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‘कृषि जागरण’ को कोर्ट से बड़ी राहत, जागरण प्रकाशन का मुकदमा खारिज, ₹10 लाख का जुर्माना भी लगा

कोर्ट ने 29 सितंबर 2020 को जारी निषेधाज्ञा आदेश को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को सार्वजनिक रूप से जो नुकसान और अपमान झेलना पड़ा, उसके मद्देनजर वादी कंपनी को ₹10 लाख की लागत प्रतिवादियों को चुकानी होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ‘जागरण’ ट्रेडमार्क विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा दायर मुकदमे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अदालत ने न केवल ‘कृषि जागरण’ को इस मामले में राहत दी, बल्कि वादी कंपनी पर ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने माना कि ‘कृषि जागरण’ वर्ष 1996 से इस नाम का वैध और पूर्व उपयोगकर्ता है.

साकेत कोर्ट ने रद्द किया पुराना निषेधाज्ञा आदेश

दक्षिण जिला, साकेत कोर्ट के जिला न्यायाधीश अरुल वर्मा ने 25 मई 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि वादी द्वारा दायर मुकदमा निराधार था और इससे प्रतिवादियों को अनावश्यक रूप से लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.

अदालत ने 29 सितंबर 2020 को जारी निषेधाज्ञा (Injunction) आदेश को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को सार्वजनिक रूप से जो नुकसान और अपमान झेलना पड़ा, उसके मद्देनजर वादी कंपनी को ₹10 लाख की लागत प्रतिवादियों को चुकानी होगी.

‘कृषि जागरण’ ने फैसले को बताया बड़ी नैतिक जीत

‘कृषि जागरण’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डॉमिनिक ने इस फैसले को सिर्फ कानूनी जीत नहीं बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशकों की सेवा की मान्यता बताया. उन्होंने कहा कि यह सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा. कई प्रयासों के बावजूद ‘कृषि जागरण’ ने हमेशा सच्चाई, पेशेवर ईमानदारी और किसानों के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी.

1996 से ‘कृषि जागरण’ नाम का इस्तेमाल

अदालत ने अपने फैसले में माना कि ‘कृषि जागरण’ लंबे समय से इस नाम का उपयोग कर रहा है और वह इस ट्रेडमार्क का पूर्व और वैध उपयोगकर्ता है. इसी आधार पर कोर्ट ने वादी कंपनी के दावों को खारिज कर दिया. यह मामला मीडिया और ट्रेडमार्क अधिकारों से जुड़े क्षेत्र में काफी चर्चित रहा, क्योंकि इसमें दो बड़े मीडिया ब्रांड आमने-सामने थे.

मीडिया और कृषि जगत का जताया आभार

एम.सी. डॉमिनिक ने अपने बयान में मीडिया जगत, उद्योग जगत और कृषि क्षेत्र से जुड़े उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कानूनी लड़ाई के दौरान ‘कृषि जागरण’ का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ‘कृषि जागरण’ आगे भी भारतीय कृषि और ग्रामीण भारत के लिए पहले से अधिक मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहेगा.

क्या था पूरा मामला

जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने ‘कृषि जागरण’ के खिलाफ ट्रेडमार्क और नाम उपयोग को लेकर अदालत में मामला दायर किया था. इस पर 2020 में कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की थी. हालांकि, अब अंतिम फैसले में अदालत ने वादी के सभी दावों को खारिज करते हुए प्रतिवादियों के पक्ष में फैसला सुनाया है.
 


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