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AI में भारत की रफ्तार तेज, 2026 में अब तक 626 मिलियन डॉलर की फंडिंग : रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सॉवरेन AI मॉडल न तो अलगाववादी है और न ही केवल उपभोग-आधारित. यह बड़े पैमाने पर डिजिटल तैनाती, चरणबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित हाइब्रिड मॉडल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है. 2026 में अब तक (YTD) भारतीय AI कंपनियों ने 626 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा ली है, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 856 मिलियन डॉलर रहा था. यह खुलासा ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Tracxn की ताजा रिपोर्ट ‘India and the Sovereign AI Shift’ में किया गया है, जो भारत की संप्रभु (Sovereign) AI रणनीति और निवेश रुझानों का विश्लेषण करती है.
भारत में 1,700 से अधिक AI-नेटिव कंपनियां
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक भारत में 1,700 से अधिक AI-नेटिव कंपनियां सक्रिय हैं, जिन्होंने कुल मिलाकर लगभग 5.5 बिलियन डॉलर की इक्विटी फंडिंग जुटाई है. यह इकोसिस्टम एंटरप्राइज AI, सेक्टर-विशिष्ट एप्लिकेशन, कंज्यूमर प्लेटफॉर्म और इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर तक फैला हुआ है. यह वृद्धि केवल जेनरेटिव AI की अस्थायी लहर का परिणाम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक उद्यमशील विस्तार को दर्शाती है.
‘सॉवरेन AI’ की ओर बढ़ता भारत
बहुध्रुवीय वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में उन्नत तकनीकों पर नियंत्रण आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख आधार बन गया है. AI अब कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, डेटा गवर्नेंस और क्लाउड इकोसिस्टम के संगम पर खड़ा है. ‘सॉवरेन AI’ का अर्थ है कि कोई देश अपनी नियामकीय और आर्थिक संरचना के भीतर AI सिस्टम विकसित, संचालित और तैनात करने में सक्षम हो, जबकि वह वैश्विक इकोसिस्टम से जुड़ा भी रहे.
IndiaAI मिशन से बुनियादी मॉडल विकास को बढ़ावा
सरकार की 10,372 करोड़ रुपये की IndiaAI Mission योजना, घरेलू GPU उपलब्धता, सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन और डेटा सेंटर विस्तार जैसी पहलों से AI स्टैक के ऊपरी स्तरों में भारत की भागीदारी बढ़ी है. इस मिशन के तहत 12 कंपनियों को फाउंडेशनल और स्पेशलाइज्ड मॉडल विकसित करने के लिए संरचित GPU आवंटन मिला है. उदाहरण के तौर पर Sarvam AI को लगभग 99 करोड़ रुपये की कंप्यूट सब्सिडी के साथ 4,096 NVIDIA H100 GPUs आवंटित किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2.9 बिलियन से 105 बिलियन पैरामीटर तक के घरेलू AI मॉडल विकसित किए जा रहे हैं.
निवेश चक्र में संरचनात्मक बदलाव
AI फंडिंग 2022 में 1.1 बिलियन डॉलर के शिखर पर पहुंची थी. 2023-24 में वैश्विक वेंचर निवेश में सामान्यीकरण के कारण इसमें कमी आई, लेकिन 2025 में यह 856 मिलियन डॉलर तक फिर उभरी. 2026 में अब तक 626 मिलियन डॉलर की फंडिंग यह संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा कायम है.
इंफ्रास्ट्रक्चर-उन्मुख निवेश में भी तेजी देखी जा रही है. उदाहरण के लिए Neysa A ने लगभग 1.4 बिलियन डॉलर के एंटरप्राइज वैल्यूएशन पर 600 मिलियन डॉलर जुटाए, जो AI क्लाउड और GPU-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर में संस्थागत विश्वास को दर्शाता है.
वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर AI में कुल निवेश 473 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है. इसमें से लगभग 170 बिलियन डॉलर (करीब 36 प्रतिशत) निवेश प्रमुख कंपनियों जैसे OpenAI, Anthropic और xAI के पास केंद्रित है.
इसके विपरीत भारत का निवेश आधार अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन यह कुछ चुनिंदा कंपनियों में केंद्रित होने के बजाय व्यापक रूप से वितरित है.
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना ताकत
भारत की सॉवरेन AI रणनीति केवल निवेश तक सीमित नहीं है. देश के पास आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर, ओएनडीसी और भाषिनी जैसे बड़े पैमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं, जो पहचान, भुगतान, वाणिज्य और भाषा सेवाओं में संरचित डिजिटल इंटरैक्शन प्रदान करते हैं.
यह डिजिटल ढांचा AI को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए वास्तविक और बड़े पैमाने का आधार उपलब्ध कराता है.
हाइब्रिड मॉडल पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सॉवरेन AI मॉडल न तो अलगाववादी है और न ही केवल उपभोग-आधारित. यह बड़े पैमाने पर डिजिटल तैनाती, चरणबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित हाइब्रिड मॉडल है.
घरेलू प्रशिक्षण चक्र शुरू हो चुके हैं, कंप्यूट क्षमता बढ़ रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजी निवेश तेज हो रहा है. ऐसे में भारत वैश्विक AI परिदृश्य में एक मजबूत और संतुलित स्थिति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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