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भारत की इनोवेशन ताकत मजबूत, FY25 में पेटेंट आवेदनों ने पहली बार पार किया 1 लाख का आंकड़ा
FY25 में पेटेंट और IPR फाइलिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारत अब सिर्फ उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि इनोवेशन और रिसर्च का मजबूत केंद्र बनता जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत तेजी से ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है. इसका ताजा उदाहरण वित्त वर्ष 2024-25 में देखने को मिला, जब देश में पेटेंट आवेदनों की संख्या पहली बार 1 लाख के पार पहुंच गई. घरेलू इनोवेटर्स की बढ़ती भागीदारी और नीतिगत सुधारों ने बौद्धिक संपदा अधिकार यानी IPR फाइलिंग को नई रफ्तार दी है.
FY25 में पेटेंट आवेदनों में बड़ी छलांग
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के IP ऑफिस में 1.1 लाख से अधिक पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए. यह संख्या FY24 में दर्ज 92,168 आवेदनों की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है. यह बढ़ोतरी भारत के मजबूत होते रिसर्च और डेवलपमेंट इकोसिस्टम को दर्शाती है.
घरेलू इनोवेटर्स की बढ़ती हिस्सेदारी
FY25 में दाखिल कुल पेटेंट आवेदनों में से करीब 62 प्रतिशत आवेदन घरेलू इनोवेटर्स की ओर से आए. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते इनोवेशन और स्थानीय स्तर पर हो रहे अनुसंधान की मजबूत तस्वीर पेश करता है.
IPR फाइलिंग में कुल मिलाकर 18 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त
कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क और GI के कार्यालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में कुल IPR फाइलिंग 6.3 लाख से बढ़कर 7.4 लाख हो गई. पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क और ज्योग्राफिकल इंडिकेशन सभी श्रेणियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई.
डिजाइन और ट्रेडमार्क में भी मजबूत ग्रोथ
डिजाइन आवेदनों की संख्या FY24 में 30,389 से बढ़कर FY25 में 43,005 हो गई, यानी 41.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त. ट्रेडमार्क आवेदन FY24 के 4.7 लाख से बढ़कर FY25 में करीब 5.5 लाख तक पहुंच गए, जो 16 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
कॉपीराइट और GI में बढ़ती दिलचस्पी
कॉपीराइट फाइलिंग FY25 में 36,726 से बढ़कर 44,095 हो गई. वहीं ज्योग्राफिकल इंडिकेशन यानी GI से जुड़े आवेदन 134 से बढ़कर 275 तक पहुंच गए. यह पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मक कार्यों को मिल रही बढ़ती पहचान को दर्शाता है.
नीतिगत सुधार और तकनीक बनी बढ़ोतरी की वजह
IP ऑफिस ने इस तेज़ बढ़ोतरी का श्रेय नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों को दिया है. पेटेंट नियम 2024 से प्रक्रियाएं आसान और तेज हुई हैं. इंडस्ट्रियल डिजाइन के लिए लोकार्नो समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण अपनाया गया है. साथ ही, AI आधारित टूल्स जैसे ट्रेडमार्क सर्च तकनीक और IP सारथी चैटबॉट ने जांच प्रक्रिया को ज्यादा सटीक और तेज बना दिया है.
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