होम / बिजनेस / भारत ने US छूट के बाद रूस से खरीदे 30 मिलियन बैरल तेल, मिडिल ईस्ट की कमी पूरी करने की तैयारी
भारत ने US छूट के बाद रूस से खरीदे 30 मिलियन बैरल तेल, मिडिल ईस्ट की कमी पूरी करने की तैयारी
US छूट 5 मार्च 2026 से पहले लोड किए गए रशियन क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होती है, बशर्ते इसे भारत भेजा जाए और कोई इंडियन फर्म खरीदे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
अमेरिकी अनुमति मिलने के बाद, भारत ने रूस से लगभग 30 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल खरीदी है ताकि मिडिल ईस्ट में तेल आपूर्ति में आई कमी को पूरा किया जा सके. यह जानकारी उन स्रोतों से मिली है जो डील के विवरण से परिचित हैं.
US से मिली छूट के बाद बढ़ी खरीदारी
पिछले साल तक, भारत अमेरिकी दबाव के चलते रूस से तेल की खरीद को सीमित कर रहा था और सऊदी अरब व इराक से सप्लाई लेकर कमी को पूरा कर रहा था. लेकिन मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में ईरान पर अमेरिकी और इज़राइली हमलों के बाद सप्लाई रुक गई. इस स्थिति ने भारतीय रिफाइनर कंपनियों को रूस की ओर रुख करने के लिए मजबूर किया.
इंडियन ऑयल और रिलायंस ने स्पॉट मार्केट में तेल खरीदा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, US से छूट मिलने के बाद, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने स्पॉट मार्केट में उपलब्ध सभी रशियन क्रूड के बिना बिके कार्गो खरीद लिए. इनमें यूराल्स, ESPO और वरंडे जैसे कई ग्रेड शामिल हैं. तेल को लंदन के डेटेड ब्रेंट बेंचमार्क की तुलना में 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर खरीदा गया. लगभग 10 मिलियन बैरल इंडियन ऑयल और उतने ही रिलायंस ने खरीदे. इन कंपनियों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
रूसी तेल भारत की ओर बढ़ा
US छूट 5 मार्च 2026 से पहले लोड किए गए रशियन क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होती है, बशर्ते इसे भारत भेजा जाए और कोई इंडियन फर्म खरीदे. इसके बाद, जो टैंकर पहले अन्य देशों के लिए रवाना हुए थे, उन्होंने अपना रूट बदलकर भारत की ओर रुख किया.
इस कदम से यह स्पष्ट है कि भारत ने 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद रूस से तेल खरीदारी बढ़ा दी थी. डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार, 2024 में भारत की रोज़ाना खरीदारी 2 मिलियन बैरल तक पहुंची, लेकिन फरवरी 2026 में यह औसत 1.06 मिलियन बैरल रोज़ाना तक गिर गया.
मिडिल ईस्ट की कमी को भरने का प्रयास
भारत की यह खरीदारी मिडिल ईस्ट में सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए अहम कदम मानी जा रही है. होर्मुज स्ट्रेट, जो इस क्षेत्र के बड़े तेल उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है, हाल ही में तनाव के चलते प्रभावित हुआ था. इस परिस्थिति में रूस से तेल की खरीद भारतीय रिफाइनर कंपनियों के लिए रणनीतिक विकल्प साबित हुई.
टैग्स