होम / बिजनेस / भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील, ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी छलांग
भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील, ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी छलांग
भारत-कनाडा की यह साझेदारी न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत और कनाडा ने कूटनीतिक तल्खी के दौर को पीछे छोड़ते हुए रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय खोल दिया है. 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम आपूर्ति डील के साथ दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, खनिज, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का खाका तैयार किया है. इस समझौते को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, जबकि क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से यह चीन और पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है.
लंबे गतिरोध के बाद रिश्तों में नई गर्माहट
बीते वर्षों में आई कूटनीतिक खटास के बाद यह पहली बड़ी पहल है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर सहमति बनी. दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को मौजूदा 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता CEPA को इस वर्ष के अंत तक अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई गई.
2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील क्या है
भारत सरकार और कनाडा की सस्काटून स्थित प्रमुख कंपनी Cameco के बीच 2.6 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. समझौते के तहत 2027 से 2035 के बीच भारत को करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति की जाएगी. यह ईंधन भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बताया और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर SMR तथा उन्नत रिएक्टर तकनीक पर संयुक्त सहयोग की भी घोषणा की.
पेंशन फंड का 100 अरब डॉलर निवेश
आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर कनाडा के पेंशन फंड्स का भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश भी चर्चा में रहा. इसे भारत की विकास क्षमता में कनाडा के विश्वास का संकेत माना जा रहा है. दोनों देशों का उद्देश्य निवेश और व्यापार के जरिए रोजगार सृजन और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है.
रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार
रक्षा क्षेत्र में भारत-कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति बनी है. इसके तहत रक्षा उद्योगों के सहयोग, समुद्री सुरक्षा और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा. आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ साझा रणनीति पर भी जोर दिया गया. दोनों देश मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क पर सख्ती से नकेल कसने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे.
महत्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस
यूरेनियम के अलावा दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ मेटल्स की आपूर्ति पर भी समझौता हुआ है. यह भारत के इलेक्ट्रिक वाहन EV और स्वच्छ ऊर्जा मिशन के लिए अहम माना जा रहा है. हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और नई तकनीकों पर भी साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को मजबूती मिलेगी.
अंतरिक्ष और शिक्षा में नई पहल
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO और Canadian Space Agency CSA के बीच पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष अन्वेषण और क्वांटम तकनीक में सहयोग पर सहमति बनी है. इसके अलावा कई कनाडाई विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोलने की तैयारी में हैं. कृत्रिम बुद्धिमत्ता AI, स्वास्थ्य, कृषि और नवाचार के क्षेत्रों में संयुक्त शोध को बढ़ावा दिया जाएगा.
चीन-पाकिस्तान क्यों हो सकते हैं असहज
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने वाली यह डील क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है. चीन पहले से ही दक्षिण एशिया में रणनीतिक विस्तार की नीति पर काम कर रहा है, जबकि पाकिस्तान चीन के साथ घनिष्ठ रक्षा और आर्थिक संबंध रखता है. भारत-कनाडा की यह साझेदारी न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करती है.
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, वैश्विक शांति और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CEPA और यूरेनियम डील तय समय पर लागू होते हैं, तो यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग का मजबूत स्तंभ बन सकती है.
टैग्स