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भारत-जापान की बड़ी रक्षा साझेदारी, युद्धपोत निर्माण और समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग
नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी की बैठक में समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग और युद्धपोतों के डिजाइन व निर्माण में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत और जापान ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दोनों देशों ने नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के क्षेत्र में संयुक्त सहयोग की संभावनाओं पर सहमति जताई है. यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई बैठक में लिया गया.
राजनाथ सिंह से इस समझौते को लेकर अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट भी शेयर करते हुए लिखा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव! नई दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी सान के साथ बेहद सार्थक और सकारात्मक बैठक हुई. हमारी बातचीत का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने और रणनीतिक विश्वास को और गहरा करने पर रहा.
समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए नया समझौता
बैठक के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत भारतीय नौसेना और जापान की समुद्री आत्मरक्षा सेना के बीच सहयोग का एक व्यापक ढांचा तैयार किया जाएगा. इस साझेदारी के तहत समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और मानवीय सहायता व आपदा राहत कार्यों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे. समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए भी आपसी तालमेल बढ़ाया जाएगा.
युद्धपोत निर्माण में साथ आएंगे भारत और जापान
भारत और जापान ने समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित करने में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई. इसके अलावा जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विनिर्माण क्षमता को मिलाकर नौसेना के जहाजों के डिजाइन और निर्माण में संयुक्त विकास की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा. दोनों देश भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जहाज निर्माण क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के विकल्प तलाशेंगे. जहाजों की मरम्मत और रखरखाव सुविधाओं तक एक-दूसरे की पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा.
सैन्य अभ्यासों को मिलेगा नया विस्तार
बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों के विस्तार का स्वागत किया. थलसेना के ‘धर्म गार्जियन’ और समुद्री अभ्यास ‘जैमेक्स’ के अलावा इस वर्ष के अंत में होने वाले वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों पर भी चर्चा हुई. इस अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत पहुंचेंगे. दोनों देश भविष्य में अपने सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने, बिना चालक वाले प्रणालियों को शामिल करने और जरूरत पड़ने पर कम समय की सूचना पर संयुक्त अभ्यास आयोजित करने की दिशा में भी काम करेंगे.
रक्षा तकनीक और उपकरणों पर भी जोर
भारत और जापान ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों देशों ने जहाजों पर लगाए जाने वाले ‘यूनिकॉर्न’ एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली परियोजना को अपनी बढ़ती रक्षा साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया. यह भारत और जापान के बीच रक्षा उपकरण हस्तांतरण से जुड़ी पहली परियोजना है. दोनों पक्षों ने इसे जल्द लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई. इसके साथ ही भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और जापान की अधिग्रहण, प्रौद्योगिकी एवं रसद एजेंसी के बीच रक्षा अनुसंधान और विकास सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा रणनीतिक तालमेल
भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री मार्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों देशों ने क्षेत्र में बल प्रयोग या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया. दोनों पक्षों ने परिचालन, खुफिया जानकारी, रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर भी सहमति जताई. यह समूह दोनों देशों के बीच तय रक्षा सहयोग परियोजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी प्रगति की निगरानी करेगा.
भारत-जापान के बीच बढ़ती यह रक्षा साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक हितों को मजबूती देगी. खासतौर पर समुद्री सुरक्षा, युद्धपोत निर्माण, रक्षा तकनीक और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.
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