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भारत चीनी कंपनियों पर लगा रहा था बैन, ड्रैगन उल्टा बढ़ाने लगा FPI; अब ये है सिचुएशन

फिलहाल, भारत में FPI के नजरिये से दसवें नंबर पर नीदरलैंड है. नीदरलैंड का जून, 2022 भारत में एफपीआई 99,140 करोड़ रुपये है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: आपको याद होगा, जब 2020 के शुरुआती दिनों में कोविड महामारी आने के बाद चीन पर प्रतबंधों की बात चल रही थी. हर तरफ चीनी प्रोडक्ट्स और कंपनियों को बायकॉट किया जा रहा था, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्हीं दिनों से भारत में चीन का विदेशी पोर्टफोलियो निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है.

10वें नंबर पर पहुंचने से थोड़ी दूर ही है चीन
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के अनुसार, भारत में FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) के लिहाज से चीन शीर्ष 10 देशों में शुमार होने के बिल्कुल करीब है. RTI के तहत सेबी से मिली जानकारी के मुताबिक भारत में चीन का FPI लगातार बढ़ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक चीन का FPI जून, 2022 में 80,684 करोड़ रुपये हो चुका है और यह 10वें नंबर पर आने से 20,000 करोड़ रुपये दूर है.

अभी 10वें नंबर पर है नीदरलैंड
फिलहाल, भारत में FPI के नजरिये से दसवें नंबर पर नीदरलैंड है. नीदरलैंड का जून, 2022 भारत में एफपीआई 99,140 करोड़ रुपये है. आपको बता दें कि भारत ने चीन के साथ राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद अप्रैल, 2020 में सीमावर्ती देशों की कंपनियों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर बैन लगा दिया था. इसे लेकर अधिसूचना भी जारी की गई थी. 

FPI बढ़ने का कारण
चीन का भारत में FPI बढ़ने के पीछे बाजार में तेजी एक कारण जरूर है, पर मुख्य रूप से यही कारण नहीं है. FPI संपत्तियों में चीन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती जा रही है. दिसंबर, 2019 के आंकड़ों पर गौर करें तो FPI परिसंपत्तियों में चीन की हिस्सेदारी 1.4 फीसदी थी, जो जून 2022 में बढ़कर 1.8 फीसदी हो चुकी है.

दूसरे देशों के जरिए चीन बढ़ा रहा FPI
FPI एक्सपर्ट के अनुसार, कई बड़े देश दूसरे देशों के रास्ते भी निवेश करते हैं. भारत में FPI बढ़ाने के लिए चीन भी ऐसा कर रहा है. चीन की कंपनियां डायरेक्ट निवेश करने के बजाय अन्य देशों के जरिए भी भारत में निवेश कर रही हैं. चीन, केमैन आईलैंड्स और हॉन्ग कॉन्ग को अपना हथियार बना रहा है. इन देशों के जरिए वह भारत में FPI बढ़ा रहा है.

चीन के FPI
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सभी 16 FPI में से 15 श्रेणी 1 में आते हैं. इस श्रेणी में विदेशी सरकार की इकाइयां अथवा बहुराष्ट्रीय एजेंसियां शामिल हैं. इसमें चीन के नेतृत्व वाले एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक की शाखा बेस्ट इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन एवं सात संबंधित कंपनियां, चाइना एएमसी ग्लोबल सेलेक्टिव इक्विटीज फंड, सीआईएफएम एशिया पैसिफिक एडवांटेज फंड, फ्लरिश इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, मैन्यूलाइफ टेडा इंडिया ऑपर्च्यूनिटीज इक्विटी फंड (क्यूडीआईआई), नैशनल सोशल सिक्योरिटी फंड (एनएसएसएफ) और पीपल्स बैंक ऑफ चाइना शामिल हैं.

क्या होता है FPI
FPI यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment). किसी भारतीय कंपनी में किसी विदेशी व्यक्ति या कंपनी द्वारा जब निवेश किया जाता है तो उसे विदेशी निवेश कहा जाता है. विदेशी निवेशक भारत की संबंधित कंपनी के शेयर, बांड खरीद सकता है. देश की कुछ शर्तों के साथ स्वयं का नया कारखाना भी लगा सकता है. लेकिन, इस निवेश का खतरा यह रहता है कि विदेशी निवेशक जब चाहे वह पूंजी निवेश को निकालकर स्वदेश वापस ले जा सकता है.

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