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युवाओं के दम पर बदला भारत का हाउसिंग बाजार, 90% खरीद मिलेनियल्स और जेन Z के नाम

BASIC Home Loan की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत का हाउसिंग बाजार एक बड़े पीढ़ीगत और डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत के हाउसिंग बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. BASIC Home Loan (BASIC) की नई रिपोर्ट के मुताबिक मिलेनियल्स और जेन Z अब देश में 90–95% तक घरों की खरीद में योगदान दे रहे हैं. वहीं 40 वर्ष से कम आयु के करीब 72% उधारकर्ता होम लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पसंद कर रहे हैं. यह रुझान भारत के हाउसिंग सेक्टर में पीढ़ीगत और डिजिटल बदलाव का संकेत देता है.

‘How Bharat Finances Its Housing Dreams’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट को BASIC Home Loan ने तैयार किया है. सर्वे पार्टनर के रूप में Paytm और नॉलेज पार्टनर के रूप में CommsCredible जुड़े रहे. अध्ययन में भारत के 7,400 से अधिक मौजूदा और संभावित होमबायर्स की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं, जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की मजबूत भागीदारी रही.

डिजिटल होम लोन प्रक्रिया बनी मुख्यधारा

रिपोर्ट का प्रमुख निष्कर्ष यह है कि होम लोन की डिजिटल प्रक्रिया अब तेजी से मुख्यधारा में आ रही है. युवा उधारकर्ताओं के साथ-साथ 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग भी डिजिटल माध्यम अपना रहे हैं. कुल मिलाकर करीब 47% उधारकर्ता अब ऑनलाइन आवेदन करने में सहज हैं. IndiaStack जैसे डिजिटल टूल्स ने इस बदलाव को गति दी है. सर्वे के अनुसार होम लोन प्रक्रिया में DigiLocker का उपयोग करने वालों में लगभग 80% की आयु 35 वर्ष या उससे कम है. इससे स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी पेपरलेस और सहज डिजिटल प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है.

होम लोन बाजार का नया भविष्य

BASIC Home Loan के सीईओ और सह-संस्थापक अतुल मोंगा ने कहा कि “भारत में होम लोन बाजार अब तेजी से युवाओं की ओर बढ़ रहा है. जहां पहले लोग 30 या 40 की उम्र के बाद घर खरीदने का निर्णय लेते थे, वहीं आज 20 के उत्तरार्ध और 30 की शुरुआत में ही युवा संपत्ति निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. वे बचत का लंबा इंतजार करने के बजाय वित्तीय लीवरेज का समझदारी से उपयोग कर अपने सपनों का घर पहले हासिल करना चाहते हैं. साथ ही, वे तेज, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम प्रक्रियाओं की अपेक्षा रखते हैं. यह बदलाव न केवल उपभोक्ता व्यवहार में परिवर्तन दर्शाता है, बल्कि भारत के हाउसिंग इकोसिस्टम और अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक और दीर्घकालिक संकेत है.”

पब्लिक सेक्टर बैंक की मजबूत पकड़, NBFC की अहम भूमिका

रिपोर्ट बताती है कि प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों और भरोसे के कारण पब्लिक सेक्टर बैंक अब भी उधारकर्ताओं की पहली पसंद हैं. 26–35 वर्ष आयु वर्ग के 48% उधारकर्ता पब्लिक सेक्टर बैंक को प्राथमिकता देते हैं, जबकि केवल 11% NBFC या माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को चुनते हैं.

हालांकि 51–60 वर्ष आयु वर्ग में पब्लिक सेक्टर बैंकों की पसंद घटकर 39% रह जाती है और NBFC व माइक्रोफाइनेंस संस्थानों की हिस्सेदारी बढ़कर 21% हो जाती है. इससे स्पष्ट है कि स्वरोजगार या गैर-पारंपरिक आय वाले ग्राहकों के लिए NBFC महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

बदलती अपेक्षाएं और चुनौतियां

युवा उधारकर्ताओं, खासकर 34 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए ब्याज दर लोनदाता चुनने का सबसे बड़ा कारक है. इसके साथ ही तेज मंजूरी, पारदर्शिता, लचीली शर्तें और बेहतर ग्राहक अनुभव भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं.

अत्यधिक दस्तावेजीकरण और गलत बिक्री की शिकायतें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. इससे संकेत मिलता है कि हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर को प्रक्रिया को सरल और भरोसेमंद बनाने की जरूरत है.

EMI और वहन क्षमता के नए रुझान

मेट्रो शहरों के खरीदार अधिक EMI-से-आय अनुपात और लंबी अवधि के लोन के साथ सहज हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के उधारकर्ता कम अवधि और सीमित EMI प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देते हैं. Knight Frank के Affordability Index 2024 के अनुसार, प्रमुख भारतीय शहरों में EMI-से-आय अनुपात में सुधार हुआ है, जिसे स्थिर ब्याज दरों और नीतिगत उपायों का समर्थन मिला है.

टियर-2 और टियर-3 शहर बने नए ग्रोथ इंजन

बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती वित्तीय जागरूकता ने मेट्रो और गैर-मेट्रो क्षेत्रों के बीच की दूरी कम की है. टियर-2 और टियर-3 शहर अब हाउसिंग फाइनेंस के नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं. नेशनल हाउसिंग बैंक के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राज विकास वर्मा ने कहा कि भारत का हाउसिंग फाइनेंस इकोसिस्टम अब अधिक विविध और उपभोक्ता-केंद्रित हो चुका है. टियर-2 और टियर-3 बाजारों में समावेशन बढ़ाने और पारदर्शिता सुधारने से हाउसिंग सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन सकती है.

 


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