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भारत में बनेगा पहला स्वदेशी MRI मशीन, Paras Defence बनाएगा हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट

Paras Defence की यह साझेदारी भारत को न केवल मेडिकल इमेजिंग क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत की अग्रणी रक्षा इंजीनियरिंग कंपनी Paras Defence & Space Technologies Limited ने भारत की पहली स्वदेशी MRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीन के निर्माण के लिए एक बड़ी साझेदारी की घोषणा की है. यह प्रोजेक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाले SAMEER के नेतृत्व में गठित एक कंसोर्टियम के माध्यम से संचालित हो रही है.

यह पहल भारत की मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है. Paras Defence इस प्रोजेक्ट में MRI मशीनों के लिए उच्च-प्रदर्शन वाले मैग्नेट का विकास और निर्माण करेगी,  जो MRI का सबसे जटिल और महंगा घटक होता है.

भारत की तकनीकी संप्रभुता में बड़ा योगदान

Paras Defence ने यह मैग्नेट तकनीक Inter-University Accelerator Centre (IUAC) और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से विकसित की है. इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि यह तकनीक वैश्विक मानकों पर खरी उतरे. भारत अब तक MRI मशीनों और उनके प्रमुख घटकों के लिए आयात पर निर्भर रहा है. ऐसे में Paras Defence की यह भूमिका देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में निर्णायक होगी. इस पहल से भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो MRI-ग्रेड मैग्नेट का निर्माण कर सकते हैं.

अमरनाथ प्लांट में होगा निर्माण, अगले वित्तीय वर्ष से शुरुआत

Paras Defence इन MRI मैग्नेट्स का निर्माण अंबरनाथ स्थित अपनी फैक्ट्री में करेगी और निर्माण कार्य अगले वित्तीय वर्ष से शुरू होने की योजना है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स, क्रायोजेनिक्स और सुपरकंडक्टिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा ताकि MRI की छवि गुणवत्ता और कार्यक्षमता वैश्विक स्तर पर बनी रहे. Paras Defence के मैनेजिंग डायरेक्टर मुंजाल शाह ने कहा “हम इस ऐतिहासिक पहल में भागीदारी कर गर्व महसूस कर रहे हैं. MRI मशीनों के लिए महत्वपूर्ण मैग्नेट का निर्माण न केवल आयात निर्भरता को कम करेगा बल्कि मेडिकल टेक्नोलॉजी में भारत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में मदद करेगा.

AIIMS और SAMEER के साथ साझेदारी

इस कंसोर्टियम में कई अग्रणी अनुसंधान संस्थान और उद्योग साझेदार शामिल हैं. प्रमुख भागीदारी AIIMS नई दिल्ली और SAMEER के बीच हुई है. SAMEER के महानिदेशक डॉ. पी. हनुमंथा राव ने कहा कि MeitY की पहल भारत को स्वदेशी मेडिकल समाधान की दिशा में आगे ले जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि यह R&D और इंडस्ट्री के गठजोड़ से तकनीकी नवाचार को व्यावसायिक उत्पाद में बदलने का एक आदर्श उदाहरण है. इससे मेडिकल इक्विपमेंट की लागत कम होगी और उपचार सस्ता होगा.

AIIMS में लगेगा पहला 1.5 टेस्ला MRI स्कैनर

इस प्रोजक्ट के तहत बना पहला स्वदेशी 1.5 टेस्ला MRI स्कैनर इसी साल अक्टूबर 2025 में AIIMS दिल्ली में स्थापित किया जाएगा. वहां इसका क्लिनिकल परीक्षण किया जाएगा. MRI बाजार का वैश्विक आकार2023 में 6.64 अरब डॉलर था और यह 6.5% की CAGR से बढ़ रहा ह. भारत का MRI बाजार 2025 में 326.85 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 439.67 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. स्वदेशी MRI मशीनों के विकास से प्रोक्योरमेंट कॉस्ट में 30% तक की गिरावट** आने की उम्मीद है. इससे न सिर्फ अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स की लागत घटेगी, बल्कि मरीजों को भी सस्ता इलाज मिल सकेगा.

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल भारत के मेडिकल डिवाइसेज सेक्टर में नई नौकरियों और निवेश का रास्ता खोलेगी, खासकर R&D, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली सेगमेंट में, Paras Defence की यह पहली मेडिकल टेक्नोलॉजी उत्पादन इकाई होगी, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी MRI मैग्नेट्स का निर्यात करने का इरादा रखती है.


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