारी तथा बाजार में तरलता बढ़ सकती है.
नियामकीय बदलाव से तेज़ हो सकती है वृद्धि
रिपोर्ट में तीन प्रमुख नीतिगत बदलावों का उल्लेख किया गया है, जो भारत में REIT बाजार के विस्तार को और गति दे सकते हैं. पहला बड़ा कदम यह है कि जनवरी 2026 से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने REIT को इक्विटी से जुड़े निवेश साधन के रूप में वर्गीकृत किया है. इससे म्यूचुअल फंड और विशेष निवेश फंडों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे बाजार में तरलता मजबूत हो सकती है.
इसके अलावा इस साल REIT को व्यापक इक्विटी सूचकांकों में शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे निष्क्रिय निवेश (Passive Investment) का प्रवाह बढ़ सकता है.
दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से आया है. इसके तहत वाणिज्यिक बैंकों को REIT को सीधे ऋण देने की अनुमति दी जा सकती है. इससे इन ट्रस्ट के लिए उधारी की लागत कम हो सकती है, क्योंकि अब तक वे मुख्य रूप से बॉन्ड बाजार पर निर्भर रहे हैं.
बजट में सार्वजनिक संपत्तियों को REIT के जरिए मोनेटाइज करने का प्रस्ताव
वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) के स्वामित्व वाली व्यावसायिक रियल एस्टेट संपत्तियों को मोनेटाइज करने के लिए विशेष REIT संरचना बनाने का प्रस्ताव दिया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उच्च गुणवत्ता वाली रियल एस्टेट संपत्तियों की नई पाइपलाइन तैयार हो सकती है और संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है.
छोटे और मध्यम REIT बन सकते हैं अगला बड़ा अवसर
CBRE रिसर्च के अनुसार छोटे और मध्यम आकार के REIT भारत में अगला बड़ा विकास इंजन बन सकते हैं. इस सेगमेंट का संभावित बाजार आकार 75 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है. यह अवसर करीब 50 करोड़ वर्ग फुट से अधिक कार्यालय, लॉजिस्टिक्स और रिटेल रियल एस्टेट संपत्तियों के कारण बन सकता है, जो REIT संरचना के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं.
निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है मजबूत
CBRE के एशिया-प्रशांत निवेशक सर्वे 2026 के मुताबिक भारत में कार्यालय रियल एस्टेट निवेशकों की सबसे पसंदीदा श्रेणी बनी हुई है. सर्वे में करीब 42 प्रतिशत घरेलू निवेशकों ने कार्यालय संपत्तियों में निवेश की इच्छा जताई है, जो भारतीय REIT का मुख्य आधार भी हैं. रिपोर्ट के अनुसार नियामकीय ढील, बाजार की बढ़ती परिपक्वता और संपत्तियों की बढ़ती उपलब्धता के चलते 2026 भारत के REIT बाजार के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है.
टैग्स