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भारत-तंजानिया डील: लोकल करेंसी ट्रेड से बदलेगा गेम, चीन पर बढ़ेगा दबाव

भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत और पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है. दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन (लोकल करेंसी ट्रेड) शुरू करने की संभावना पर गंभीर चर्चा की है. यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को आसान बना सकती है, बल्कि अफ्रीका में बढ़ते चीन के प्रभाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक कदम भी मानी जा रही है.

लोकल करेंसी ट्रेड पर फोकस

भारत सरकार और दार-एस-सलाम के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में यह प्रस्ताव सामने आया कि व्यापार को डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में निपटाया जाए. इससे लेन-देन की लागत कम हो सकती है और व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सरल बन सकती हैं. यह मुद्दा 29-30 अप्रैल 2026 को तंजानिया की राजधानी दार-एस-सलाम में आयोजित भारत-तंजानिया संयुक्त व्यापार समिति (JTC) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया.

अफ्रीका में चीन की मजबूत पकड़

तंजानिया में चीन पहले से ही एक बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेशक है. वह वहां इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खनन जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर चुका है. खासतौर पर ग्रेफाइट और सोने जैसे रणनीतिक खनिजों पर उसकी नजर है. इसके अलावा, चीन ने मई 2026 से तंजानिया सहित कई अफ्रीकी देशों के लिए ‘जीरो-टैरिफ’ नीति लागू की है, जिससे उसकी आर्थिक पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है. ऐसे में भारत की नई पहल को सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धी कदम के रूप में देखा जा रहा है.

भारत और चीन की रणनीति में अंतर

जहां चीन का फोकस खनिज संसाधनों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर है, वहीं भारत तंजानिया के कृषि उत्पादों जैसे दालें और काजू का प्रमुख खरीदार बना हुआ है. भारत की रणनीति ज्यादा संतुलित और साझेदारी आधारित मानी जाती है, जिसमें क्षमता निर्माण और स्थानीय विकास पर जोर दिया जाता है.

कई सेक्टरों में सहयोग की संभावना

बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिनमें शामिल हैं:

1. भारतीय व्यापारियों के लिए लंबी अवधि के व्यापार वीजा
2. फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में नियामक सहयोग
3. स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी
4. जहाज निर्माण और बंदरगाह विकास
5. कौशल विकास और क्षमता निर्माण

इसके अलावा, डिजिटल सहयोग जैसे रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम और डिजिलॉकर जैसी सेवाओं पर भी बातचीत हुई.

भारत के प्रमुख ऑफर

भारत ने तंजानिया को कई क्षेत्रों जैसे शिपयार्ड और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, रेलवे आधुनिकीकरण, लोकोमोटिव और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति, विशेष प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट में सहयोग का प्रस्ताव दिया है, ये पहल तंजानिया की आर्थिक संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की तकनीकी विशेषज्ञता को भी स्थापित कर सकती हैं.

बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार

भारत और तंजानिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है.

1. 2024-25: 8.64 अरब डॉलर
2. 2025-26: 9.02 अरब डॉलर

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं.

बता दें, भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. अफ्रीका में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारत का यह प्रयास उसे एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर सकता है. आने वाले समय में यह पहल वैश्विक व्यापार के नए समीकरण भी तय कर सकती है.
 


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