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FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान, घरेलू सुधार देंगे ताकत: Ind-Ra रिपोर्ट

इंडिया रेटिंग्स का आकलन बताता है कि FY27 में घरेलू सुधार, सरकारी पूंजीगत खर्च और नियंत्रित महंगाई से खपत व निवेश को सहारा मिलने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9% सालाना रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी का कहना है कि घरेलू सुधारों के चलते अमेरिकी टैरिफ से पैदा होने वाली वैश्विक अनिश्चितताओं का असर सीमित रहेगा. हालांकि, अगर खपत और निवेश में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई, तो GDP ग्रोथ अनुमान से कम भी रह सकती है.

घरेलू सुधारों से मिलेगी मजबूती

Ind-Ra के मुताबिक, भारत में जारी संरचनात्मक और नीतिगत सुधार अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने में मदद करेंगे. खासतौर पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के कारण वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी रह सकती है.

FY27 ग्रोथ के जोखिम संतुलित

रिपोर्ट में कहा गया है कि FY27 के लिए ग्रोथ से जुड़े जोखिम फिलहाल संतुलित हैं. अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्दी होता है और हिंद महासागर डाइपोल अनुकूल रहता है, तो 2026 के मध्य संभावित एल नीनो के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. ऐसे में GDP ग्रोथ अनुमान से बेहतर भी हो सकती है. वहीं दूसरी ओर, यदि खपत और निवेश में सुधार उम्मीद से कमजोर रहा, तो आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का जोखिम बना रहेगा.

GDP और CPI का बेस ईयर बदलेगा

Ind-Ra ने बताया कि आने वाले महीनों में GDP और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का बेस ईयर बदला जाएगा. GDP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा. CPI का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 किया जाएगा. नए बेस ईयर के आंकड़े जारी होने के बाद मौजूदा आर्थिक आउटलुक में भी संशोधन किया जाएगा.

एल नीनो और वैश्विक कारक बन सकते हैं चुनौती

Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्री और पब्लिक फाइनेंस प्रमुख देवेंद्र कुमार पंत के अनुसार, FY27 में अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां रह सकती हैं. इनमें 2026 के मध्य से एल नीनो का असर, कमजोर पूंजी प्रवाह के कारण मुद्रा पर दबाव, वैश्विक व्यापार की सुस्त रफ्तार, FY26 में मजबूत ग्रोथ का बेस इफेक्ट और GST रेशनलाइजेशन के चलते नेट प्रोडक्शन टैक्स की धीमी वृद्धि शामिल है. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी एक उभरती हुई चुनौती के रूप में देखा गया है.

मांग पक्ष, खपत से मिलेगी अर्थव्यवस्था को सहारा

डिमांड साइड पर प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) में सुधार देखने को मिला है.

1. FY24 में PFCE ग्रोथ 5.6% रही थी.

2. FY25 में यह बढ़कर 7.2% हो गई.

3. FY26 की पहली छमाही में यह 7.5% तक पहुंच गई.

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि शहरी मांग कुल खपत पर दबाव बना रही है.

FY27 में खपत बढ़ने की उम्मीद

PFCE, जो GDP का करीब 55.9% हिस्सा है (Q2FY26 के अनुसार), FY27 में 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है. खपत को सहारा देने वाले प्रमुख कारकों में मजबूत सर्विस सेक्टर ग्रोथ, कम महंगाई के कारण वास्तविक मजदूरी में सुधार, FY26 के बजट में घोषित आयकर कटौती और GST रेशनलाइजेशन शामिल हैं.

महंगाई का आउटलुक रहेगा अनुकूल

रिपोर्ट के मुताबिक FY26 के बाकी हिस्से और FY27 में महंगाई का रुख नरम रहने की संभावना है. स्थिर कृषि उत्पादन और कम महंगाई से ग्रामीण इलाकों में वास्तविक कृषि मजदूरी सकारात्मक बनी रह सकती है, जिससे खपत को समर्थन मिलेगा. कम महंगाई के चलते शहरी न्यूनतम मजदूरी में भी वास्तविक वृद्धि बनी रहने की उम्मीद है, जबकि गैर-वित्तीय निजी कंपनियों में वास्तविक वेतन स्तर बढ़ सकता है.

निवेश मांग. सरकारी पूंजीगत खर्च से मिलेगा सहारा

FY27 में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) के 7.8% सालाना बढ़ने का अनुमान है. इसका मुख्य कारण सरकार की ओर से जारी पूंजीगत खर्च रहेगा. PFCE के बाद GFCF GDP का दूसरा सबसे बड़ा घटक है. हालांकि, टेलीकॉम, केमिकल और गारमेंट एक्सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में कैपेक्स की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. वहीं, तेल एवं गैस और मेट्रो शहरों के रियल एस्टेट सेक्टर में कैपेक्स ग्रोथ सपाट रह सकती है.

इन सेक्टर्स में बनी रहेगी कैपेक्स की रफ्तार

रिपोर्ट के अनुसार, पावर सेक्टर (थर्मल और रिन्यूएबल), ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कमर्शियल व रिटेल रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश की गति बनी रह सकती है.

वैश्विक मोर्चा, अनिश्चितता के बावजूद असर सीमित

वैश्विक स्तर पर अमेरिका द्वारा एकतरफा टैरिफ बढ़ाने से आर्थिक अनिश्चितता जरूर बढ़ी है, जिससे 2025 में वैश्विक विकास दर धीमी रहने की आशंका है. हालांकि, अब इसका असर पहले के अनुमान से कम आंका जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2025 के अनुमान के मुताबिक, 2025 में वैश्विक GDP 3.2% सालाना की दर से बढ़ सकती है.


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