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2026 तक दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उपभोक्ता बन सकता है भारत : एन. चंद्रशेखरन
Tata Steel के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा शेयरधारकों को संबोधित पत्र से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख स्टील उत्पादक कंपनियों में से एक टाटा स्टील (Tata Steel) ने भारत की अर्थव्यवस्था और स्टील उद्योग को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है. दरअसल, टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने निवेशकों को समर्पित अपने वार्षिक पत्र में लिखा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इसकी प्रमुख वजह जनसंख्या संरचना, ढांचागत सुधार, नियंत्रित महंगाई और सरकारी फिस्कल छूटें हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पत्र में चंद्रशेखरन के और क्या जानकारी साझा की है?
ब्याज दरों में कटौती और टैक्स छूट से बढ़ेगा निवेश
चंद्रशेखरन के अनुसार, ब्याज दरों में संभावित कटौती, पूंजीगत खर्च में वृद्धि और टैक्स छूटों की वजह से निजी निवेश और उपभोग में तेजी आएगी. उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि भारत 2026 तक दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उपभोक्ता बन सकता है.
वैश्विक दबाव के बावजूद भारत का स्टील सेक्टर मजबूत
वित्त वर्ष 2024-25 में वैश्विक स्टील उत्पादन 1.83 अरब टन पर स्थिर रहा. कोकिंग कोल की कीमतें भले ही कम रहीं, लेकिन सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं ने मुनाफे पर दबाव बनाए रखा. इसके बावजूद भारत का स्टील क्षेत्र बाकी दुनिया की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. देश में कच्चे स्टील का उत्पादन 4.7% और खपत 10.2% की दर से बढ़ी है, जिसका श्रेय निर्माण, शहरीकरण और औद्योगिक विकास को जाता है.
टाटा स्टील का भारत में रिकॉर्ड प्रदर्शन
टाटा स्टील ने भारत में अब तक का सबसे ज्यादा कच्चा स्टील उत्पादन दर्ज किया, जो 21.7 मिलियन टन रहा. इस दौरान कंपनी ने 20.9 मिलियन टन स्टील की डिलीवरी की. ओडिशा के कलिंगनगर में देश का सबसे बड़ा ब्लास्ट फर्नेस (5 मिलियन टन क्षमता) शुरू किया गया है, जो 27,000 करोड़ रुपये की फेज-2 विस्तार योजना का हिस्सा है. नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,000 करोड़ रुपये का EBITDA और सकारात्मक फ्री कैश फ्लो हासिल किया.
यूरोप में ग्रीन स्टील की ओर बढ़ते कदम
यूरोप में टाटा स्टील पर्यावरण अनुकूल स्टील उत्पादन की दिशा में बड़े बदलाव कर रही है. यूके के पोर्ट टालबोट प्लांट में दो पुराने ब्लास्ट फर्नेस को बंद कर वहां इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) लगाने की योजना है, जिसकी शुरुआत जुलाई 2025 से होगी. यूके सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए £500 मिलियन की सहायता दी है. इस बदलाव से कंपनी का फिक्स्ड खर्च £762 मिलियन से घटकर £540 मिलियन रह जाएगा.
नीदरलैंड्स में भी कंपनी पर्यावरण के अनुकूल तकनीक की ओर बढ़ रही है और 2030 तक एक ब्लास्ट फर्नेस और एक कोक ओवन को बंद करने की योजना पर काम कर रही है. इसके लिए डच सरकार के साथ मिलकर €500 मिलियन की लागत कटौती योजना शुरू की गई है.
भविष्य की रणनीति
टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टी. वी. नरेंद्रन और ईडी व सीएफओ कौशिक चटर्जी ने बताया कि कंपनी भविष्य में पूंजीगत निवेश, संचालन में कुशलता और टिकाऊ विकास (Sustainability) पर ध्यान देगी. कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही में 6,200 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया, जिससे उसका कुल नेट डेब्ट घटकर 82,579 करोड़ रुपये रह गया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया, “वित्त वर्ष 2025-26 में भी हम इसी रणनीति पर काम करेंगे. लागत में कटौती और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के जरिए बेहतर कैश फ्लो बनाएंगे ताकि कर्ज और घटाया जा सके.”
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