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बारिश के मौसम में नदियों की तरह लबालब हुआ हमारा विदेशी मुद्रा भंडार, कितनी सुखद है ये खबर?
विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है. हमारा ये भंडार लबालब हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बारिश के मौसम में नदियों की तरह हमारा विदेशी मुद्रा भंडार भी लबालब हो गया है. बीते 2 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 7.53 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी हुई और यह बढ़कर 674.91 बिलियन डॉलर पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, हमारा विदेशी मुद्रा भंडार इस वृद्धि के साथ अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. इससे एक सप्ताह पहले इस भंडार में कमी देखने को मिली थी.
गोल्ड रिज़र्व भी पहले से बढ़ा
इस दौरान, भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Asset-FCAs) में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है. 2 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान FCAs में 5.162 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. अब हमारा यह भंडार बढ़कर 592.039 अरब डॉलर हो गया है.बता दें कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में फॉरेन करेंसी असेट एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसी तरह, भारत के स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिज़र्व में भी इजाफा हुआ है. यह 2.404 अरब डॉलर उछाल के साथ 60.099 अरब डॉलर पहुंच गया है.
क्या होता है ये भंडार?
अब बात विदेशी मुद्रा भंडार की निकली है, तो चलिए इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं. विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, SDR, IMF के पास जमा राशि और ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नज़र रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है. विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से जारी की जाने वाली मुद्राएं शामिल होती हैं. अधिकांश विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा भाग US डॉलर के रूप में होता है.
इसलिए है महत्वपूर्ण
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इसका इस्तेमाल देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ ही कई कामों में किया जाता है. वैसे, दुनिया के अधिकतर देश अपना विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में रखना पसंद करते हैं, क्योंकि अधिकांश व्यापार डॉलर में ही होता है. लेकिन इसमें सीमित संख्या में ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन भी हो सकते हैं. विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.
भरे भंडार के फायदे
विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है. इससे देश के लिए आयात बिल का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है. इस भंडार के भरे रहने से संकट के समय भी देश एक आरामदायक स्थिति का अनुभव कर सकता है. सरकार और आरबीआई किसी भी बाहरी या अंदरुनी वित्तीय संकट से निपटने में सक्षम हो जाते हैं. RBI देश के विदेशी मुद्रा भंडार के कस्टोडियन या मैनेजर के रूप में कार्य करता है. उसे कार्य सरकार से साथ मिलकर तैयार किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क के अनुसार करना होता है. रिजव बैंक रुपए की स्थिति को मजबूत रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश का 64% विदेशी मुद्रा भंडार विदेशों में ट्रेजरी बिल आदि के रूप में होता है और यह मुख्य रूप से अमेरिका में रखा होता है.
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