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भारत-जर्मनी रिश्तों को नई ऊंचाई, डिफेंस से सेमीकंडक्टर तक 4 बड़े समझौते
भारत और जर्मनी के बीच हुए ये चार ऐतिहासिक समझौते दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत और जर्मनी के रणनीतिक रिश्तों में 12 जनवरी 2026 को एक नया अध्याय जुड़ गया. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, शिक्षा और आयुर्वेद जैसे अहम क्षेत्रों में चार ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इन समझौतों को भारत की सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक भूमिका के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
चार समझौते, भविष्य की मजबूत नींव
इस द्विपक्षीय बैठक का सबसे बड़ा परिणाम चार अहम समझौते रहे. इनमें सबसे महत्वपूर्ण समझौता क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सहयोग को लेकर हुआ है. मौजूदा डिजिटल और रक्षा युग में सेमीकंडक्टर मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल सिस्टम तक की रीढ़ बन चुके हैं. जर्मनी के साथ यह साझेदारी भारत को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी.
रक्षा सहयोग पर रोडमैप तैयार
भारत और जर्मनी ने रक्षा सहयोग को लेकर एक संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में सहयोग दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे का सबसे मजबूत आधार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में रक्षा व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी को नई गति मिलेगी.
शिक्षा और आयुर्वेद में भी बढ़ेगा सहयोग
तीसरा अहम समझौता उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुआ है. इससे भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी में शिक्षा और शोध के नए अवसर खुलने की उम्मीद है. इसके अलावा आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई मजबूती मिल सकती है.
आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर गंभीर चर्चा
यह मुलाकात केवल आर्थिक और तकनीकी मुद्दों तक सीमित नहीं रही. प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर के बीच वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई. यूक्रेन और गाजा में जारी संघर्षों पर दोनों नेताओं ने विचार साझा किए. पीएम मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए खतरा बताते हुए इस पर सख्त रुख अपनाया और वैश्विक स्तर पर एकजुट प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया.
भारत-जर्मनी आर्थिक रिश्तों की गहराई
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान यह भी उल्लेख किया कि भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से काम कर रही हैं. यह दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को दर्शाता है और भविष्य में निवेश व रोजगार के नए अवसरों की संभावना को भी रेखांकित करता है.
विवेकानंद और गांधी के विचारों का जिक्र
पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर की यात्रा को स्वामी विवेकानंद की जयंती से जोड़ते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत और जर्मनी के बीच दर्शन और न्याय के संबंधों की बात की थी. वहीं जर्मन चांसलर ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत महात्मा गांधी से जुड़े स्थल के दौरे से की. उन्होंने गांधी जी के प्रसिद्ध कथन “आप वो बदलाव बनें, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं.” को याद करते हुए भारत की ऐतिहासिक भूमिका की सराहना की. चांसलर ने अहमदाबाद को आधुनिक भारत का पालना भी बताया.
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