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फरवरी में सुधरी भारत की वित्तीय स्थिति, लेकिन वेस्ट एशिया संकट से बढ़ा जोखिम: क्रिसिल
फरवरी में सुधार के बावजूद, मार्च में उभरते जोखिम यह संकेत देते हैं कि भारत की वित्तीय स्थिति अभी भी बाहरी कारकों पर काफी हद तक निर्भर है. वेस्ट एशिया संकट आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत की वित्तीय स्थिति फरवरी में बेहतर हुई, लेकिन मार्च की शुरुआत में वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है. क्रिसिल (Crisil) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव और तेल कीमतों में तेजी के चलते वित्तीय हालात फिर कमजोर पड़ने लगे हैं.
फरवरी में मजबूत दिखे हालात
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में भारत की वित्तीय स्थिति में सुधार देखने को मिला. क्रिसिल फाइनेंशियल कंडीशन्स इन्डेक्स (FCI) जनवरी के -0.6 से बढ़कर फरवरी में शून्य (0) के स्तर तक पहुंच गया. शून्य का स्तर यह दर्शाता है कि वित्तीय स्थितियां दीर्घकालिक औसत के करीब हैं. पिछले 14 महीनों में से 12 महीनों तक यह इंडेक्स नकारात्मक क्षेत्र में रहा था, इसलिए यह सुधार अहम माना जा रहा है.
विदेशी निवेश से मिला सहारा
फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की वापसी से बाजार को मजबूती मिली. इस दौरान 4.2 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया, जो 17 महीनों का उच्च स्तर है. यह निवेश भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक माहौल के कारण आया.
रुपया स्थिर, बैंक क्रेडिट ग्रोथ मजबूत
फरवरी में रुपये में स्थिरता देखने को मिली और महीने के अंत तक इसमें करीब 1 प्रतिशत की मजबूती आई. वहीं, बैंक क्रेडिट ग्रोथ 14.5 प्रतिशत रही, जो 12 महीने के औसत 11.4 प्रतिशत से काफी अधिक है. साथ ही, सिस्टम में लिक्विडिटी भी बढ़कर 6 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिसमें RBI के कदमों और विदेशी निवेश का योगदान रहा.
मार्च में बिगड़ने लगे हालात
हालांकि, मार्च के पहले दो हफ्तों में स्थिति फिर कमजोर होती नजर आई. वेस्ट एशिया संकट के चलते विदेशी निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी. 16 मार्च तक FPI ने 7.9 अरब डॉलर की निकासी की. इस दौरान सेंसेक्स में औसतन 6.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि रुपया भी डॉलर के मुकाबले 1.4 प्रतिशत कमजोर हुआ.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. इससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. क्रिसिल का मानना है कि अगर वेस्ट एशिया संकट ज्यादा लंबा नहीं खिंचता, तो भारत की वित्तीय स्थिति स्थिर रह सकती है. मजबूत आर्थिक आधार और मौद्रिक नीतियां इसमें सहायक होंगी. हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा, क्योंकि ये बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं.
ब्याज दर और महंगाई का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की मौद्रिक नीति समिति वित्त वर्ष 2027 में ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है. महंगाई दर 4.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें खाद्य महंगाई सामान्य होने की संभावना है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण गैर-खाद्य महंगाई पर दबाव बना रह सकता है.
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