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बाजार गुलजार, हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में भी आया बड़ा उछाल; जानें क्या है ताजा हाल
बीते एक मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
शेयर बाजार (Stock Market) के लिए यह सप्ताह अच्छा रहा है. महाशिवरात्रि के मौके पर 8 मार्च को बाजार बंद था, इससे पहले यानी गुरुवार को मार्केट तेजी के साथ बंद हुआ था. इस दौरान, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक 33.40 अंकों की बढ़त के साथ 74,119.39 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 19.50 अंकों के उछाल के साथ 22,493.55 पर पहुंच गया. बाजार से मिली इस खुशखबरी के साथ विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Currency Reserve) के मोर्चे पर भी इस हफ्ते अच्छी खबर सामने आई है.
यहां भी हुआ इजाफा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते एक मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान हमारे विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Currency Reserve) में 6.55 अरब डॉलर की बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे पहले 23 फरवरी 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान भी इसमें 2.98 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से से जारी आंकड़ों के अनुसार, एक मार्च 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 6.55 अरब डॉलर की भारी बढ़त हुई है. इसी तरह, देश की विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Asset) भी बढ़ी हैं.
Gold Reserves भी उछला
बीते एक मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान FCAs में 6.043 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है और यह 554.231 अरब डॉलर पहुंच गया है. बता दें कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसी तरह, हमारे स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में भी बढ़ोतरी हुई है. इस सप्ताह गोल्ड रिजर्व 569 मिलियन बढ़कर 48.417 अरब डॉलर का हो गया है. RBI के आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) में कमी आई है. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान एसडीआर 17 मिलियन डॉलर घट कर 18.18 अरब डॉलर रह गया है.
डॉलर पहुंच गया है.
क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नजर रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है.
आखिर क्या है इसका उद्देश्य?
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. जैसा कि पिछले साल जुलाई में RBI ने 39 अरब डॉलर की बिक्री की थी. हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई थी. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.
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