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ट्रंप टैरिफ का शेयर बाजार पर रहेगा मिला-जुला असर, कुछ सेक्टरों पर रहेगा प्रभाव- GlobalData
IT कंपनियों का कारोबार अमेरिका पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. ऑटो, रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
7 अप्रैल 2025 को भारतीय शेयर बाजार में तेज़ गिरावट आई, लेकिन अगले ही दिन बाजार में तेज़ी से सुधार हुआ. इस पर GlobalData कंपनी के इकोनॉमिक रिसर्च एनालिस्ट जैसन डेविस ने अपनी राय दी है. उन्होंने कहा कि "7 अप्रैल 2025 को भारतीय शेयर बाजार में इस साल की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों में जबरदस्त गिरावट आई. इसकी वजह अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर 26% टैक्स (टैरिफ) लगाना था. इससे निवेशकों में घबराहट फैल गई और एक ही दिन में शेयर बाजार की कुल कीमत (मार्केट कैप) में करीब 16.8 से 22.8 बिलियन डॉलर (लगभग 1.4 से 1.9 लाख करोड़ रुपये) की कमी आ गई.
उन्होंने आगे कहा कि “यह गिरावट हर सेक्टर पर असर डाल गई. सबसे ज़्यादा नुकसान निफ्टी मेटल इंडेक्स को हुआ, क्योंकि लोगों को लगा कि अमेरिका में मंदी आने से इंडस्ट्रियल डिमांड कम हो जाएगी. निफ्टी IT इंडेक्स में भी 2% से ज़्यादा की गिरावट आई, क्योंकि IT कंपनियों का कारोबार अमेरिका पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. ऑटो, रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुए. मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में तो और भी ज़्यादा गिरावट आई, जिससे पता चलता है कि नकारात्मक सोच सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं थी. India VIX, जो शेयर बाजार में डर और उतार-चढ़ाव का पैमाना है, वो 65% से ज़्यादा बढ़ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों को इस ट्रेड वॉर के असर को लेकर बहुत चिंता हो रही है."
"भारतीय शेयर बाजार की गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में बिकवाली देखने को मिली. एशियाई बाजारों में तो पिछले 10 सालों की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ होता है कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, और ट्रेड वॉर (व्यापार विवाद) की आशंका ने सबको प्रभावित किया है.
भारतीय शेयर बाजार का भविष्य फिलहाल थोड़ा मिला-जुला लग रहा है. आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका के टैक्स का असर कितना होगा और ट्रेड डील में आगे क्या होता है. जो सेक्टर अमेरिका पर ज़्यादा निर्भर हैं, जैसे IT और टेक्सटाइल, उन्हें तुरंत दिक्कतें आ सकती हैं. लेकिन जो सेक्टर देश के अंदर की मांग पर टिके हैं, जैसे FMCG (दैनिक उपभोग की चीजें) और इंफ्रास्ट्रक्चर, वे संभले रह सकते हैं.
8 अप्रैल 2025 को बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी ने दिन की शुरुआत में ही 1.5% से ज़्यादा की बढ़त दिखाई. इसकी वजह थी दुनिया भर के बाजारों में सुधार और उम्मीद कि अमेरिका ट्रेड टैक्स में कुछ राहत दे सकता है. घरेलू निवेशकों ने जमकर खरीदी की, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को थोड़ा संतुलित किया गया. बैंकिंग, IT और FMCG जैसे कई सेक्टरों में अच्छी तेजी रही. हालांकि, ये तेजी कितनी टिकेगी ये अभी पक्का नहीं है। इसका भविष्य अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों, RBI की मौद्रिक नीति (ब्याज दरों से जुड़ी नीति), और बाजार में बने उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा. इसलिए निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहना चाहिए."
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