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वित्त वर्ष 2025–26 में 7.5% तक पहुंच सकती है भारत की GDP : फिच
फिच के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure) का GDP में योगदान 55 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch) रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है. फिच ने यह संशोधित अनुमान अपनी ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक – मार्च 2026’ रिपोर्ट में जारी किया है. एजेंसी के अनुसार मजबूत घरेलू मांग और स्थिर उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को सहारा देंगे.
अगले वित्त वर्ष के लिए भी बेहतर अनुमान
फिच ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए भी भारत की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया है. एजेंसी के मुताबिक उस वर्ष GDP वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो पहले के अनुमान 6.4 प्रतिशत से अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू खपत, निवेश गतिविधियां और सरकार का बुनियादी ढांचे पर खर्च इस वृद्धि के प्रमुख कारक होंगे.
घरेलू खपत और निवेश का बड़ा योगदान
फिच के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure) का GDP में योगदान 55 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है. वहीं सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) का योगदान लगभग 34 प्रतिशत तक रह सकता है. एजेंसी का मानना है कि इन दोनों कारकों के चलते भारत की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार मिलेगा.
वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है. निजी खपत में बढ़ोतरी, आय में वृद्धि और रोजगार की स्थिति में सुधार से घरेलू मांग को लगातार समर्थन मिल रहा है. साथ ही निर्माण, विनिर्माण और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश भी आर्थिक विकास को गति दे रहा है.
सेवा और आईटी सेक्टर से मिलेगा सहारा
फिच ने कहा कि भारत की विविध आर्थिक संरचना भी विकास को समर्थन दे रही है. सेवा क्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और विनिर्माण जैसे क्षेत्र आगे भी अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान देते रहेंगे. एजेंसी के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का वस्तु निर्यात लगभग 780 अरब डॉलर और सेवा निर्यात करीब 310 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
महंगाई और तेल की कीमतों पर नजर
फिच ने यह भी कहा कि महंगाई और मौद्रिक नीति की दिशा आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती है. हालांकि फिलहाल महंगाई नियंत्रित रहने की संभावना है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को नीतिगत समर्थन जारी रखने में मदद मिल सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है. यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे घरेलू लागत दबाव बढ़ सकता है.
दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भारत
फिच के संशोधित अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा. एजेंसी का कहना है कि मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत समर्थन और आर्थिक संरचना की मजबूती भारत की विकास दर को आगे भी बनाए रखने में मदद करेगी. साथ ही विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में विश्वास बना रहने से मध्यम अवधि में भारत की आर्थिक संभावनाएं मजबूत बनी रहेंगी.
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