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खराब क्वालिटी ने बिगाड़ा खेल, इन सेक्टर्स में भारत का Export घटा

विदेशों द्वारा भारतीय उत्पादों को रिजेक्ट करने से न केवल ऑर्डरों में कमी आती है, बल्कि हमारी प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारत में बनने वाले उत्पादों की डिमांड दुनियाभर में होती है. भारत के उत्पादों के बल पर कई विदेशी कंपनियां हर साल मोटा मुनाफा कमाती हैं. ऐसे में यह खबर परेशान करने वाली है कि फार्मास्यूटिकल्स, जेम्स और ज्वेलरी, चमड़ा और फुटवियर जैसे क्षेत्रों में भारत का निर्यात (Indian Export) घटा है. चिंता वाली बात ये है कि एक्सपोर्ट के घटने की वजह प्राइसिंज यानी कीमत नहीं बल्कि क्वालिटी है. इसका सीधा सा मतलब है कि भारत को इन सेक्टर से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता पर काफी ध्यान देना होगा.  

इस मोर्चे पर अच्छी खबर
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015 की तुलना में 2022 में फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, चमड़ा और  फुटवियर जैसे क्षेत्रों में भारत का निर्यात घटा है. दूसरे शब्दों में कहें तो निर्यात कम होने का मतलब है कि इन क्षेत्रों में भारत का वैश्विक व्यापार घटा है. हालांकि, इलेक्ट्रानिक्स, मशीनरी, पेट्रोलियम, आटो पा‌र्ट्स, लोहा-इस्पात और एल्युमिनियम के मोर्चे पर हमारी स्थिति बेहतर हुई है. इन क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है.

धीरे-धीरे बढ़ रही हिस्सेदारी
GTRI के सह संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बताया कि Apparel, Leather, Shoes और Marine Products जैसे क्षेत्रों के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी कम हो रही है. गौर करने वाली बात ये है कि हिस्सेदारी कम होने की बड़ी वजह इन उत्पादों का मूल्य नहीं बल्कि गुणवत्ता है. वहीं, वैश्विक व्यापार के जिन क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है, उनमें इलेक्ट्रानिक्स, दूरसंचार, मोबाइल फोन, बिजली के उपकरण और मशीनरी आदि शामिल हैं. इन क्षेत्रों के उत्पाद विश्व व्यापार में पर्याप्त महत्व रखते हैं और इनका कुल बाजार मूल्य 6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है. GTRI की रिपोर्ट बताती है कि इन क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी कम है, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रही है. 

चाय का एक्सपोर्ट भी प्रभावित
2022 में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 1.8% थी. जबकि मशीनरी और इलेक्ट्रानिक्स में उसकी हिस्सेदारी 2015 में क्रमश: 0.75 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत थी. पिछले सात वर्षों के दौरान इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गुणवत्ता यानी क्वालिटी का मुद्दा केवल फार्मास्यूटिकल्स तक ही सीमित नहीं है. झींगा और झींगे जैसे जलीय उत्पादों (Indian Aquaculture Products) का निर्यात गुणवत्ता के चलते प्रभावित हो रहा है. झींगे में साल्मोनेला (एक प्रकार का बैक्टीरिया) की मौजूदगी के कारण कई देश इन उत्पादों को लेने से इनकार कर देते है. इसके अलावा गुणवत्ता के मुद्दे ने भारतीय चाय के निर्यात को भी प्रभावित किया है. भारतीय चाय मंगवाने वाले देशों का कहना है कि इसमें कीटनाशकों की सीमा अनुमेय सीमा से अधिक है.

घटिया क्वालिटी से प्रतिष्ठा प्रभावित
रिपोर्ट में कहा गया है कि गुणवत्ता जांच (Quality Checks) को सख्ती से अमल में लाकर रिजेक्शन से बचा जा सकता है. विदेशों द्वारा भारतीय उत्पादों को रिजेक्ट करने से न केवल ऑर्डरों में कमी आती है, बल्कि हमारी प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है. GTRI का कहना है कि खराब क्वालिटी वाले एक कफ सिरप से संपूर्ण फार्मा उद्योग की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है. फार्मेसी ऑफ वर्ल्ड के रूप में पोजीशन बनाए रखने के लिए, भारत को गुणवत्ता के मुद्दों को प्राथमिकता से सुलझाना होगा. 

 


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