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भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता: 98% भारतीय निर्यात अब ड्यूटी-फ्री
यह समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से लाभकारी है. यह भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों और सेवा क्षेत्रों को ओमान में नई संभावनाएं देता है और पेशेवरों की आवाजाही और निवेश के अवसरों को बढ़ाता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत और ओमान ने गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत भारत का लगभग 98 प्रतिशत निर्यात ओमान में ड्यूटी-फ्री पहुंचेगा, जिसमें कपड़ा, कृषि उत्पाद और चमड़ा शामिल हैं. वहीं, भारत ओमान से आने वाले खजूर, मार्बल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क में रियायत देगा. यह समझौता अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से लागू होने की संभावना है. इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने ओमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए.
प्रमुख उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री पहुंच
ओमान ने 98 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क देने की घोषणा की है, जिससे भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को लाभ होगा. इससे रत्न एवं आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को तत्काल लाभ मिलेगा. भारत की ओर से भी लगभग 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में रियायत दी जाएगी, जो मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करती है. संवेदनशील उत्पादों जैसे खजूर, मार्बल और पेट्रोकेमिकल्स के लिए भारत ने टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) आधारित ढांचा अपनाया है.
संवेदनशील उत्पादों पर सुरक्षा
भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है. इसमें डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी बुलियन, आभूषण, फुटवियर, खेल सामान और कई बेस मेटल्स शामिल हैं. फिलहाल, ओमान में लेबर इंटेंसिव उत्पादों पर लगभग 5 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है.
सेवा क्षेत्र में नए अवसर
सेवा क्षेत्र में ओमान ने कंप्यूटर सेवाएं, बिजनेस और प्रोफेशनल सेवाएं, ऑडियो-विजुअल सेवाएं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण कमिटमेंट दी हैं. ओमान का वैश्विक सेवा आयात 12.52 अरब डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 5.31 प्रतिशत है. यह भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर पैदा करता है.
भारतीय पेशेवरों की आवाजाही होगी आसान
इस व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) का एक अहम हिस्सा भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाना है. ओमान ने Mode-4 (कुशल पेशेवरों की आवाजाही) के नियमों को सरल करने का वादा किया है. इसके तहत इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफर की कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाएगी. कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस सप्लायर्स की रहने की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर दो साल कर दी गई है, जिसे आगे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है. समझौता अकाउंटेंसी, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, मेडिकल और संबंधित सेवाओं में भारतीय पेशेवरों को बेहतर प्रवेश और रहने की सुविधा भी देता है.
100% FDI और सोशल सिक्योरिटी वार्ता
इस समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को ओमान में प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति मिलेगी. दोनों देशों ने भविष्य में ओमान में कंट्रीब्यूटरी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम लागू होने के बाद सोशल सिक्योरिटी समझौते पर बातचीत करने पर सहमति जताई है.
रणनीतिक साझेदारी और व्यापार आंकड़े
ओमान भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं का प्रवेश द्वार है. ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, और भारत को सालाना लगभग 2 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिलता है.
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.5 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 4 अरब डॉलर और आयात 6.54 अरब डॉलर था. ओमान, GCC देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है.
भारत का दूसरा GCC व्यापार समझौता
यह समझौता पिछले छह महीनों में भारत का दूसरा प्रमुख व्यापार समझौता है. पहला समझौता यूके के साथ हुआ था. GCC के अन्य सदस्य देशों में भारत ने मई 2022 में UAE के साथ समझौता किया था और अब कतर के साथ बातचीत शुरू होने की संभावना है.
भारत और ओमान के बीच CEPA पर औपचारिक बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी और इस साल इसे पूरा कर लिया गया.
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