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वित्त वर्ष 2027 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.1% की दर से बढ़ेगी: क्रिसिल
क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार मजबूत घरेलू मांग, सरकारी बुनियादी ढांचा निवेश और उभरते क्षेत्रों में बढ़ता निजी निवेश रहेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
रेटिंग और रिसर्च कंपनी क्रिसिल के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी रहेगी. कंपनी ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.1% रहेगी, जो कि संशोधित नए GDP सीरीज के अनुसार वित्त वर्ष 2026 के 7.6% से थोड़ी कम है. यह अनुमान क्रिसिल के वार्षिक “इंडिया आउटलुक कॉन्क्लेव” के 10वें संस्करण में जारी किया गया.
विकास अनुमान के पीछे चार प्रमुख मान्यताएँ
क्रिसिल के अनुसार यह अनुमान चार प्रमुख परिस्थितियों पर आधारित है. इसमें इस वर्ष सामान्य मानसून की संभावना शामिल है, हालांकि अगस्त के बाद एल नीनो जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं. इसके साथ ही खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रित रहने की उम्मीद है, भले ही निम्न आधार प्रभाव के कारण इसमें थोड़ी बढ़ोतरी दिखाई दे.
कच्चे तेल के संदर्भ में ब्रेंट की कीमत लगभग 75–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है. वहीं वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि स्थिर रहने की संभावना है, हालांकि शुल्क नीतियों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अनिश्चितता बनी रह सकती है.
क्रिसिल का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में झटकों को सहने की क्षमता है. घरेलू मांग, सरकारी बुनियादी ढांचा निवेश और धीरे-धीरे बढ़ता निजी पूंजीगत निवेश बाहरी चुनौतियों के प्रभाव को संतुलित कर सकते हैं.
घरेलू मांग बनी रहेगी मुख्य इंजन
वित्त वर्ष 2027 में घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बनी रहेगी. सरकार द्वारा उठाए गए कई कदम जैसे आयकर में कटौती, GST दरों का सरलीकरण, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में वृद्धि और पर्याप्त तरलता, लोगों की आय बढ़ाने और उधार लागत कम करने में मदद कर रहे हैं.
क्रिसिल के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमिश मेहता के अनुसार, “भारत ने बाहरी अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिर विकास दर्ज किया है. वित्त वर्ष 2027 के लिए हमारा अनुमान घरेलू कारकों की मजबूती विशेषकर खपत, बुनियादी ढांचा निवेश और उभरते क्षेत्रों में निजी निवेश को दर्शाता है. उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक संघर्ष, तकनीकी व्यवधान, बढ़ता सार्वजनिक ऋण और जलवायु जोखिम जैसे कारकों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता होगी.
निजी खपत और निवेश का योगदान
भारत की GDP में निजी खपत का हिस्सा लगभग 57% है, जो आर्थिक वृद्धि को सहारा देता रहेगा. हालांकि एक-बार मिलने वाले कर लाभ कम होने के कारण इसकी गति थोड़ी धीमी हो सकती है. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार, “सरकारी नीतियों से लोगों की आय बढ़ेगी और निजी निवेश में भी हल्की तेजी आएगी. लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएँ अभी भी जोखिम पैदा कर सकती हैं.”
मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मांग का रुझान
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति लगभग 4.3% रहने का अनुमान है. खाद्य कीमतों के सामान्य होने से इसमें कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन उपभोक्ता टोकरी में खाद्य पदार्थों का कम वज़न होने के कारण कुल मुद्रास्फीति पर दबाव सीमित रह सकता है, बशर्ते तेल की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव न हो. बेहतर क्रय-शक्ति और दबे हुए मांग के कारण ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ, एयरलाइंस और होटल जैसे विवेकाधीन खर्च वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. साथ ही छोटे परिवार, कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आय में वृद्धि जैसी सामाजिक प्रवृत्तियाँ भी उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देंगी.
निर्यात में भी दिखेगी मजबूती
वित्त वर्ष 2027 में निर्यात वृद्धि स्थिर रहने की संभावना है. इसके पीछे वैश्विक मांग का स्थिर रहना, सेवाओं के निर्यात में मजबूती और हाल में हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर जैसे कारण होंगे. हालांकि मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे व्यापार और पूंजी प्रवाह में व्यवधान का जोखिम बना रह सकता है.
कॉरपोरेट आय और मार्जिन पर असर
कॉरपोरेट राजस्व वृद्धि 8–9% के दायरे में रहने का अनुमान है. यह मजबूत खपत और निजी निवेश में धीरे-धीरे आने वाली तेजी से समर्थित रहेगा. हालांकि कुछ कमोडिटी-आधारित क्षेत्रों पर मूल्य दबाव पड़ सकता है और निर्माण से जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि थोड़ी धीमी हो सकती है. सीमित मूल्य वृद्धि के कारण EBITDA मार्जिन 40–60 बेसिस पॉइंट तक घट सकते हैं. यदि कच्चे तेल या गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊँची रहीं तो एयरलाइंस, सिरेमिक, केमिकल, उर्वरक, पेंट, पेट्रोकेमिकल और टायर उद्योग जैसे क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
औद्योगिक निवेश में आएगी तेजी
कम उधार लागत और सरकार का लगातार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, जो GDP का लगभग 3.1% है, निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा. इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर फोटोवोल्टिक, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश बढ़ने की संभावना है.
क्रिसिल इंटेलिजेंस की प्रेसिडेंट प्रीति अरोड़ा के अनुसार, “औद्योगिक पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2027 से 2031 के बीच बढ़कर लगभग 9.1 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक पहुँच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 1.5 गुना अधिक है.” उनके अनुसार उभरते क्षेत्रों में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश लगभग 4.7 गुना तक बढ़ सकता है, जबकि ईवी निर्माण और चार्जिंग में 3.1 गुना तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी में लगभग 3.3 गुना वृद्धि का अनुमान है.
2031 तक निर्यात दोगुना होने की संभावना
बुनियादी ढांचा सुधार, तकनीक अपनाने, कौशल विकास और बाजार तक बेहतर पहुंच के कारण भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. सरकारी पहल और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की नीतियों के कारण वित्त वर्ष 2031 तक भारत का निर्यात लगभग 80 लाख करोड़ रुपये तक दोगुना होने का अनुमान है.
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