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ग्लोबल टैरिफ टेंशन के बीच भारत एक मजबूत और रणनीतिक आर्थिक केंद्र के रूप में उभरा- रिपोर्ट

दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बावजूद, भारत की खपत पर आधारित अर्थव्यवस्था, बड़ी जनसंख्या और कम निर्यात निर्भरता की वजह से भारत की स्थिति मजबूत है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

Pantomath Group की कंपनी Asit C. Mehta Investment Intermediates Ltd. (ACMIIL) ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है जिसका नाम है “Markets ‘TARIFF’IED – Way Ahead”. इस रिपोर्ट में अमेरिका की नई टैरिफ (आयात शुल्क) नीति के बाद बदलते हुए वैश्विक व्यापार माहौल और उसमें भारत की भूमिका को समझाया गया है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने भारी टैरिफ बढ़ोतरी लागू की, जिसे ट्रंप सरकार ने “Liberation Day” कहा. इसके बाद से दुनियाभर के फाइनेंशियल मार्केट्स (वित्तीय बाजारों) में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. अमेरिका का मकसद देश में मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) को बढ़ावा देना है, लेकिन इससे चीन, यूरोपीय यूनियन और कनाडा जैसे देशों ने भी जवाबी कदम उठाए हैं. इससे व्यापार को लेकर एक तरह का टकराव शुरू हो गया है, जिससे हालात और जटिल बन गए हैं.

भारत: बदलते वैश्विक हालात में एक स्वाभाविक लाभार्थी

दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बावजूद, भारत की खपत पर आधारित अर्थव्यवस्था, बड़ी जनसंख्या और कम निर्यात निर्भरता की वजह से भारत की स्थिति मजबूत है. भारत की अमेरिका को होने वाली वस्तुओं की कुल निर्यात सिर्फ GDP का 2.1% है, जिससे भारत उन देशों की तुलना में कम प्रभावित होता है जो बहुत ज़्यादा निर्यात पर निर्भर हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे अमेरिका चीनी सामानों पर भारी टैरिफ (145% तक) लगा रहा है, भारत को सप्लाई चेन में बदलाव से फायदा हो सकता है. भारत का जवाबी टैरिफ सिर्फ 26% है, जो बहुत कम है और इससे भारत को एक अच्छे मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड पार्टनर के रूप में देखा जा रहा है.

भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) अंतिम चरण में

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता लगभग तैयार हो चुका है. इस समझौते से भारत के PLI स्कीम के तहत अमेरिका से शून्य शुल्क (zero-duty) पर सामान मंगवाने का रास्ता खुलेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचना है. यह समझौता अमेरिका की उन्नत टेक्नोलॉजी जैसे डिफेंस, क्लीन एनर्जी, और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी चीज़ों के भारत में आयात का रास्ता भी खोलेगा.

भारत के मजबूत आर्थिक संकेतक और निवेश के अवसर

भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती उसके मजबूत आर्थिक आधार से साफ झलकती है. वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान है. साथ ही सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए काम कर रही है और वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) FY25 में घटकर 4.9% होने की उम्मीद है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अब धीरे-धीरे नीतिगत दरों में ढील देने की ओर बढ़ रहा है. रेपो रेट में कटौती की संभावना है, जिससे निजी निवेश (private investment) को बढ़ावा मिलेगा.

भारत की जनसंख्या संरचना भी एक बड़ी ताकत है — 51% आबादी 40 साल से कम उम्र की है, जिससे खपत (consumption) बढ़ रही है. खासकर Gen Z और मिलेनियल्स सबसे ज़्यादा खर्च करने वाले वर्ग बनते जा रहे हैं. शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो तकनीकी और वैल्यूएशन संकेतक बताते हैं कि बाजार अब नीचे से उबरने की स्थिति में है, जिससे मध्यम से लंबी अवधि में शेयरों में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है.

प्रमुख सेक्टर्स (उद्योग क्षेत्र) पर एक नजर

रिपोर्ट में कई मजबूत निवेश के अवसरों की पहचान की गई है, जो विभिन्न सेक्टर्स में उभर रहे हैं:

1. बैंकिंग सेक्टर: बैंकिंग सेक्टर अब मजबूत स्थिति में है, FY26 में क्रेडिट ग्रोथ 11–13% तक पहुंचने का अनुमान है. खराब कर्ज (NPA) अगले 12–18 महीनों में सिर्फ 2–3% रहने की उम्मीद है. प्राइवेट बैंकों की कमाई FY25–27 के बीच 14% की दर से बढ़ेगी, जबकि सरकारी बैंकों के लिए यह 8% होगी. 

2. खपत क्षेत्र (FMCG और डिस्क्रेशनरी): FY26 में 6–8% की वृद्धि की उम्मीद है, ग्रामीण मांग में सुधार और शहरी इलाकों में प्रीमियम उत्पादों की मांग बढ़ रही है. कच्चे तेल की कीमतें कम होने से लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा. डिजिटल तकनीक और ई-कॉमर्स का तेजी से फैलाव इस क्षेत्र को और मज़बूत कर रहा है.

3. रक्षा क्षेत्र: FY26 में रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ रखा गया है, जो पिछले साल से 9.5% अधिक है. इसमें से ₹1.8 लाख करोड़ पूंजी खर्च के लिए हैं और 75% घरेलू खरीद के लिए आरक्षित है. FY26 तक ₹30,000 करोड़ और FY29 तक ₹50,000 करोड़ के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है. भारत वैश्विक रक्षा साझेदारियों के चलते रणनीतिक मोड़ पर खड़ा है.

4. ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण (ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन): भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक 500 GW गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए. जनवरी 2025 तक कुल 466.26 GW क्षमता स्थापित हो चुकी है. जिसमें सौर (100.33 GW) और पवन (48.37 GW) ऊर्जा में तेजी से वृद्धि हो रही है. ग्रिड को आधुनिक बनाने और बिजली ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.

5. डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर्स: दिसंबर 2024 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1,150 MW तक पहुंच चुकी है. ₹50,000 करोड़ (6 अरब डॉलर) का निवेश 2024–26 के बीच इस क्षेत्र में आने की उम्मीद है. मोबाइल डेटा ट्रैफिक पिछले 5 वर्षों में 25% की दर से बढ़ा है, जो FY2026 तक 33–35 GB/माह तक पहुंच सकता है. 

6. अस्पताल और हेल्थकेयर: 7 साल के सुधार के बाद, FY27 तक अस्पतालों की बेड क्षमता 32% बढ़ने की उम्मीद है. FY24 में बीमा कवरेज 41% तक बढ़ी, खासकर सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की वजह से, अब अगली हेल्थकेयर ग्रोथ टियर 2 और छोटे शहरों में देखी जाएगी.

7. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स: 2025–26 के बजट में ₹11.21 लाख करोड़ (GDP का 3.1%) इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लिए तय किए गए हैं. रेलवे, रक्षा, बिजली और डेटा सेंटर में भारी निवेश होगा. भारत को $7 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिए अगले 15 वर्षों में $840 अरब के शहरी विकास की जरूरत है.

8. कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग सेक्टर: यह सेक्टर भारत के औद्योगिक विकास की रीढ़ है. इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, खनन, तेल-गैस, स्टील, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है. ‘मेक इन इंडिया’, आत्मनिर्भर भारत और सरकार की नीति सहायता से यह सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है. वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और क्षेत्रीय व्यापार समझौते भारत को मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी इनोवेशन में फायदा दिला सकते हैं. 

टॉप निवेश के लिए स्टॉक्स (शेयरों) के सुझाव:

• Interglobe Aviation Ltd. (IndiGo एयरलाइंस)
• Transport Corporation Of India Ltd.
• Larsen & Toubro Ltd. (L&T)
• Axis Bank Ltd.
• Adani Ports and Special Economic Zone Ltd.
• Cipla Ltd.
• ITD Cementation India Ltd.
• J Kumar Infraprojects Ltd.
• Maruti Suzuki India Ltd.
• Hindustan Aeronautics Ltd. (HAL)
• Quality Power Electrical Equipments Ltd.

निष्कर्ष (Conclusion): "Markets ‘TARIFF’IED – Way Ahead" रिपोर्ट वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों का विस्तृत विश्लेषण देती है और दिखाती है कि भारत किस तरह एक मज़बूत और आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभरा है, खासकर जब दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है. संरचनात्मक सुधारों, खपत आधारित अर्थव्यवस्था और बेहतर आर्थिक संकेतकों की वजह से भारत लंबी अवधि के विकास की एक मजबूत कहानी के रूप में सामने आ रहा है.
 


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