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2047 तक वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनने की राह पर भारत, 69,725 करोड़ के पैकेज से सेक्टर को बढ़ावा
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नई नीतियां और वित्तीय प्रोत्साहन भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत ने 2047 तक खुद को वैश्विक शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) हब बनाने के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने, शिप रीसाइक्लिंग को मजबूत करने और विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता घटाने के लिए कई बजट समर्थित पहलें शुरू की हैं. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ये नीतियां भारत के समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) को तेज़ी से आगे बढ़ा सकती हैं.
नई दिल्ली में PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक पॉलिसी राउंडटेबल में विशेषज्ञों ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित समुद्री क्षेत्र से जुड़ी नीतियों और उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा की.
चार स्तंभों पर आधारित है सरकार की रणनीति
वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी के चेयरपर्सन सुसांता कुमार पुरोहित ने कहा कि सरकार ने भारत को प्रतिस्पर्धी समुद्री राष्ट्र बनाने के लिए एक व्यापक नीति ढांचा तैयार किया है.
उन्होंने बताया कि यह रणनीति चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है.
1. वित्तपोषण (Financing)
2. क्षमता विस्तार (Capacity Expansion)
3. नीतिगत सुधार (Policy Reform)
4. कौशल विकास (Skill Development)
इनके जरिए देश के समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करने और विदेशी शिपिंग सेवाओं पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है.
69,725 करोड़ रुपये का समुद्री पुनरुद्धार पैकेज
सरकार की रणनीति का केंद्र 69,725 करोड़ रुपये का मैरीटाइम रिवाइटलाइजेशन पैकेज है. इसके साथ ही 25,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड भी बनाया गया है. इसके अलावा शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम को 2036 तक बढ़ा दिया गया है, जिससे घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी. सरकार ने पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के बजट में भी 48 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 5,164.8 करोड़ रुपये कर दिया है. इसे घरेलू जहाज निर्माण और समुद्री लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है.
विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता घटाने की कोशिश
भारत हर साल समुद्री माल ढुलाई के लिए विदेशी शिपिंग कंपनियों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करता है. नीति निर्माताओं का मानना है कि अगर घरेलू जहाज बेड़ा और शिपयार्ड मजबूत किए जाएं तो इस बड़े खर्च को कम किया जा सकता है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार घरेलू शिपबिल्डिंग उद्योग को तेजी से विकसित करने पर जोर दे रही है.
तमिलनाडु में बनेगा नेशनल शिपबिल्डिंग और हेवी इंडस्ट्रीज पार्क
हाल ही में घोषित प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं में तमिलनाडु में नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क शामिल है. करीब 30,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी. इसे पोर्ट अथॉरिटी और तमिलनाडु इंडस्ट्रीज प्रमोशन कॉरपोरेशन के बीच 50:50 संयुक्त उद्यम के रूप में स्थापित किया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना जहाज निर्माण, मरम्मत और समुद्री उद्योग से जुड़े भारी इंजीनियरिंग उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकती है.
शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट स्कीम से बढ़ेगा रीसाइक्लिंग उद्योग
सरकार ने समुद्री क्षेत्र में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट स्कीम भी शुरू की है. इस योजना के तहत अगर जहाज मालिक अपने जहाजों को भारत के यार्ड में रीसाइक्लिंग के लिए भेजते हैं, तो उन्हें स्क्रैप वैल्यू का 40 प्रतिशत तक क्रेडिट नोट मिलेगा. इस क्रेडिट को बाद में भारत में नए जहाज बनवाने की लागत के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे एक तरफ जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और दूसरी तरफ घरेलू शिपयार्ड को नए ऑर्डर मिलेंगे.
जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की प्रगति
भारत पहले ही जहाज रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति कर चुका है. गुजरात के अलंग में मौजूद 106 शिप रीसाइक्लिंग यार्ड अंतरराष्ट्रीय हांगकांग कन्वेंशन के सुरक्षा और पर्यावरण मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं.
पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर भी जोर
विशेषज्ञों ने कहा कि समुद्री क्षेत्र के विस्तार में आधुनिक पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की भी बड़ी भूमिका होगी. उदाहरण के तौर पर तूतीकोरिन पोर्ट में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का आउटर हार्बर प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है, जिससे कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ेगी और दक्षिण भारत को ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा पोर्ट में सोलर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं.
निजी निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की उम्मीद
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नई नीतियां और वित्तीय प्रोत्साहन भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. फिलहाल इस क्षेत्र में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान का दबदबा है. विशेषज्ञों के अनुसार क्लस्टर आधारित विकास और सरकारी वित्तीय योजनाएं आने वाले वर्षों में जहाज निर्माण क्षेत्र में निजी निवेश को भी तेज़ी से बढ़ा सकती हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि अगले पांच साल बेहद अहम होंगे. अगर मौजूदा नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो भारत जहाज निर्माण, रीसाइक्लिंग और समुद्री विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति बना सकता है.
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