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भारत लॉन्च करने जा रहा अपना पहला ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल, जानिए क्या है इसकी खासियत?

भारत ने अपने पहले ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल की तैयारी कर ली है. डीप ओशन मिशन के तहत समुद्र में 6,000 मीटर की गहराई में जाना आसान हो जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत आज हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहा है. इसी कड़ी में अब टेक्नोलॉजी के मामले में भी भारत किसी से पीछे नहीं है. भारत में कई स्वदेशी टेक्नोलॉजी सक्सेसफुल रही है. इसी में से एक ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल भी है. ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल पूरी तरह से भारत में तैयार किया गया है. ये कटिंग एज साइंस में देश की आत्मनिर्भरता को दिखाता है. तो आइए जानते हैं कि आखिर ये ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल कैसे काम करेगा और इसकी खासियत क्या है?

ऐसे काम करेगा ह्यूमन अंडरवाटर सबमर्सिबल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अर्थ साइंस मिनिस्टर जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अंडरवाटर सबमर्सिबल गहरे समुद्र में चलने वाला ह्यूमन व्हीकल है. ये डीप ओशन मिशन के तहत समुद्र में 500 मीटर की गहराई तक जा सकता है. अगले साल तक इसे 6000 मीटर तक गहरा ले जाने की कोशिश की जाएगी. इस बड़े व्हीकल के ट्रांसपोर्टेशन सपोर्ट के लिए बड़े प्लेटफॉर्म की जरूरत होती है. वहीं इस पनडुब्बी की कैपेसिटी ज्यादा है और ये समुद्र में लंबे समय तक रहकर आराम से चल सकता है.

क्या है भारत का डीप ओशन मिशन?
डीप ओशन मिशन का उद्देश्य भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करना है. डीप ओशन मिशन में खनिजों, मेटल और अज्ञात समुद्री बायो डायवर्सिटी के साथ ज्यादा से ज्यादा सोर्सेस सर्च करना है. ये देश की इकनोमिक ग्रोथ और एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी के लिए बेहद जरूरी है. इस मिशन का मकसद केवल महासागरों की गहराई का पता लगाना ही नहीं बल्कि इसके साथ भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करना भी है. जो की भारत के भविष्य के लिए अच्छा साबित हो सकता है.

अंडरवाटर सबमर्सिबल की खासियत 
जानकारी के अनुसार इस साल ये सबमर्सिबल 500 मीटर की गहराई तक जाकर काम करेगा, लेकिन आने वाले साल 2026 में ये 6,000 मीटर की गहराई तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है. भारत के कई ऐतिहासिक मिशन की तरह ये भी उसी टाइम लिमिट को मेंटेन करेगा. इसमें गगनयान अंतरिक्ष मिशन भी शामिल है.

 


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