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मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा भारत, विदेशों में Made In India मोबाइल की मांग

भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दुनिया के लिए एक हब के रूप में उभर रहा है. यहां मैन्यूफैक्चर हुए मोबाइल की कई देशों में मांग बढ़ रही है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया है. इतना ही नहीं दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मेड-इन-इंडिया (Made In India) मोबाइल का उपयोग कर रही हैं. तो आइए जानते हैं कैसे दुनिया में भारत के मोबाइल की मांग बढ़ रही है और कौन—न से देश मेड इन इंडिया मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं?

पीएम मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का मिला फायदा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के चलते भारत तेजी से ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है. 2014 में पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में शानदार ग्रोथ दर्ज की है. साथ ही विदेशी कंपनियों का भारत के अंदर अपने प्लांट लगाने पर भी मजबूर होना पड़ा है. इससे रोजगार में भी बढ़ावा देखने को मिला है.

भारत में ही तैयार हो रहे 99 प्रतिशत मोबाइल 
एक समय था जब 80 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत द्वारा आयात (Import) किए जाते थे. लेकिन आज तस्वीर बदल गई है. अब लगभग 99 प्रतिशत फोन भारत में ही बनाए जा रहे हैं. इतना ही नहीं इन्हें दूसरे देशों में एक्सपोर्ट भी किया जा रहा है. विदेशों में भारतीय मोबाइल फोन की मांग बढ़ रही है. 

इन देशों में इस्तेमाल कर रहे भारतीय फोन
आपको बता दें, यूके (UK), नीदरलैंड (Netherlands), ऑस्ट्रिया (Austria) , इटली (Italy) , दक्षिण अफ्रीका (South Africa) और अन्य देशों जैसी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मेड-इन-इंडिया मोबाइल का उपयोग कर रही हैं. मेक इन इंडिया ने भारत की अर्थव्यवस्था को सभी के लिए खोल दिया है. 

इन प्रोडक्ट्स का भी बढ़ रहा एक्सपोर्ट
कृषि उत्पादन के लिए मशहूर बिहार का हाजीपुर रूसी सेना के लिए सुरक्षा जूते बनाकर मेक इन इंडिया की अपनी कहानी लिख रहा है. 300 कर्मचारियों के साथ, जिनमें से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, इस कारखाने ने पिछले साल 100 करोड़ रुपये के 1.5 मिलियन जोड़ी जूते निर्यात (Export) किए. वहीं, मेड-इन-इंडिया यूपीआई वैश्विक स्तर पर पसंदीदा बन रहा है. फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, भूटान, यूएई, सिंगापुर और नेपाल जैसी विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं इसे अपना रही हैं. इसके अलावा दूध, पनीर, दही, फ्लेवर्ड मिल्क, आइसक्रीम, चॉकलेट और अन्य सहित अमूल उत्पादों को एशिया, खाड़ी और अफ्रीका के 50 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है.
 


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