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भारत का बड़ा कदम: विदेशी दौरों पर जाएंगे 7 सांसद, दुनिया को बताएंगे सीमा पार आतंकवाद का सच
यह दौरा भारत की कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है, जो वैश्विक सुरक्षा और शांति की दिशा में देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत केंद्र सरकार मई के अंत में सात सर्वदलीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दुनिया के प्रमुख देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के दौरे पर भेजेगी. इन दौरों का मुख्य उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंता और सख्त रुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना है.
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन होंगे शामिल?
इन सात प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व विभिन्न दलों के प्रमुख सांसद करेंगे. इसमें कांग्रेस से शशि थरूर, भाजपा से रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, जदयू से संजय कुमार झा, द्रमुक से कनिमोझी करुणानिधि, राकांपा से सुप्रिया सुले और शिवसेना से एकनाथ शिंदे शामिल हैं. इनमें से चार सांसद सत्तारूढ़ एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से हैं, जबकि तीन सांसद विपक्षी इंडिया गठबंधन का प्रतिनिधित्व करेंगे.
दौरे के पीछे क्या उद्देश्य है?
सरकार का मकसद इन प्रतिनिधिमंडलों के जरिए यह संदेश देना है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है और वह इसकी किसी भी अभिव्यक्ति को सहन नहीं करेगा. प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल लगभग पांच देशों का दौरा करेगा. इनके साथ अनुभवी राजनयिक भी होंगे, जो भारत के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रभावी तरीके से रखेंगे.
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
संसदीय कार्य मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “ये प्रतिनिधिमंडल भारत की राष्ट्रीय एकता और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ उसके दृढ़ संकल्प का प्रतीक होंगे.”
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जब बात सबसे अहम होती है, भारत एकजुट होकर खड़ा होता है.”
राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने इस जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय का आभार जताया और कहा, “मुझे वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ है.”
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला
इस पहल की पृष्ठभूमि में हाल ही में शुरू किया गया 'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम में हुए आतंकी हमले जैसी घटनाएं हैं. इन घटनाओं ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद के खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया है. यह दौरा भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्पष्ट संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई नरमी नहीं है.
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