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घरेलू खपत से FY26 में भारत की GDP 7% तक बढ़ने की संभावना
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू खपत, सुस्त मुद्रास्फीति, GST में सुधार और आयकर रियायतों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था FY26 में मजबूती के साथ बढ़ने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
क्रिसिल इंटेलिजेंस (Crisil) की एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू खपत में तेजी आने के कारण भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह वृद्धि 6.5 प्रतिशत थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वृद्धि का समर्थन सुस्त महंगाई, वस्तु एवं सेवा कर (GST) में सुधार और आयकर रियायतें करेंगे. हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ भारत के निर्यात और निवेश के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की निगरानी जारी रहेगी.
जीडीपी वृद्धि में हालिया प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तिमाही के 7.8 प्रतिशत से अधिक है. हालांकि, नाममात्र जीडीपी वृद्धि थोड़ी धीमी होकर 8.7 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल यह 8.8 प्रतिशत थी.
नीतिगत दृष्टिकोण और मुद्रास्फीति
क्रिसिल इंटेलिजेंस ने कहा कि सुस्त महंगाई के बीच मौद्रिक नीति अभी भी दर कटौती के लिए खुली है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) संभवतः डेटा-निर्भर दृष्टिकोण अपनाएगा. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2026 में 2.5 प्रतिशत तक घट सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 4.6 प्रतिशत थी. खाद्य मुद्रास्फीति में अपेक्षाकृत तेज़ गिरावट, कृषि क्षेत्र में स्वस्थ वृद्धि, वैश्विक कच्चे तेल की सुस्त कीमतें और GST में कटौती के लाभ मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद करेंगे.
CPI मुद्रास्फीति अक्टूबर में 0.3 प्रतिशत पर आ गई, जो सितंबर के 1.4 प्रतिशत से कम थी और यह वर्तमान CPI श्रृंखला में सबसे निचला स्तर है. हालांकि, नवंबर में खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण CPI मुद्रास्फीति बढ़ी.
सरकारी वित्त और बाजार उधारी
सरकार ने वित्त वर्ष के दूसरे छमाही में 6.77 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है, जो बजटीय अनुमानित उधारी का 46.1 प्रतिशत है, जबकि पहली छमाही में यह 8 लाख करोड़ रुपये था. कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल बाजार उधारी 14.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले साल की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है.
अक्टूबर तक चालू वित्त वर्ष का वित्तीय घाटा बजट लक्ष्य का 52.6 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 46.5 प्रतिशत था. यह कम कर राजस्व और उच्च पूंजी व्यय के कारण हुआ. हालांकि, उच्च गैर-कर राजस्व और कम राजस्व व्यय ने घाटे को और बढ़ने से रोका.
कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान
रिपोर्ट में कहा गया कि 2026 कैलेंडर वर्ष में कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 60 से 65 अमेरिकी डॉलर के बीच रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह 65 से 70 अमेरिकी डॉलर के बीच थी. नवंबर में ब्रेंट कच्चा तेल 63.6 डॉलर प्रति बैरल औसत पर रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 1.6 प्रतिशत कम और सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत कम है.
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