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भारत-यूएई साझेदारी को नई रफ्तार, 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य, गिफ्ट सिटी और धोलेरा में निवेश, तथा परमाणु और डिजिटल सहयोग जैसी पहलें आने वाले वर्षों में इस संबंध को नई दिशा देंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रणनीतिक रिश्तों ने एक नई ऊंचाई छू ली है. सोमवार को दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा, अधोसंरचना विकास, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल भुगतान और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई अहम समझौतों और घोषणाओं की गई हैं.
संक्षिप्त लेकिन निर्णायक रही यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा
इन अहम घोषणाओं का ऐलान यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की भारत यात्रा के समापन पर किया गया. यह यात्रा भले ही तीन घंटे से थोड़ी अधिक की रही हो, लेकिन भारत सरकार ने इसे "संक्षिप्त लेकिन अत्यंत सारगर्भित" करार दिया. राष्ट्रपति नहयान सोमवार शाम दिल्ली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उनका स्वागत किया. दोनों नेता हवाई अड्डे से सीधे प्रधानमंत्री आवास पहुंचे और वहां व्यापक बातचीत हुई.
व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाने की रणनीति
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों में बढ़ते उत्साह को देखते हुए 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का फैसला किया गया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को जोड़ने, भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों के जरिए नए बाजार खोलने पर विशेष जोर दिया जाएगा. गौरतलब है कि 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद भारत-यूएई व्यापार पहले ही तेज रफ्तार पकड़ चुका है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने बड़ा कदम उठाया है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस (ADNOC Gas) के बीच 0.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष LNG की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए समझौता हुआ है, जो 2028 से शुरू होकर 10 वर्षों तक चलेगा.
इसके अलावा, भारत के "शांति" कानून के तहत दोनों देशों ने बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) के विकास और तैनाती, परमाणु संयंत्रों के संचालन एवं रखरखाव तथा परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर सहमति जताई है.
गिफ्ट सिटी और धोलेरा में यूएई निवेश को बढ़ावा
वित्तीय और अधोसंरचना सहयोग को बढ़ाते हुए यूएई की प्रमुख कंपनियां गुजरात के गिफ्ट सिटी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी. फर्स्ट अबू धाबी बैंक यहां अपनी शाखा खोलेगा, जबकि डीपी वर्ल्ड गिफ्ट सिटी से वैश्विक शिप लीजिंग समेत अपने संचालन को संभालेगा.
इसके साथ ही गुजरात सरकार और यूएई के निवेश मंत्रालय के बीच धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास को लेकर एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एमआरओ सुविधा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, रेलवे कनेक्टिविटी, ऊर्जा अधोसंरचना और एक आधुनिक टाउनशिप के विकास की योजना है.
रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल तकनीक में नई साझेदारियां
दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है. यूएई की तकनीकी कंपनी G42 भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में सहयोग करेगी. इसके अलावा डिजिटल डेटा एम्बेसी स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी और अबू धाबी में "हाउस ऑफ इंडिया" की स्थापना भी की जाएगी.
डिजिटल भुगतान और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति नहयान ने राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म्स को आपस में जोड़ने पर भी जोर दिया, ताकि सीमा-पार भुगतान अधिक तेज, सस्ते और कुशल बन सकें. इसके साथ ही दोनों नेताओं ने गाजा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित शांति ढांचे पर भी विचार-विमर्श किया.
भारत-यूएई संबंधों में भरोसे की नई मिसाल
बीते एक दशक में यह राष्ट्रपति नहयान की पहली और बतौर राष्ट्रपति तीसरी भारत यात्रा रही. विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, उनके साथ आया उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस बात का संकेत है कि भारत-यूएई संबंध अब पारंपरिक साझेदारी से आगे बढ़कर एक व्यापक और भरोसेमंद रणनीतिक गठबंधन का रूप ले चुके हैं.
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