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अमेरिकी टैरिफ से धीमी पड़ सकती है भारत की केमिकल एक्सपोर्ट रिकवरी, Ind-Ra की रिपोर्ट में चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी टैरिफ नीति से भारत के केमिकल सेक्टर की निकट भविष्य की रिकवरी पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि घरेलू मांग और सरकारी संरक्षणात्मक उपाय कुछ राहत दे सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारतीय केमिकल उद्योग की धीमी हो रही रिकवरी को अमेरिकी व्यापार नीतियों से एक और झटका लग सकता है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका द्वारा आयात शुल्क (Tariff) में भारी बढ़ोतरी से भारतीय केमिकल सेक्टर की आमदनी और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा. दो साल की कमजोरी के बाद सेक्टर में दिख रही स्थिरता की शुरुआत अब फिर खतरे में है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी निर्भरता अमेरिकी बाजार और गैर-छूट वाले उत्पादों पर अधिक है.

अमेरिकी टैरिफ से घट सकती है केमिकल सेक्टर की आमदनी

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाए जाने से भारतीय केमिकल कंपनियों की आय में एकल अंक (single-digit) की गिरावट हो सकती है. वहीं, उनके मुनाफे पर 15 प्रतिशत तक का असर पड़ सकता है. अमेरिका भारत के कुल केमिकल निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत का हिस्सा रखता है, जिसमें से आधे से अधिक उत्पाद फिलहाल शुल्क-मुक्त श्रेणी में आते हैं.

इंड-रा के एसोसिएट डायरेक्टर सिद्धार्थ रेगो ने कहा, “घरेलू मांग वित्त वर्ष 2026 में मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन जिन कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी गैर-छूट वाले उत्पादों पर निर्भर है, उन्हें मार झेलनी पड़ सकती है. विशेष रूप से एमएसएमई और सीमित लिक्विडिटी वाली कंपनियों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ेगा.”

दो साल की कमजोरी के बाद सुधर रहे थे संकेत

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय केमिकल उद्योग ने दो कमजोर वर्षों के बाद स्थिरता के संकेत दिखाए थे. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में मार्जिन 14 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह औसतन 13 प्रतिशत था. लेकिन 27 अगस्त 2025 से लागू नए अमेरिकी टैरिफ ने इस सुधार की रफ्तार को धीमा कर दिया है.

सितंबर से अमेरिकी निर्यात में गिरावट देखी जा रही है क्योंकि कंपनियां ग्राहकों के साथ लागत साझा करने के नए मॉडल पर बातचीत कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की तुलना में चीन, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों के कम टैरिफ भारत की लागतीय बढ़त को कम कर रहे हैं.

ऑर्गेनिक और एग्रो केमिकल्स पर सबसे ज्यादा असर

इंड-रा ने बताया कि अमेरिका को भारत से जाने वाले निर्यात में ऑर्गेनिक केमिकल्स और एग्रोकेमिकल्स का सबसे बड़ा हिस्सा है, जबकि डाई और इनऑर्गेनिक केमिकल्स पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा. हालांकि, वैश्विक टेक्सटाइल मांग घटने से डाई की खपत पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया कि सेक्टर की कुल आमदनी में गिरावट एकल अंकों में रहेगी, लेकिन जिन कंपनियों का बड़ा हिस्सा गैर-छूट उत्पादों पर निर्भर है, वहां यह गिरावट 10-12 प्रतिशत तक जा सकती है.

चीन से प्रतिस्पर्धा और घरेलू बाजार पर असर

चीन का हिस्सा अमेरिका के केमिकल आयात में पिछले पांच वर्षों के औसत 13 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में लगभग 10 प्रतिशत रह गया है, जबकि भारत का हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत पर स्थिर है. इंड-रा ने कहा कि भले ही इससे भारत को अवसर मिल सकता था, लेकिन टैरिफ का नुकसान इसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को सीमित कर देगा.

साथ ही, रिपोर्ट के अनुसार, ऊंचे टैरिफ से सस्ते चीनी केमिकल्स के भारत में घुसने का खतरा कम होगा. घरेलू मांग और सीमित मूल्य गिरावट से वित्त वर्ष 2026 में सेक्टर की लाभप्रदता को सहारा मिल सकता है.

भविष्य की रणनीति और निवेश

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में पूंजीगत निवेश मुख्य रूप से लागत घटाने और चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर केंद्रित रहेगा. शुरुआती चरण के नए प्रोजेक्ट्स को कई कंपनियां टाल सकती हैं. हालांकि इंड-रा का कहना है कि ज्यादातर रेटेड केमिकल कंपनियों की लिक्विडिटी स्थिति आरामदायक बनी हुई है, लेकिन बड़ी पूंजीगत परियोजनाओं में लगी कंपनियां और एमएसएमई अगर टैरिफ दबाव बने रहे तो मुश्किलों में पड़ सकती हैं.

 


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