होम / बिजनेस / भारत की नई कंजम्प्शन इकॉनमी, खाने से हटकर मोबाइल, डिजिटल सेवाओं और यात्रा पर बढ़ा खर्च: रिपोर्ट
भारत की नई कंजम्प्शन इकॉनमी, खाने से हटकर मोबाइल, डिजिटल सेवाओं और यात्रा पर बढ़ा खर्च: रिपोर्ट
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट में एक नई उपभोक्ता तस्वीर सामने आई है, जिसमें अनाज पर खर्च घटा और डिजिटल लाइफस्टाइल पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत में लोगों के खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब परिवार सिर्फ खाने-पीने और जरूरी सामान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मोबाइल, ऑनलाइन मनोरंजन, यात्रा, प्रीमियम गैजेट्स और डिजिटल सेवाओं पर पहले से कहीं ज्यादा खर्च कर रहे हैं. कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट ‘द ग्रेट कंजम्प्शन शिफ्ट’ में भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं की तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की खपत कहानी अब पारंपरिक जरूरतों से आगे बढ़कर सुविधाओं, अनुभवों और डिजिटल लाइफस्टाइल की ओर मुड़ चुकी है.
खाने-पीने से घटा खर्च. डिजिटल सेवाओं पर बढ़ा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में कुल खर्च में खाने की हिस्सेदारी 1999-2000 के 59% से घटकर 2022-23 में 46% रह गई है. वहीं शहरी भारत में यह हिस्सा 48% से घटकर 39% पर आ गया. सबसे ज्यादा गिरावट अनाज और जरूरी खाद्य पदार्थों पर खर्च में दर्ज की गई है.
इसके उलट मोबाइल, डेटा सेवाएं, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, वाहन, किराया और शिक्षा पर लोगों का खर्च तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, लोग बुनियादी जरूरतों से आगे बढ़कर सुविधाओं और बेहतर अनुभवों पर अधिक पैसा खर्च करने लगते हैं.
ओटीटी, ऑनलाइन शॉपिंग और प्रीमियम गैजेट्स का बढ़ता बाजार
भारतीय उपभोक्ताओं के बजट में अब मोबाइल फोन, ऑनलाइन मनोरंजन प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट डिलीवरी सेवाएं और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की बड़ी हिस्सेदारी देखने को मिल रही है. पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी सदस्यता, ऑनलाइन खरीदारी, प्रीमियम स्मार्टफोन और डिजिटल ऑडियो डिवाइसेज के बाजार में तेज विस्तार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल सेवाएं अब शहरी ही नहीं, ग्रामीण भारत के उपभोक्ताओं की जीवनशैली का भी अहम हिस्सा बनती जा रही हैं.
‘अनुभवों’ पर बढ़ रहा भारतीयों का खर्च
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब लोग केवल सामान खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुभवों पर भी खुलकर खर्च कर रहे हैं. कॉन्सर्ट, लाइव शो, यात्रा और आउटडोर गतिविधियों पर खर्च में तेजी से उछाल आया है. भारत में टिकट आधारित लाइव कार्यक्रमों की संख्या 2022 के 19 हजार से बढ़कर 2025 में 34 हजार तक पहुंच गई. बड़े अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रमों के लिए करीब 1.3 करोड़ लोगों ने टिकट हासिल करने की कोशिश की, जबकि टिकट सिर्फ 1.5 लाख लोगों को ही मिल सके.
विदेश यात्राओं पर भारतीयों का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में फरवरी तक भारतीयों ने विदेश यात्रा पर लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये खर्च किए.
प्रीमियम स्मार्टफोन की बढ़ती मांग
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट में एप्पल और हिंदुस्तान यूनिलीवर के कारोबार की तुलना भी की गई है. रिपोर्ट के अनुसार एप्पल इंडिया का कारोबार पिछले पांच वर्षों में 6.2 गुना बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का अनुमानित राजस्व हिंदुस्तान यूनिलीवर से लगभग दोगुना हो सकता है.
रिपोर्ट बताती है कि देश में कुल मोबाइल बिक्री लगभग स्थिर बनी हुई है, लेकिन प्रीमियम स्मार्टफोन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2020 में कुल मोबाइल बिक्री में प्रीमियम फोन का हिस्सा 20% था, जो 2025 तक बढ़कर 26% हो गया. यह संकेत देता है कि देश का एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग अब महंगे और प्रीमियम उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है.
आय बढ़ रही, लेकिन सभी की नहीं
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि देश में आय बढ़ जरूर रही है, लेकिन उसका फायदा सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिल रहा. रिपोर्ट के अनुसार शहरी अमीर वर्ग की आय 18% की दर से बढ़ रही है, जबकि शहरी मध्यम और सामान्य वर्ग की आय वृद्धि करीब 6% के आसपास है.
ग्रामीण क्षेत्रों में भी संपन्न वर्ग की आय, मजदूर वर्ग की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट ने इस स्थिति को “एक देश, दो आर्थिक यात्राएं” बताया है. यानी खपत तो बढ़ रही है, लेकिन उसका लाभ सीमित वर्ग तक ज्यादा केंद्रित होता जा रहा है.
किराया, मोबाइल बिल और ईएमआई ने बढ़ाया दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में किराया अब परिवारों के बजट का बड़ा हिस्सा बन चुका है. शहरी परिवारों के कुल खर्च में किराए की हिस्सेदारी 1999-2000 के 4.5% से बढ़कर 2022-23 में 6.6% तक पहुंच गई है.
मोबाइल डेटा पर खर्च में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले आठ वर्षों में डेटा खर्च की वृद्धि ग्रामीण मजदूरी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही. इसके अलावा परिवारों पर कर्ज और ईएमआई का दबाव भी तेजी से बढ़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात वर्षों में पांच साल ऐसे रहे, जब ईएमआई का बोझ आय वृद्धि से अधिक तेजी से बढ़ा. इसका असर घरेलू बचत पर भी दिखाई दे रहा है और वित्तीय बचत लगातार दबाव में बनी हुई है.
शेयर बाजार और साइबर फ्रॉड में बढ़ा नुकसान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़ी संख्या में लोग डेरिवेटिव ट्रेडिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी में पैसा गंवा रहे हैं. सेबी के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 में 91% खुदरा निवेशकों को F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ.
सिर्फ FY25 में खुदरा निवेशकों का कुल नुकसान 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि FY22 से FY25 के बीच यह आंकड़ा 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
वहीं डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को 22,849 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
क्या संकेत देती है यह रिपोर्ट?
कोटक म्युचुअल फंड की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है. अब लोगों का खर्च खाने और जरूरी सामान से हटकर डेटा, मोबाइल, यात्रा, मनोरंजन और बेहतर अनुभवों की ओर शिफ्ट हो रहा है.
हालांकि इसके साथ किराया, ईएमआई और डिजिटल खर्च का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि देश में बढ़ती खपत और आय का बड़ा हिस्सा उच्च आय वर्ग के पास केंद्रित होता जा रहा है. यानी भारत में खर्च तो बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार और फायदा हर वर्ग तक बराबरी से नहीं पहुंच पा रहा.
टैग्स