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भारत का उर्वरक बाजार 2025: आयात बढ़ा, घरेलू उत्पादन मजबूत, निवेशकों के लिए आकर्षक संकेत

FAI डेटा दर्शाता है कि भारत में उर्वरक आपूर्ति अब आयात और घरेलू उत्पादन के संतुलित समन्वय से किसानों के लिए निरंतर पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सक्षम है।

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारतीय उर्वरक संघ (FAI) ने अप्रैल–नवंबर 2025 के लिए प्रमुख उर्वरकों के उत्पादन, आयात और बिक्री का अस्थायी डेटा जारी किया है. यह डेटा दर्शाता है कि भारत के उर्वरक आपूर्ति तंत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जिसमें आयात ने घरेलू उत्पादन, जटिल उर्वरक और देशी फॉस्फेटिक उत्पादों में पोषक तत्वों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है.

यूरिया: घरेलू उत्पादन गिरा, आयात बढ़ा

अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान यूरिया की बिक्री 25.40 मिलियन टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 2.3% अधिक है. हालांकि, इस वृद्धि के पीछे एक महत्वपूर्ण बदलाव है: घरेलू यूरिया उत्पादन 3.7% गिरकर 19.75 मिलियन टन रह गया, जबकि आयात 120.3% बढ़कर 7.17 मिलियन टन हो गया.

केवल नवंबर में ही यूरिया बिक्री 3.75 मिलियन टन रही, जो सालाना आधार पर 4.8% अधिक है. इसी अवधि में आयात 68.4% बढ़कर 1.31 मिलियन टन हो गया. यह आयात बढ़ोतरी फसल पोषण की अहम अवधि में लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति को दर्शाती है.

FAI के अध्यक्ष S. Sankarasubramanian ने कहा, "अप्रैल–नवंबर डेटा दिखाता है कि उर्वरक क्षेत्र पोषक तत्व सुरक्षा के लिए विकसित दृष्टिकोण अपना रहा है. यूरिया और डीएपी के लिए आयात पर निर्भरता यह दर्शाती है कि रणनीतिक आपूर्ति प्रबंधन और आयात नीति कितना महत्वपूर्ण है."

डीएपी: उत्पादन गिरावट को आयात ने संतुलित किया

डीएपी की बिक्री अप्रैल–नवंबर 2025 में 7.12 मिलियन टन रही, जो पिछले साल से लगभग स्थिर है. हालांकि, अंदरूनी डेटा दिखाता है कि:

1. घरेलू डीएपी उत्पादन 5.2% घटकर 2.68 मिलियन टन हो गया
2. पोषक तत्व मांग को पूरा करने के लिए 67% आयात पर निर्भरता बढ़ी (पिछले साल 56%)

यह बदलाव दर्शाता है कि भारत को फॉस्फेटिक आयात पर बढ़ती निर्भरता के बावजूद किसानों तक निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करनी पड़ रही है.

जटिल NPK उर्वरक: उत्पादन और आयात दोनों में वृद्धि

NP/NPK जटिल उर्वरक की बिक्री अप्रैल–नवंबर 2025 में 10.38 मिलियन टन रही, जो पिछले साल से 0.1% अधिक है. लेकिन उत्पादन और आयात में तेजी देखी गई है. उत्पादन 13.8% बढ़कर 8.15 मिलियन टन हुआ और आयात लगभग दोगुना होकर 2.72 मिलियन टन हो गया (पिछले साल 1.37 मिलियन टन). यह वृद्धि दिखाती है कि किसान संतुलित, बहु-घटक वाले उर्वरकों को पसंद कर रहे हैं, जो मिट्टी और फसल की पोषण आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा करते हैं.

MOP और SSP: मजबूत मांग और देशी ताकत

MOP की बिक्री 8.6% बढ़कर 1.55 मिलियन टन रही. देशी फॉस्फेटिक उर्वरक SSP ने 15% बिक्री वृद्धि दर्ज की और उत्पादन 9.5% बढ़कर 3.97 मिलियन टन हुआ. SSP की यह सफलता देशी उर्वरक पर किसानों के भरोसे और प्रतिस्पर्धी लागत और गुणवत्ता में देशी उत्पादन की क्षमता को दर्शाती है.

समग्र रुझान: आयात और घरेलू उत्पादन का संतुलन

अप्रैल–नवंबर 2025 का डेटा दर्शाता है कि भारत के उर्वरक आपूर्ति तंत्र में अब आयात और घरेलू उत्पादन दोनों एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं.

1. यूरिया आयात 120% बढ़ा
2. डीएपी आयात 54% बढ़ा
3. जटिल उर्वरक आयात 98.7% बढ़ा

FAI के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा है कि डेटा के मुख्य संदेश दो हैं: एक, नाइट्रोजन और फॉस्फेट पोषक तत्वों के लिए आयात-निर्भर आपूर्ति संरचना; दो, देशी फॉस्फेटिक उर्वरक SSP की मजबूत बिक्री. यह संतुलित दृष्टिकोण दर्शाता है, आवश्यक पोषक तत्वों की योजना अनुसार आयात और घरेलू उत्पादन दोनों के माध्यम से उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. उन्होंने कहा कि FAI आगे भी उर्वरक उत्पादन, आयात और बिक्री की निगरानी करेगा और सभी हितधारकों के साथ समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, ताकि भारत की विविध कृषि क्षेत्रों में संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके.

 


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